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क्या है तबलीगी जमात ?

क्या है तबलीगी जमात ?

क्या है तबलीगी जमात ?
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क्या है तबलीगी जमात ?

क्या है तबलीगी जमात ?

  • क्या है तबलीगी का मतलब ?
  • मरकज और जमात का अंतर 
  • क्यों अलग है तबलीगी जमात के लोग 

मरकज़ का अर्थ है केंद्र। तबलीग का मतलब है संदेश देना। इस्लाम उसके मूल, अल्लाह, कुरान, हदीस का संदेश देना ही तबलीग का अर्थ है। और जमात का अर्थ समूह होता है। मरकज का मतलब है स्थान है। यानि तबलीगी जमात की मरकज कहां होगी। भारत के लिए ये निजामुद्दीन मरकज है। आज से 75 साल पहले 1927 हरियाणा के मेवात के मौलाना मौलाना इलियास साहब ने की थी।

तबलीगी जमात एक केन्द्रित आंदोलन है जिसमें जुड़ने की आजादी किसी भी मुस्लिम को है। इसके जो मुख्य केन्द्र है, उनमें से एक पाकिस्तान के रायविंद में है और दूसरा दिल्ली के निजामुद्दीन में है।

तबीलीगी जमात से जुड़ने वालों के लिए कुरान की बातों को ही सबकुछ मानने की इजाजत होती है। मरकज में दुनियावी बातों की पाबंदी होती है। केवल अल्लाह की बात और प्रकृति द्वारा बनाई गई चीजों का ही जिक्र किया जाता है।

तबलीगी जमात की मुख्य बातें:

तबलीगी जमात का मतलब है आस्था का प्रचार करने वालों की टोली

यह सुन्नी देओबंदी या वहाबी मुसलमानों का बड़ा समूह है।

हरियाणा के मेवात के मौलाना मोहम्मद इलियास ने 1927 में इसे शुरू किया था.

तबलीगी जमात का पहला जलसा 1941 में हुआ था, जिसमें बीस हजार से ज्यादा लोग शरीक हुए थे.

देश के बंटवारे के बाद 1947 में इसकी मेन ब्रांच पाकिस्तान के लाहौर में बनी

भारत के बाद बांग्लादेश में जमात का सबसे बड़ा संगठन है.

विश्व के 100 से अधिक देशों में जमात सक्रिय

अमेरिका और ब्रिटेन में इनकी बड़ी उपस्थिति है, जहां भारतीयों लोगों की संख्या सबसे अधिक है.

यात्राओं में ये टोलियां बना कर मस्जिदों में ठहरते हैं और वहां के मुस्लमानों को धार्मिक प्रवचन देते हैं.

ये लोग घर-घर जाकर मुसलमानों को नमाज पढ़ने, रोजा रखने, हज करने आदि के बारे में प्रेरित करते हैं और उन्हें अपनी जमात से जोड़ते हैं.

इनका शिया, सूफी मुसलमानों और मजार पर जाने वाले सुन्नी मुसलमानों से गहरा मतभेद हैं.

इनका खुदा के अलावा मजार, पीर, इमाम आदि में कोई विश्वास नहीं होता.

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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April 2, 2020 2 min read
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