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Onam 2026: 26 अगस्त को मनाया जाएगा थिरुवोनम, जानें क्यों राजा महाबली के स्वागत में सजते हैं केरल के घर?

Onam 2026: 26 अगस्त को मनाया जाएगा थिरुवोनम, जानें क्यों राजा महाबली के स्वागत में सजते हैं केरल के घर?

Onam 2026: 26 अगस्त को मनाया जाएगा थिरुवोनम, जानें क्यों राजा महाबली के स्वागत में सजते हैं केरल के घर?
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Onam 2026: 26 अगस्त को मनाया जाएगा थिरुवोनम, जानें क्यों राजा महाबली के स्वागत में सजते हैं केरल के घर?

प्रकाशित: 24 अगस्त 2026  |  अंतिम अपडेट: 24 अगस्त 2026

ओणम 2026 का सबसे महत्वपूर्ण दिन थिरुवोनम इस साल 26 अगस्त, बुधवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने के लिए पाताल लोक से धरती पर आते हैं — यही वजह है कि केरल के घर फूलों से सजाए जाते हैं। इस लेख में आप ओणम 2026 की सही तारीख और केरल की छुट्टियों के साथ-साथ राजा महाबली और भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूरी पौराणिक कथा भी जानेंगे — कि आखिर एक असुर राजा को केरल में आज भी इतने प्रेम से क्यों याद किया जाता है।

मुख्य बातें (Quick Facts):

  • थिरुवोनम 2026: 26 अगस्त, बुधवार
  • 10 दिवसीय उत्सव की शुरुआत: Atham, 17 अगस्त (कुछ पंचांगों में 16 अगस्त)
  • केरल में सरकारी छुट्टियां: 25 से 28 अगस्त 2026 (First से Fourth Onam)
  • ओणम राजा महाबली के धरती पर आगमन और भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा से जुड़ा है
  • ओणम केवल धार्मिक नहीं, केरल का आधिकारिक सांस्कृतिक और फसल उत्सव भी है

Onam 2026 कब मनाया जाएगा?

साल 2026 में ओणम का सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम दिन थिरुवोनम 26 अगस्त, बुधवार को मनाया जाएगा। ओणम मलयालम सौर कैलेंडर के चिंगम महीने में मनाया जाता है, इसलिए हर साल इसकी तारीख नक्षत्रों की गणना के अनुसार बदलती है। केरल सरकार ने इस साल 25 से 28 अगस्त तक आधिकारिक ओणम अवकाश घोषित किया है।

10 दिवसीय उत्सव की शुरुआत ज्यादातर पंचांगों के अनुसार 17 अगस्त (Atham) से मानी जाती है, हालांकि कुछ पंचांग नक्षत्र की गणना के आधार पर इसे 16 अगस्त से भी दिखाते हैं। दोनों ही स्थिति में थिरुवोनम की तारीख 26 अगस्त पर एकमत है।

10 दिनों का पूरा कैलेंडर

दिन नक्षत्र 2026 तारीख
1 Atham 17 अगस्त, सोमवार
2 Chithira 18 अगस्त, मंगलवार
3 Chodhi 19 अगस्त, बुधवार
4 Vishakam 20 अगस्त, गुरुवार
5 Anizham 21 अगस्त, शुक्रवार
6 Thriketta 22 अगस्त, शनिवार
7 Moolam 23 अगस्त, रविवार
8 Pooradam 24 अगस्त, सोमवार
9 Uthradam (First Onam) 25 अगस्त, मंगलवार
10 Thiruvonam 26 अगस्त, बुधवार

हर दिन की रस्म और गहराई से जानकारी के लिए पढ़ें: ओणम के 10 दिनों का महत्व — पूरी गाइड

कौन थे राजा महाबली?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा महाबली एक शक्तिशाली असुर राजा थे। हालांकि उनका जन्म असुर वंश में हुआ था, लेकिन वे अपनी प्रजा के बीच बेहद लोकप्रिय थे। उन्हें एक दयालु, न्यायप्रिय और बेहद दानवीर राजा के रूप में याद किया जाता है। कहा जाता है कि उनके शासन में प्रजा खुशहाल थी और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता था।

महाबली की लोकप्रियता और शक्ति इतनी बढ़ गई थी कि उनका प्रभाव तीनों लोकों तक फैलने लगा। इससे देवताओं को चिंता होने लगी, और इसके बाद भगवान विष्णु ने महाबली की परीक्षा लेने का निर्णय लिया।

भगवान विष्णु ने क्यों लिया वामन अवतार?

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और एक छोटे कद के ब्राह्मण बालक के रूप में राजा महाबली के यज्ञ में पहुंचे। राजा महाबली अपनी दानशीलता के लिए प्रसिद्ध थे, इसलिए उन्होंने वामन देव से पूछा कि उन्हें क्या चाहिए। वामन देव ने केवल तीन पग भूमि मांगी, और महाबली ने बिना किसी संकोच के उनकी मांग स्वीकार कर ली।

जैसे ही राजा महाबली ने वचन दिया, भगवान विष्णु ने विराट रूप धारण कर लिया। पहले पग में उन्होंने पूरी पृथ्वी नाप ली, दूसरे पग में आकाश को नाप लिया। तीसरे पग के लिए कोई स्थान नहीं बचा, तो महाबली ने अपनी वचनबद्धता निभाते हुए अपना सिर आगे कर दिया और कहा कि तीसरा पग उनके सिर पर रखा जाए।

महाबली को क्यों जाना पड़ा पाताल लोक?

भगवान विष्णु ने अपने तीसरे पग से महाबली को पाताल लोक भेज दिया। लेकिन वे महाबली की भक्ति, दानशीलता और प्रजा के प्रति उनके प्रेम से प्रसन्न थे, इसलिए उन्होंने महाबली को एक विशेष वरदान दिया — वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने के लिए धरती पर आने की अनुमति। इसी विश्वास के कारण केरल में ओणम के दौरान लोग अपने प्रिय राजा के स्वागत की तैयारी करते हैं, और यही वजह है कि ओणम में महाबली को किसी पराजित राजा के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रिय और न्यायप्रिय शासक के रूप में याद किया जाता है।

पुक्कलम और ओणम साध्या का महत्व

ओणम के दौरान घरों के बाहर अलग-अलग रंगों के फूलों से बनाई जाने वाली सजावट को पुक्कलम कहा जाता है। यह महाबली के स्वागत और घर में खुशहाली के प्रतीक के रूप में देखी जाती है, और Atham से शुरू होकर थिरुवोनम तक इसका आकार धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।

ओणम साध्या केले के पत्ते पर परोसा जाने वाला पारंपरिक शाकाहारी भोज है, जिसमें 24 से 28 तक विभिन्न व्यंजन शामिल हो सकते हैं — सब्जियां, दाल, चावल, अचार और पायसम। परिवार एक साथ बैठकर इसका आनंद लेते हैं, जो ओणम की सामूहिकता और खुशहाली की भावना को दर्शाता है।

ओणम से क्या संदेश मिलता है?

महाबली को उनकी शक्ति से ज्यादा उनकी दानशीलता, वचन निभाने और प्रजा के प्रति प्रेम के लिए याद किया जाता है। वामन अवतार की कथा यह सिखाती है कि अहंकार चाहे कितना भी बड़ा हो, अंत में विनम्रता और धर्म का महत्व सबसे ऊपर रहता है — और समाज में खुशहाली तभी आती है जब लोग प्रेम, सहयोग और समानता की भावना से रहें।

यह जानकारी पौराणिक मान्यताओं और उपलब्ध पंचांग स्रोतों पर आधारित है। तिथियां पंचांग-भेद के अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

ओणम 2026 में थिरुवोनम कब है?

थिरुवोनम 2026 में 26 अगस्त, बुधवार को मनाया जाएगा। केरल में इस अवसर पर 25 से 28 अगस्त तक सरकारी छुट्टी रहेगी।

राजा महाबली को ओणम में क्यों याद किया जाता है?

राजा महाबली एक दयालु और न्यायप्रिय असुर राजा थे। भगवान विष्णु के वामन अवतार से पराजित होने के बावजूद उनकी भक्ति और दानशीलता से प्रसन्न होकर उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने का वरदान मिला। इसी आगमन के स्वागत में ओणम मनाया जाता है।

वामन अवतार की कथा में तीन पग भूमि का क्या अर्थ है?

भगवान विष्णु ने वामन अवतार में महाबली से केवल तीन पग भूमि मांगी। पहले पग में पृथ्वी और दूसरे में आकाश नाप लिया गया, और तीसरे पग के लिए महाबली ने स्वयं अपना सिर आगे कर दिया, जो उनकी वचनबद्धता और समर्पण का प्रतीक है।

क्या ओणम की तारीख हर साल बदलती है?

हां। ओणम मलयालम सौर कैलेंडर के चिंगम महीने में थिरुवोनम नक्षत्र के अनुसार तय होता है, इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर में इसकी तारीख हर साल अगस्त-सितंबर के बीच बदलती रहती है।

पुक्कलम क्या है और यह क्यों बनाया जाता है?

पुक्कलम ओणम के दौरान घर के प्रवेश द्वार पर फूलों से बनाई जाने वाली सजावट है, जो राजा महाबली के स्वागत का प्रतीक मानी जाती है। यह Atham के दिन एक छोटे घेरे से शुरू होकर थिरुवोनम तक धीरे-धीरे बड़ी होती जाती है।

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Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

Reviewed by Bhavya Srivasava on August 24, 2026.

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August 20, 2026 6 min read
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