प्रकाशित: 25 अगस्त 2026 | अंतिम अपडेट: 25 अगस्त 2026
ईद-ए-मिलाद 2026 भारत में 26 अगस्त, बुधवार को मनाया जाएगा — यह इस्लामी कैलेंडर के रबी-उल-अव्वल महीने की 12वीं तारीख से जुड़ा पर्व है, जिसे मिलाद-उन-नबी, ईद मिलाद-उन-नबी या मौलिद भी कहा जाता है। इस दिन मुस्लिम समुदाय पैगंबर हजरत मुहम्मद के जन्म, उनके जीवन और शिक्षाओं को याद करता है। इस लेख में जानिए सही तारीख, पैगंबर मोहम्मद के जन्म से जुड़ा इतिहास, और यह भी कि आखिर सभी मुस्लिम समुदाय इसे एक जैसे तरीके से क्यों नहीं मनाते।
मुख्य बातें (Quick Facts):
- ईद-ए-मिलाद 2026: बुधवार, 26 अगस्त (कुछ कैलेंडर 25 अगस्त भी दिखाते हैं)
- इस्लामी तारीख: 12 रबी-उल-अव्वल, 1448 हिजरी
- पैगंबर मोहम्मद का जन्म लगभग 570 ईस्वी में मक्का में हुआ माना जाता है
- सार्वजनिक मौलिद समारोहों को प्रमुखता फातिमी शासनकाल के मिस्र में मिली
- सभी मुस्लिम समुदाय इसे एक जैसे तरीके से नहीं मनाते — यह कोई सार्वभौमिक धार्मिक अनिवार्यता नहीं है
Eid Milad-un-Nabi 2026 कब है?
भारत में उपलब्ध आधिकारिक कैलेंडर और धार्मिक कैलेंडर गणना के अनुसार ईद-ए-मिलाद 26 अगस्त 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। इस साल रबी-उल-अव्वल महीने की पहली तारीख 15 अगस्त को थी, इसी हिसाब से 12वीं तारीख 26 अगस्त को पड़ रही है।हालांकि इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित है, इसलिए कुछ क्षेत्रों और कुछ कैलेंडरों में स्थानीय चांद दिखाई देने के आधार पर तारीख 25 अगस्त भी बताई गई है। धार्मिक आयोजन स्थानीय परंपरा और चांद देखने की प्रक्रिया के अनुसार किए जाते हैं, इसलिए अंतिम पुष्टि के लिए स्थानीय धार्मिक संस्था की घोषणा देखना बेहतर रहेगा।
क्या है ईद-ए-मिलाद?
ईद-ए-मिलाद का अर्थ पैगंबर के जन्म की स्मृति से जुड़ा है। अरबी शब्द ‘मौलिद’ का संबंध जन्म से है। मुस्लिम समुदाय के लिए पैगंबर मोहम्मद इस्लाम के अंतिम पैगंबर और ईश्वर के संदेशवाहक माने जाते हैं, इसलिए उनके जन्म और जीवन को याद करना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पैगंबर मोहम्मद के जीवन, चरित्र और उनके बताए आदर्शों पर चर्चा की जाती है।
पैगंबर मोहम्मद का जन्म कब और कहां हुआ था?
पारंपरिक इस्लामी विवरणों के अनुसार पैगंबर मोहम्मद का जन्म लगभग 570 ईस्वी में मक्का में हुआ था। इस्लामी परंपरा में उनके जन्म को मानवता के लिए महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। उनकी शिक्षाओं में दया, क्षमा, इंसानियत, न्याय और जरूरतमंदों की सहायता जैसे मूल्यों पर जोर दिया जाता है, जिनका उल्लेख हदीस और अन्य धार्मिक स्रोतों में मिलता है।
ईद-ए-मिलाद का इतिहास क्या है?
ईद-ए-मिलाद मनाने की परंपरा इस्लाम के शुरुआती दौर के बाद धीरे-धीरे विकसित हुई। ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, सार्वजनिक रूप से मौलिद समारोहों को प्रमुखता फातिमी शासनकाल के मिस्र में मिली, और बाद में यह परंपरा पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में फैलती गई। समय के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में इसे मनाने के तरीके भी अलग हुए — कहीं धार्मिक सभाएं होती हैं तो कहीं जुलूस, नात और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
ईद-ए-मिलाद पर क्या किया जाता है?
अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। कई जगहों पर:
- मस्जिदों और घरों को रोशनी से सजाया जाता है
- धार्मिक सभाओं और कार्यक्रमों का आयोजन होता है
- पैगंबर मोहम्मद के जीवन पर तकरीर और चर्चा की जाती है
- नात और धार्मिक कविताएं पढ़ी जाती हैं
- कुछ क्षेत्रों में जुलूस निकाले जाते हैं — भारत के कई हिस्सों में यह परंपरा खासतौर पर देखने को मिलती है
- जरूरतमंद लोगों को भोजन और अन्य सामान वितरित किया जाता है
हालांकि हर जगह एक जैसी परंपरा नहीं होती। कुछ समुदाय इस दिन को शांतिपूर्ण धार्मिक सभाओं, प्रार्थना और धार्मिक अध्ययन के माध्यम से मनाते हैं, जुलूस या सार्वजनिक उत्सव के बिना।
क्या सभी मुस्लिम समुदाय ईद मिलाद मनाते हैं?
ईद-ए-मिलाद को लेकर मुस्लिम समुदायों में एक जैसी धार्मिक परंपरा नहीं है। दुनिया के कई हिस्सों में इसे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है, जबकि कुछ मुस्लिम विद्वान और समुदाय मौलिद के सार्वजनिक आयोजन को धार्मिक रूप से नई प्रथा (बिदअत) मानते हैं और इसका आयोजन नहीं करते। यह मतभेद पैगंबर के प्रति सम्मान की कमी से नहीं, बल्कि इस बात से जुड़ा है कि धार्मिक रूप से नई परंपरा शुरू करना उचित है या नहीं। इसलिए किसी एक परंपरा को पूरे मुस्लिम समुदाय पर लागू करना उचित नहीं होगा।
ईद-ए-मिलाद का संदेश:
पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं से जुड़े जिन मूल्यों पर अक्सर जोर दिया जाता है, उनमें दया, क्षमा, न्याय, आत्मसंयम, जरूरतमंदों की सहायता और भाईचारा प्रमुख हैं। इसलिए इस दिन कई लोग केवल उत्सव मनाने के बजाय अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाने का संकल्प भी लेते हैं।
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यह जानकारी उपलब्ध धार्मिक कैलेंडर और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। तारीख स्थानीय चांद दिखने की पुष्टि के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
ईद-ए-मिलाद 2026 कब है?
भारत में ईद-ए-मिलाद 26 अगस्त 2026, बुधवार को मनाया जाएगा, जो इस्लामी कैलेंडर की 12 रबी-उल-अव्वल तारीख है। कुछ कैलेंडरों में चांद दिखने के आधार पर यह 25 अगस्त भी बताई गई है।
पैगंबर मोहम्मद का जन्म कहां हुआ था?
पारंपरिक इस्लामी विवरणों के अनुसार पैगंबर मोहम्मद का जन्म लगभग 570 ईस्वी में मक्का में हुआ था।
क्या सभी मुस्लिम ईद-ए-मिलाद मनाते हैं?
नहीं। कुछ मुस्लिम विद्वान और समुदाय मौलिद के सार्वजनिक आयोजन को धार्मिक रूप से नई प्रथा (बिदअत) मानते हुए इसे नहीं मनाते, जबकि कई अन्य समुदायों में यह उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह मतभेद पैगंबर के प्रति सम्मान से नहीं, बल्कि धार्मिक तरीके को लेकर है।
ईद-ए-मिलाद की शुरुआत कहां से मानी जाती है?
ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, सार्वजनिक रूप से मौलिद समारोहों को प्रमुखता फातिमी शासनकाल के मिस्र में मिली, जहां से यह परंपरा बाद में पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया में फैली।
ईद-ए-मिलाद पर क्या किया जाता है?
धार्मिक सभाएं, नात पाठ, तकरीर, मस्जिदों और घरों की सजावट, कुछ क्षेत्रों में जुलूस, और जरूरतमंदों को भोजन व सामान का वितरण — ये सभी परंपराएं क्षेत्र और समुदाय के अनुसार अलग-अलग रूप में देखने को मिलती हैं।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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