रक्षाबंधन 2026, 28 अगस्त शुक्रवार को मनाया जाएगा, और इस्लामी दृष्टिकोण से मुस्लिम व्यक्ति के लिए राखी बांधना धार्मिक रस्म के तौर पर जायज़ नहीं माना जाता — यह इस्लामी विद्वान मुफ्ती सलाउद्दीन कासमी की राय है। इस लेख में आप रक्षाबंधन 2026 की सही तारीख़ और शुभ मुहूर्त, राखी को लेकर इस्लाम में ‘तशब्बुह’ की अवधारणा, इसी दिन पड़ रहे चंद्र ग्रहण का असर, और भाई-बहन के रिश्ते पर धार्मिक व सांस्कृतिक दृष्टिकोण के बीच का अंतर — सब कुछ विस्तार से जानेंगे।
मुख्य बातें (Quick Facts):
- रक्षाबंधन 2026: शुक्रवार, 28 अगस्त
- राखी बांधने का शुभ मुहूर्त: सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक
- इस्लामी दृष्टिकोण से राखी बांधना धार्मिक रस्म के तौर पर जायज़ नहीं माना जाता (मुफ्ती सलाउद्दीन कासमी)
- 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा — इसलिए सूतक मान्य नहीं
- भाई-बहन का प्रेम और राखी की धार्मिक रस्म — दोनों अलग-अलग विषय हैं
इस लेख में:
- रक्षाबंधन 2026 कब मनाया जाएगा?
- क्या मुसलमान राखी बांध सकते हैं?
- इस्लाम में गैर-इस्लामी परंपराओं को लेकर दृष्टिकोण
- क्या भाई-बहन का रिश्ता इस्लाम में महत्वपूर्ण है?
- राखी पहनना और रक्षाबंधन मनाना — क्या फर्क है?
- 2026 में चंद्र ग्रहण का असर
- क्या अन्य धर्मों के लोग रक्षाबंधन मना सकते हैं?
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
रक्षाबंधन 2026 कब मनाया जाएगा?
साल 2026 में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी। चूंकि भद्रा 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाती है, इसलिए राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक रहेगा।
क्या मुसलमान राखी बांध सकते हैं?
इस सवाल का जवाब इस्लामी धार्मिक दृष्टिकोण से समझना ज़रूरी है। इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती सलाउद्दीन कासमी के अनुसार, इस्लाम में राखी बांधने का कोई आधार कुरान-हदीस में नहीं मिलता। उनकी राय में राखी हिंदू धार्मिक परंपरा का हिस्सा है और मुस्लिम व्यक्ति के लिए इसे धार्मिक रस्म के तौर पर अपनाना जायज़ नहीं माना गया है।
हालांकि, अलग-अलग मुस्लिम विद्वानों और समुदायों में सांस्कृतिक एवं पारिवारिक संदर्भ को लेकर राय अलग हो सकती है। इसलिए इसे पूरे मुस्लिम समुदाय पर लागू होने वाला एकमात्र नियम नहीं माना जाना चाहिए — यह एक विद्वान की व्याख्या है, सर्वसम्मत फतवा नहीं।
इस्लाम में गैर-इस्लामी धार्मिक परंपराओं को लेकर क्या दृष्टिकोण है?
इस्लामी व्याख्याओं में अपने धार्मिक त्योहारों और रस्मों की विशिष्ट पहचान बनाए रखने पर ज़ोर दिया जाता है। इसे ‘तशब्बुह’ की अवधारणा से जोड़ा जाता है, जिसका अर्थ है किसी दूसरे धार्मिक समुदाय की विशिष्ट परंपराओं की नकल या अनुकरण। इसी आधार पर कुछ इस्लामी विद्वान गैर-इस्लामी धार्मिक त्योहारों की रस्मों में भाग लेने को उचित नहीं मानते।
क्या भाई-बहन का रिश्ता इस्लाम में महत्वपूर्ण है?
राखी की धार्मिक रस्म और भाई-बहन के रिश्ते को अलग-अलग समझना ज़रूरी है। इस्लाम में परिवार, रिश्तेदारी और भाई-बहनों के साथ अच्छे व्यवहार को महत्व दिया जाता है। विवाद मुख्य रूप से राखी को एक धार्मिक रस्म के रूप में अपनाने से जुड़ा है — भाई-बहन के बीच प्रेम और सम्मान अपने आप में अलग विषय है।
क्या राखी पहनना और रक्षाबंधन मनाना एक ही बात है?
दोनों को पूरी तरह एक जैसा समझना ज़रूरी नहीं है। रक्षाबंधन मूल रूप से एक हिंदू धार्मिक-सांस्कृतिक पर्व है, जिसमें राखी बांधने की विशेष रस्म होती है। वहीं किसी की कलाई पर कोई साधारण धागा या ब्रेसलेट होना अपने आप में रक्षाबंधन की धार्मिक रस्म नहीं माना जा सकता। इसलिए धार्मिक और सांस्कृतिक पहलू अलग-अलग समझना ज़रूरी है।
2026 में रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का क्या असर है?
रक्षाबंधन 2026 के दिन साल का दूसरा और अंतिम आंशिक चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। यह ग्रहण भारत में दिन के समय (सुबह लगभग 6:53 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक) होगा, जब चांद क्षितिज के नीचे रहेगा — इसलिए यह भारत में दिखाई नहीं देगा। चूंकि ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है, इसलिए पारंपरिक नियम के अनुसार इसका सूतक भी यहां मान्य नहीं होगा, और राखी बांधने के मुहूर्त पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्या दूसरे धर्मों के लोग रक्षाबंधन मना सकते हैं?
रक्षाबंधन का सामाजिक और सांस्कृतिक रूप कई जगह धार्मिक सीमाओं से बाहर भी दिखाई देता है। भारत में अलग-अलग समुदायों के लोग भाई-बहन जैसे रिश्तों और सामाजिक सद्भाव के प्रतीक के रूप में इस पर्व से जुड़ते रहे हैं। कुछ मुस्लिम परिवारों में भी सांस्कृतिक या पारिवारिक संदर्भ में राखी से जुड़े उदाहरण मिलते हैं। लेकिन यदि सवाल इस्लामी धार्मिक नियम के नज़रिए से पूछा जाए, तो संबंधित विद्वान की व्याख्या और व्यक्ति की निजी आस्था को ध्यान में रखना ज़रूरी है।
निष्कर्ष
रक्षाबंधन 2026 में 28 अगस्त को मनाया जाएगा। मुफ्ती सलाउद्दीन कासमी जैसे इस्लामिक विद्वानों की राय में राखी बांधने की धार्मिक अनुमति नहीं है, क्योंकि यह हिंदू धार्मिक परंपरा से जुड़ी रस्म है। वहीं, भाई-बहन के बीच प्रेम, सम्मान और पारिवारिक संबंध अपने आप में अलग विषय हैं। इसलिए इस मुद्दे को समझते समय धार्मिक नियम, व्यक्तिगत आस्था और सांस्कृतिक परंपरा — इन तीनों के बीच अंतर करना ज़रूरी है।
व्यावहारिक बातें:
- यह एक विद्वान की धार्मिक राय है, सामूहिक फतवा नहीं — व्यक्तिगत निर्णय के लिए अपने नज़दीकी विद्वान से सलाह लें
- धार्मिक रस्म और सांस्कृतिक सौहार्द को अलग रखकर देखें — भाई-बहन का स्नेह किसी धर्म-सीमा में बंधा नहीं है
- 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण की चिंता किए बिना राखी बांधी जा सकती है — भारत में इसका कोई सूतक प्रभाव नहीं
यह जानकारी विभिन्न धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी व्यक्तिगत धार्मिक निर्णय के लिए संबंधित धर्म के योग्य विद्वान से सलाह लेना बेहतर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
रक्षाबंधन 2026 कब मनाया जाएगा और राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है?
28 अगस्त 2026, शुक्रवार को। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी। भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाने के कारण राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक रहेगा।
क्या इस्लाम में मुसलमान के लिए राखी बांधना जायज़ है?
इस्लामी विद्वान मुफ्ती सलाउद्दीन कासमी के अनुसार, राखी बांधने का कोई आधार कुरान-हदीस में नहीं मिलता और इसे हिंदू धार्मिक परंपरा मानते हुए मुसलमान के लिए धार्मिक रस्म के तौर पर अपनाना जायज़ नहीं माना गया है। हालांकि अलग-अलग विद्वानों और परिवारों में सांस्कृतिक संदर्भ पर राय भिन्न हो सकती है।
रक्षाबंधन के दिन 2026 में चंद्र ग्रहण को लेकर क्या स्थिति है?
28 अगस्त 2026 को आंशिक चंद्र ग्रहण पड़ रहा है, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा क्योंकि उस समय भारत में दिन रहेगा और चांद क्षितिज के नीचे होगा। इसलिए भारत में इसका धार्मिक सूतक मान्य नहीं होगा और राखी बांधने के मुहूर्त पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
राखी बांधना और रक्षाबंधन मनाना, क्या दोनों एक ही बात है?
नहीं। रक्षाबंधन मूल रूप से एक हिंदू धार्मिक-सांस्कृतिक पर्व है जिसमें राखी बांधने की विशिष्ट रस्म शामिल है। किसी की कलाई पर धागा या ब्रेसलेट होना अपने आप में इस धार्मिक रस्म को नहीं दर्शाता, इसलिए धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं को अलग-अलग समझना ज़रूरी है।
क्या इस्लाम में भाई-बहन के रिश्ते को महत्व नहीं दिया जाता?
भाई-बहन के बीच प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी को इस्लाम में महत्व दिया जाता है — यह विवाद का विषय नहीं है। विवाद मुख्य रूप से राखी को एक धार्मिक रस्म के रूप में अपनाने से जुड़ा है, न कि भाई-बहन के रिश्ते के महत्व से।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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