RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

कौन थी रानी पद्मावती…क्या था उनका इतिहास?

कौन थी रानी पद्मावती…क्या था उनका इतिहास?

कौन थी रानी पद्मावती…क्या था उनका इतिहास?
Visual Archive

कौन थी रानी पद्मावती…क्या था उनका इतिहास?

रानी पद्मिनी (जिन्हें पद्मावती भी कहा जाता है) चित्तौड़ के राजा रावल रतन सिंह की रानी मानी जाती हैं, जिन्होंने 1303 ई० में अलाउद्दीन खिलजी की घेराबंदी के बाद जौहर किया। लेकिन रानी पद्मिनी का इतिहास जितना प्रसिद्ध है, उतना ही विवादित भी है — क्योंकि उनका नाम किसी समकालीन (उस समय के) ऐतिहासिक दस्तावेज़ में नहीं मिलता। उनकी कहानी सबसे पहले जौहर के लगभग 237 साल बाद, 1540 ई० में मलिक मुहम्मद जायसी के महाकाव्य पद्मावत में सामने आई। इस लेख में हम दोनों पक्ष स्पष्ट रूप से बताएँगे — जो प्रमाणित इतिहास है और जो लोककथा (किंवदंती) है — साथ ही राघव चेतन, कांच में झलक, गोरा-बादल और जौहर की पूरी कथा, और अंत में यह कि आधुनिक इतिहासकार क्या कहते हैं।

मुख्य तथ्य एक नज़र में

  • घटना: चित्तौड़ की घेराबंदी और पहला जौहर
  • वर्ष: 1303 ई० (14वीं सदी) — किला 26 अगस्त 1303 को गिरा
  • आक्रमणकारी: दिल्ली सल्तनत का सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी
  • चित्तौड़ के शासक: गुहिल राजपूत राजा रावल रतन सिंह
  • कथा का स्रोत: जायसी कृत पद्मावत (1540 ई०) — घटना के लगभग 237 साल बाद
  • ऐतिहासिक स्थिति: घेराबंदी प्रमाणित है; रानी पद्मिनी का अस्तित्व अधिकांश इतिहासकार काल्पनिक मानते हैं

रानी पद्मिनी कौन थीं?

लोककथा के अनुसार रानी पद्मिनी सिंहल प्रांत (आज का श्रीलंका) के राजा गंधर्वसेन और रानी चंपावती की अत्यंत सुंदर पुत्री थीं। कहा जाता है कि बचपन में उनके पास “हीरामणि” नाम का एक बोलता तोता था, जो उनका सबसे प्रिय साथी था। यहीं से एक महत्वपूर्ण बात समझनी ज़रूरी है — ये सभी विवरण जायसी के काव्य से आते हैं, किसी इतिहास-ग्रंथ से नहीं। इसलिए इन्हें कथा के रूप में पढ़ना चाहिए, तथ्य के रूप में नहीं।

अपनी सुंदरता की चर्चा के कारण पद्मिनी का स्वयंवर आयोजित हुआ, जिसमें अनेक हिन्दू राजा और राजपूत आमंत्रित हुए। इसी स्वयंवर में चित्तौड़ के राजा रावल रतन सिंह ने मलखान सिंह को हराकर पद्मिनी से विवाह किया और उन्हें अपनी दूसरी पत्नी के रूप में चित्तौड़ ले आए (उनकी पहली पत्नी नागमती थीं)। प्राचीन काल में राजा वंश-विस्तार के लिए एक से अधिक विवाह करते थे, इसलिए यह असामान्य नहीं था।

राघव चेतन का अपमान और प्रतिशोध

कथा आगे बढ़ती है दरबारी संगीतकार राघव चेतन से। वह प्रतिभाशाली तो था, परन्तु गुप्त रूप से तंत्र-मंत्र का प्रयोग भी करता था। जब उसका यह कृत्य रंगे हाथों पकड़ा गया, तो रतन सिंह ने उसका मुँह काला करवाकर, गधे पर बैठाकर राज्य से निर्वासित कर दिया। इस अपमान से जलते हुए राघव चेतन दिल्ली पहुँचा।

वहाँ उसने एक जंगल में, जहाँ सुल्तान अक्सर शिकार करता था, अपनी बाँसुरी के मधुर स्वर से खिलजी का ध्यान खींचा। दरबार में पहुँचकर उसने चतुराई से रानी पद्मिनी की अलौकिक सुंदरता का ऐसा वर्णन किया कि खिलजी के मन में उन्हें पाने की इच्छा जाग उठी। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि “अपमानित दरबारी का शत्रु से मिल जाना” जायसी की कथा का एक साहित्यिक रूपक (allegory) है — जो राजपूतों की आपसी फूट और उससे उपजी कमज़ोरी को दर्शाता है।

कांच में एक झलक और रतन सिंह का बंदी बनना

कथा के अनुसार खिलजी चित्तौड़ पहुँचा, पर किला भारी सुरक्षा में था। पद्मिनी की एक झलक पाने के लिए उसने रतन सिंह को संदेश भेजा कि वह पद्मिनी को “बहन समान” मानता है और मिलना चाहता है। अपना राज्य बचाने के लिए रतन सिंह सहमत हो गए, और पद्मिनी कांच के प्रतिबिम्ब में अपना चेहरा दिखाने को तैयार हुईं। यही “आईने में झलक” वाला दृश्य कथा का सबसे प्रसिद्ध हिस्सा है।

पद्मिनी के रूप पर मोहित होकर, लौटते समय खिलजी ने छल से रतन सिंह को बंदी बना लिया और पद्मिनी की माँग करने लगा। इसके उत्तर में राजपूत सेनापति गोरा और बादल ने एक चाल रची।

गोरा और बादल की वीरता

अगली सुबह किले से 150 पालकियाँ खिलजी के शिविर की ओर भेजी गईं — यह संदेश देकर कि इनमें पद्मिनी आ रही हैं। पर पालकियों में रानी नहीं, बल्कि सशस्त्र राजपूत सैनिक छिपे थे। उन्होंने अचानक हमला कर रतन सिंह को छुड़ा लिया। इस मुठभेड़ में गोरा वीरगति को प्राप्त हुए, जबकि बादल रतन सिंह को सुरक्षित किले तक पहुँचाने में सफल रहे।

चित्तौड़ पर आक्रमण और जौहर

अपनी योजना विफल होने पर क्रोधित खिलजी ने चित्तौड़ पर पूर्ण आक्रमण कर दिया। लंबी घेराबंदी में किले की खाद्य आपूर्ति समाप्त होने लगी। अंततः रतन सिंह ने द्वार खोलकर युद्ध का निर्णय लिया और लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।

पुरुषों की पराजय निश्चित देखकर, सम्मान की रक्षा के लिए पद्मिनी और चित्तौड़ की स्त्रियों ने जौहर (सामूहिक आत्मदाह) का मार्ग चुना। एक विशाल चिता जलाई गई और सैकड़ों स्त्रियाँ उसमें कूद गईं। इसके बाद पुरुषों ने केसरिया वस्त्र धारण कर साका किया — अंतिम साँस तक शत्रु से युद्ध। जब खिलजी की सेना किले में घुसी, तो उसे केवल राख और जली हड्डियाँ मिलीं। इसे चित्तौड़ का पहला जौहर कहा जाता है।

इतिहास बनाम कथा: क्या सच है, क्या कल्पना?

यहीं इस लेख का सबसे महत्वपूर्ण भाग आता है। अधिकांश वेबसाइटें पूरी कथा को इतिहास बताकर छोड़ देती हैं। पर सच्चाई अधिक सूक्ष्म है। नीचे दी गई तालिका दोनों को अलग करती है:

पहलू ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित लोककथा / काव्य से
चित्तौड़ की घेराबंदी (1303) हाँ — प्रमाणित
राजा रतन सिंह का युद्ध में मारा जाना हाँ — अधिकांश स्रोत सहमत
स्त्रियों का जौहर व्यापक रूप से स्वीकृत विवरण कथा से
रानी पद्मिनी का व्यक्तिगत अस्तित्व कोई समकालीन प्रमाण नहीं पद्मावत (1540) से
राघव चेतन, हीरामणि तोता, आईने की झलक कोई ऐतिहासिक आधार नहीं जायसी की रचना
आक्रमण का कारण “पद्मिनी की सुंदरता” इतिहासकार अस्वीकार करते हैं — कारण सामरिक/राजनीतिक था काव्य का रोमांटिक रूपक
गोरा-बादल की पालकी वाली चाल समकालीन प्रमाण नहीं राजस्थानी लोकगाथा

आधुनिक इतिहासकार क्या कहते हैं?

घेराबंदी का सबसे पुराना और विश्वसनीय स्रोत है अमीर खुसरो की ख़ज़ाइन-उल-फुतूह। खुसरो स्वयं इस अभियान में खिलजी के साथ उपस्थित थे — फिर भी उन्होंने किसी पद्मिनी या पद्मावती का उल्लेख नहीं किया। रानी का नाम सबसे पहले 1540 ई० में जायसी के पद्मावत में आता है, यानी घटना के लगभग 237 वर्ष बाद। जायसी उत्तर प्रदेश में रहते थे, राजस्थान में नहीं, और उन्होंने प्रचलित लोककथा को अपनी कल्पना से समृद्ध कर एक सूफ़ी रूपक रचा।

बाद में अकबर के दरबारी अबुल फ़ज़ल और इतिहासकार फ़रिश्ता ने कथा को दोहराया, तथा 16वीं सदी की राजस्थानी रचना गोरा बादल पद्मिनी चौपाई (हेमरतन) ने इसे और लोकप्रिय बनाया। औपनिवेशिक काल में कर्नल जेम्स टॉड ने इसे इतिहास के रूप में प्रस्तुत किया — जिसे आधुनिक विद्वान बिना आलोचनात्मक जाँच के स्वीकार की गई बात मानते हैं। इतिहासकार हरबंस मुखिया का संतुलित निष्कर्ष है कि रानी पद्मिनी भले ऐतिहासिक सत्य न हों, पर उनका नाम इतिहास की स्मृति और लोक-आस्था में जीवित है।

निष्कर्ष

रानी पद्मिनी की कथा वीरता, त्याग और सम्मान का प्रतीक है — और यही कारण है कि यह सदियों से जीवित है। परन्तु एक जागरूक पाठक के लिए यह जानना उतना ही ज़रूरी है कि इसमें इतिहास कहाँ समाप्त होता है और कविता कहाँ आरंभ होती है। 1303 की घेराबंदी और जौहर वास्तविक हैं; पद्मिनी की व्यक्तिगत कहानी मुख्यतः एक साहित्यिक विरासत है। दोनों को अलग-अलग समझकर ही हम इस अमर प्रतीक का सच्चा सम्मान कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या रानी पद्मिनी वास्तव में इतिहास में मौजूद थीं?

अधिकांश आधुनिक इतिहासकार उनके व्यक्तिगत अस्तित्व को काल्पनिक मानते हैं, क्योंकि किसी समकालीन (14वीं सदी के) दस्तावेज़ में उनका उल्लेख नहीं है। उनका नाम पहली बार 1540 ई० में जायसी के पद्मावत में आता है। हालांकि, चित्तौड़ की 1303 की घेराबंदी और जौहर ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित हैं।

अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर हमला क्यों किया?

इतिहासकारों के अनुसार आक्रमण का कारण सामरिक और राजनीतिक था — चित्तौड़ एक महत्वपूर्ण किला और व्यापार-मार्ग पर था। “पद्मिनी की सुंदरता के लिए हमला” वाला कारण जायसी के काव्य का रोमांटिक रूपक है, ऐतिहासिक तथ्य नहीं।

क्या अलाउद्दीन खिलजी ने सचमुच रानी पद्मिनी को आईने में देखा था?

यह प्रसिद्ध “कांच में झलक” वाला दृश्य केवल पद्मावत की कथा का हिस्सा है। किसी ऐतिहासिक स्रोत में इसका प्रमाण नहीं मिलता, इसलिए इसे किंवदंती माना जाता है।

रानी पद्मिनी का जौहर कब हुआ था?

चित्तौड़ की घेराबंदी 1303 ई० में हुई और किला 26 अगस्त 1303 को गिरा। इसी दौरान जौहर हुआ, जिसे “चित्तौड़ का पहला जौहर” कहा जाता है।

पद्मिनी और पद्मावती में क्या अंतर है?

दोनों एक ही चरित्र के नाम हैं। “पद्मिनी” संस्कृत में एक विशेष प्रकार की आदर्श सुंदर स्त्री को कहते हैं, जबकि “पद्मावती” जायसी के काव्य में प्रयुक्त नाम है। सामान्य प्रयोग में दोनों एक-दूसरे के पर्याय हैं।

संदर्भ / स्रोत

  • अमीर खुसरो — ख़ज़ाइन-उल-फुतूह (घेराबंदी का समकालीन विवरण)
  • मलिक मुहम्मद जायसी — पद्मावत (1540 ई०)
  • हेमरतन — गोरा बादल पद्मिनी चौपाई (16वीं सदी)
  • अबुल फ़ज़ल एवं फ़रिश्ता के परवर्ती विवरण
  • हरबंस मुखिया एवं आधुनिक इतिहासकारों की समीक्षाएँ


RW

Editorial Review Note

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

November 10, 2017 8 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Astrology

कैसे मनाया जाता है रक्षाबंधन भारत के अलग-अलग राज्यों में

कैसे मनाया जाता है रक्षाबंधन भारत के अलग-अलग राज्यों में रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्यार, विश्वास और सुरक्षा के अटूट बंधन का प्रतीक है।भारत…

Read now
Hinduism

भारत में कोरोना वायरस के स्टेज-3 से लड़ने की तैयारी पूरी

नयी दिल्ली, 28 मार्च;   इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR), स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ कोविड -19 टास्क फोर्स के सदस्यों ने इस बात को बनाए रखा है कि…

Read now
Hinduism

कोरोना वायरस: इतने राज्यों में पहुंचा कोरोना वायरस, 5 की मौत, 200 से ज्यादा संक्रमित

नई दिल्ली, 20मार्च; कोरोना वायरस से भारत में अबतक पांच लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे पहली मौत कर्नाटक के कुलबर्गी से, दूसरी मौत देश की राजधानी…

Read now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *