जानिए भारत में हर साल कहाँ लगता है खिचड़ी मेला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ल्ड फूड इंडिया फेस्टिवल का उद्घाटन किया. इस आयोजन के पहले दिन सब का ध्यान खिचड़ी पर रहा. अलग अलग देशों के प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने भारत के स्वाद के बारे में बात की साथ ही भारतीय मसालों और व्यंजनों की भी खूब तारीफ की.
भारतीय परिवारों में खिचड़ी महज एक प्रकार का भोजन नहीं है, वरन यह एक पारंपरिक पकवान है. खिचड़ी को भारत के त्यौहारों का मान समझा जाता है. ऐसे कई त्यौहार आते हैं, जिसके दौरान खिचड़ी बनाया जाना अनिवार्य है. यह उन उत्सवों का एक अहम हिस्सा है.
खिचड़ी मेला
लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के एक कोने में साल में एक बार ‘खिचड़ी मेला’ भी लगता है? जी हां… यह मेला खिचड़ी के इतिहास से जुड़ा है. सबसे पहले खिचड़ी कब बनाई गई, किसने बनाई, क्यों बनाई और कैसे ये भारतीय पकवानों का अहम हिस्सा बनी, इसको दर्शाता है ये खिचड़ी मेला.
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मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी
इतिहास के पन्नों को खोलें तो मालूम होता है कि खिचड़ी कोई सामान्य पकवान नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति को बखूबी दर्शाती है. यह खिचड़ी धर्म और संस्कृति का उदाहरण देती है. लोक मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने की परंपरा का आरंभ भगवान शिव ने किया था.
खिचड़ी पर्व
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से मकर संक्रांति के मौके पर खिचड़ी बनाने की परंपरा का आरंभ हुआ था. यहां मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है. मान्यता है कि बाबा गोरखनाथ जी भगवान शिव का ही रूप थे. उन्होंने ही खिचड़ी को भोजन के रूप में बनाना आरंभ किया.
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पौराणिक कहानी
पौराणिक कहानी के अनुसार खिलजी ने जब आक्रमण किया तो उस समय नाथ योगी उनका डट कर मुकाबला कर रहे थे. उनसे जूझते-जूझते वह इतना थक जाते कि उन्हें भोजन पकाने का समय ही नहीं मिल पाता था. जिससे उन्हें भूखे रहना पड़ता और वह दिन-ब-दिन कमजोर होते जा रहे थे. यह समस्या इतनी बढ़ गई थी कि अब वक्त आ गया था कि जल्द से जल्द कोई समाधान हासिल हो. एक दिन अपने योगियों की कमजोरी को दूर करने लिए बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और सब्जी को एकत्र कर पकाने को कहा. देखते ही देखते एक ऐसा व्यंजन तैयार हुआ जो झट से पक भी गया और खाने में स्वादिष्ट भी था. इतना ही नहीं, इसे खाने से नाथ योगी अपने भीतर ऊर्जा को महसूस कर पा रहे थे.
अपने इस सफल प्रयोग को देखते हुए बाबा गोरखनाथ ने इस व्यंजन का नाम ‘खिचड़ी’ रखा. आज भी गोरखपुर में बाबा गोरखनाथ के मंदिर के समीप मकर संक्रांति के दिन से खिचड़ी मेला शुरू होता है.
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खिचड़ी का भोग लगता है
बाबा गोरखनाथ का यह खिचड़ी मेला बहुत दिनों तक चलता है और इस मेले में बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी का भोग अर्पित किया जाता है और भक्तों को प्रसाद रूप में दिया जाता है.
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