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रथ यात्रा में मां लक्ष्मी क्यों हो जाती हैं नाराज़? जानिए भगवान जगन्नाथ और हेरा पंचमी की अनोखी परंपरा

रथ यात्रा में मां लक्ष्मी क्यों हो जाती हैं नाराज़? जानिए भगवान जगन्नाथ और हेरा पंचमी की अनोखी परंपरा

रथ यात्रा में मां लक्ष्मी क्यों हो जाती हैं नाराज़? जानिए भगवान जगन्नाथ और हेरा पंचमी की अनोखी परंपरा
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रथ यात्रा में मां लक्ष्मी क्यों हो जाती हैं नाराज़? जानिए भगवान जगन्नाथ और हेरा पंचमी की अनोखी परंपरा

पुरी की विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा केवल भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य यात्रा तक सीमित नहीं है। इस उत्सव से कई ऐसी धार्मिक परंपराएं जुड़ी हैं, जो सदियों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करती आ रही हैं। इनमें सबसे रोचक परंपरा है मां लक्ष्मी का भगवान जगन्नाथ से नाराज़ होना, जिसे हेरा पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यह उत्सव रथ यात्रा के पांचवें दिन आयोजित होता है और जगन्नाथ संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

क्यों नाराज़ होती हैं मां लक्ष्मी?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ श्रीमंदिर से निकलकर गुंडिचा मंदिर चले जाते हैं। इस यात्रा में उनकी पत्नी मां लक्ष्मी साथ नहीं जातीं।

जब कई दिन बीत जाते हैं और भगवान जगन्नाथ वापस नहीं लौटते, तब मां लक्ष्मी स्वयं उन्हें बुलाने के लिए गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं। इस प्रसंग को प्रेम, मान-मनुहार और दांपत्य संबंधों के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

क्या है हेरा पंचमी?

रथ यात्रा के पांचवें दिन मनाए जाने वाले हेरा पंचमी उत्सव में मां लक्ष्मी को विशेष पालकी में गुंडिचा मंदिर ले जाया जाता है। वहां वे भगवान जगन्नाथ से शीघ्र श्रीमंदिर लौटने का आग्रह करती हैं।

धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ उन्हें सहमति के प्रतीक के रूप में एक पुष्पमाला (आज्ञामाला) अर्पित करते हैं। इसके बाद मां लक्ष्मी वापस लौट जाती हैं।

रथ का एक हिस्सा क्यों तोड़ा जाता है?

हेरा पंचमी की सबसे प्रसिद्ध रस्मों में से एक यह है कि मां लक्ष्मी के सेवक भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ के एक छोटे हिस्से को प्रतीकात्मक रूप से क्षतिग्रस्त करते हैं। इसे देवी के नाराज़ होने का प्रतीक माना जाता है।

इसके बाद मां लक्ष्मी मुख्य मार्ग से नहीं, बल्कि एक अलग मार्ग जिसे हेरा गोहिरि लेन कहा जाता है, से श्रीमंदिर लौटती हैं। यह परंपरा सदियों से निभाई जा रही है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसे देखने आते हैं।

इस परंपरा का आध्यात्मिक संदेश

जगन्नाथ संस्कृति में इस प्रसंग को केवल देवी के क्रोध के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि यह पारिवारिक प्रेम, संवाद, सम्मान और रिश्तों में संतुलन का संदेश भी देता है।

भगवान जगन्नाथ का मां लक्ष्मी को मनाना और उनका अंततः वापस लौटना इस बात का प्रतीक माना जाता है कि रिश्तों में प्रेम और सम्मान सबसे महत्वपूर्ण हैं।

रथ यात्रा का विशेष महत्व

पुरी की रथ यात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में गिनी जाती है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं और कुछ दिनों बाद बहुदा यात्रा के माध्यम से वापस श्रीमंदिर लौटते हैं। हेरा पंचमी इसी यात्रा का एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है।

निष्कर्ष

मां लक्ष्मी के नाराज़ होने की कथा पुरी की रथ यात्रा को और भी विशेष बनाती है। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में प्रेम, समर्पण और पारिवारिक संबंधों की सुंदर अभिव्यक्ति भी है। हेरा पंचमी का यह उत्सव हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ की अनूठी परंपराओं से जोड़ता है।

RW

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By Religion World July 14, 2026 3 min read
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