RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान जी का रहस्य: आखिर हर साल गंगा क्यों करती हैं बजरंगबली का जलाभिषेक?

प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान जी का रहस्य: आखिर हर साल गंगा क्यों करती हैं बजरंगबली का जलाभिषेक?

प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान जी का रहस्य: आखिर हर साल गंगा क्यों करती हैं बजरंगबली का जलाभिषेक?
Visual Archive

प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान जी का रहस्य: आखिर हर साल गंगा क्यों करती हैं बजरंगबली का जलाभिषेक?

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के निकट स्थित बड़े हनुमान मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और अनोखे हनुमान मंदिरों में गिना जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा शयन मुद्रा (लेटे हुए स्वरूप) में विराजमान है। धार्मिक मान्यता है कि वर्षा ऋतु में जब गंगा का जलस्तर बढ़ता है, तो मां गंगा स्वयं मंदिर में प्रवेश कर बजरंगबली का जलाभिषेक करती हैं। यही परंपरा इस मंदिर को अन्य हनुमान मंदिरों से अलग पहचान दिलाती है।

लेटे हुए हनुमान जी की अनोखी प्रतिमा

प्रयागराज के किले और संगम के समीप स्थित यह मंदिर सदियों पुराना माना जाता है। यहां स्थापित लगभग 20 फीट लंबी दक्षिणमुखी प्रतिमा भूमि स्तर से नीचे स्थित है। श्रद्धालु इसे “बड़े हनुमान”, “लेटे हनुमान” और “बंधवा वाले हनुमान” के नाम से जानते हैं। स्थानीय मान्यता है कि संगम स्नान के बाद इस मंदिर के दर्शन करने से तीर्थ यात्रा पूर्ण मानी जाती है।

मंदिर की स्थापना से जुड़ी मान्यता

लोककथाओं के अनुसार, एक राजा (कुछ परंपराओं में एक धनी व्यापारी) ने भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा बनवाकर उसे स्थापित करने का संकल्प लिया। प्रतिमा को नाव के माध्यम से लाया जा रहा था, लेकिन संगम के पास नाव डूब गई और प्रतिमा वहीं रह गई। बाद में एक संत को यह प्रतिमा मिली और उसी स्थान पर मंदिर की स्थापना की गई। यह कथा धार्मिक परंपरा का हिस्सा है और इसके विभिन्न स्थानीय संस्करण प्रचलित हैं।

अकबर और हनुमान जी की कथा

मंदिर से जुड़ी एक प्रसिद्ध लोकमान्यता यह भी है कि मुगल सम्राट अकबर ने प्रतिमा को हटवाने का प्रयास किया था। कहा जाता है कि जैसे-जैसे प्रतिमा को निकालने के लिए खुदाई की गई, वह और गहराई में जाती गई। अंततः प्रयास रोक दिए गए और प्रतिमा को उसी स्थान पर रहने दिया गया। इस कथा का स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह स्थानीय आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हर वर्ष गंगा क्यों करती हैं जलाभिषेक?

इस मंदिर की सबसे अनूठी परंपरा यह है कि मानसून के दौरान गंगा का बढ़ता जल मंदिर में प्रवेश कर लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा को स्पर्श करता है। श्रद्धालु इसे मां गंगा द्वारा स्वयं भगवान हनुमान का जलाभिषेक मानते हैं। स्थानीय परंपरा में इसे अत्यंत शुभ माना जाता है और इस दौरान भी मंदिर में पूजा-अर्चना जारी रहती है। प्राकृतिक रूप से यह घटना नदी के जलस्तर बढ़ने के कारण होती है, जबकि धार्मिक दृष्टि से इसे दिव्य आशीर्वाद माना जाता है।

मंदिर का धार्मिक महत्व

बड़े हनुमान मंदिर में दर्शन के लिए पूरे वर्ष श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, लेकिन हनुमान जयंती, बड़े मंगल, सावन और कुंभ मेले के दौरान यहां विशेष आयोजन होते हैं। भक्त हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ कर संकटमोचन से सुख, साहस और रक्षा का आशीर्वाद मांगते हैं।

श्रद्धालुओं के लिए संदेश

लेटे हुए हनुमान जी का यह स्वरूप भक्तों को विनम्रता, सेवा और समर्पण का संदेश देता है। यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि प्रयागराज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है।

निष्कर्ष

प्रयागराज का लेटे हुए हनुमान जी मंदिर अपनी अनोखी प्रतिमा, गंगा जलाभिषेक की परंपरा और सदियों पुरानी लोकमान्यताओं के कारण देश के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। चाहे इसे आस्था की दृष्टि से देखा जाए या सांस्कृतिक विरासत के रूप में, यह मंदिर आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की श्रद्धा और विश्वास का केंद्र बना हुआ है।

Religion World

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

July 10, 2026 3 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

Onam 2026: 26 अगस्त को मनाया जाएगा थिरुवोनम, जानें क्यों राजा महाबली के स्वागत में सजते हैं केरल के घर?

प्रकाशित: 24 अगस्त 2026  |  अंतिम अपडेट: 24 अगस्त 2026 ओणम 2026 का सबसे महत्वपूर्ण दिन थिरुवोनम इस साल 26 अगस्त, बुधवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के…

Read now
Hinduism

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने के बाद कब उतारें? जानिए सही समय और राखी उतारने का धार्मिक तरीका

रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते का पर्व है। रक्षाबंधन 2026 में 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा, और राखी बांधने के बाद सबसे ज्यादा…

Read now
Hinduism

पुत्रदा एकादशी 2026: चावल से लेकर तुलसी तोड़ने तक, इन कामों से रहें दूर, जानें व्रत का महत्व

पुत्रदा एकादशी 2026: चावल से लेकर तुलसी तोड़ने तक, इन 7 कामों से रहें दूर हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की उपासना के लिए विशेष…

Read now