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श्रावण विशेष : बेलपत्र का महत्व, उपयोग एवम लाभ

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श्रावण विशेष : बेलपत्र का महत्व, उपयोग एवम लाभ

श्रावण विशेष : बेलपत्र का महत्व, उपयोग एवम लाभ

हमारे धर्मशास्त्रों में ऐसे निर्देश दिए गए हैं, जिससे धर्म का पालन करते हुए पूरी तरह प्रकृति की रक्षा भी हो सके। यही वजह है कि देवी-देवताओं को अर्पित किए जाने वाले फूल और पत्र को तोड़ने से जुड़े कुछ नियम बनाए गए हैं। तो आइये जानते हैं पण्डित दयानन्द शास्त्री जी से भगवान शिव को बिल्वपत्र अर्पित करने का विधि विधान।

क्या है बेलपत्र

बेल के पेड़ की पत्तियों को बेलपत्र कहते हैं। पत्र में तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी होती हैं लेकिन इन्हें एक ही पत्ती मानते हैं। शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि शिव की उपासना बिना बेलपत्र के पूरी नहीं होती। अगर आप भी देवों के देव महादेव की विशेष कृपा पाना चाहते हैं तो बेलपत्र के महत्व को समझना बेहद ज़रूरी है।

बेलपत्र और शिव :

भगवान शंकर को बेलपत्र बेहद प्रिय हैं। भांग धतूरा और बिल्व पत्र से प्रसन्न होने वाले केवल शिव ही हैं। सावन में बेलपत्रों से विशेष रूप से शिव की पूजा की जाती है। तीन पत्तियों वाले पत्र आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, किंतु कुछ ऐसे बिल्व पत्र भी होते हैं जो दुर्लभ पर चमत्कारिक और अद्भुत होते  हैं।

शिव आराधना में चढाने हेतु ऐसे होने चाहिए बेलपत्र

शिव आराधना में चढाने हेतु ऐसे होने चाहिए बेलपत्रशि‍व को बेलपत्र अर्पित करते वक्त और इसे तोड़ते समय कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी होता है ।क्या है वो नियम आइये जानते हैं-

  • भूलकर भी चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथियों के साथ-साथ सं‍क्रांति के समय और सोमवार को बेलपत्र नहीं तोड़नी चाहिए।
  • शास्त्रों में कहा गया है कि अगर नया बेलपत्र न मिल सके, तो किसी दूसरे के चढ़ाए हुए पत्र को भी धोकर कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे किसी भी तरह का पाप नहीं लगेगा। जो स्कंदपुराम में बताया गया है।अर्पितान्यपि बिल्वानि प्रक्षाल्यापि पुन: पुन:।शंकरायार्पणीयानि न नवानि यदि क्वचित्।। (स्कंदपुराण)
  • एक बेलपत्र में तीन पत्तियां होनी चाहिए।
  • पत्तियां कटी या टूटी हुई न हों और उनमें कोई छेद भी नहीं होना चाहिए।
  • भगवान शिव को बेलपत्र चिकनी ओर से ही अर्पित करें।
  • शिव जी को बेलपत्र अर्पित करते समय साथ ही में जल की धारा जरूर चढ़ाएं।
  • बिना जल के बेलपत्र अर्पित नहीं करना चाहिए।

यह भी

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि हमारे धार्मिक ग्रंथों में बिल्व पत्र के वृक्ष को ‘श्रीवृक्ष’ भी कहा जाता है इसे ‘शिवद्रुम’ भी कहते है। बिल्वाष्टक और शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि बेल पत्र के तीनो पत्ते त्रिनेत्रस्वरूप् भगवान शिव के तीनों नेत्रों को विशेष प्रिय हैं। बिल्व पत्र के पूजन से सभी पापो का नाश होता है ।

स्कंदपुराण’ में बेल पत्र के वृक्ष की उत्पत्ति के संबंध में कहा गया है कि एक बार माँ पार्वती ने अपनी उँगलियों से अपने ललाट पर आया पसीना पोछकर उसे फेंक दिया , माँ के पसीने की कुछ बूंदें मंदार पर्वत पर गिरीं, कहते है उसी से बेल वृक्ष उत्पन्न हुआ।

क्या है बेलपत्रशास्त्रों के अनुसार इस वृक्ष की जड़ों में माँ गिरिजा, तने में माँ महेश्वरी, इसकी शाखाओं में माँ दक्षयायनी, बेल पत्र की पत्तियों में माँ पार्वती, इसके फूलों में माँ गौरी और बेल पत्र के फलों में माँ कात्यायनी का वास हैं।

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हमारे शास्त्रों में बिल्व का पेड़ संपन्नता का प्रतीक, बहुत पवित्र तथा समृद्धि देने वाला है। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते है कि बिल वृक्ष में माँ लक्ष्मी का भी वास है अत: घर में बेल पत्र लगाने से देवी महालक्ष्मी बहुत प्रसन्न होती हैं, जातक वैभवशाली बनता है।

बेलपत्र से भगवान शिव का पूजन करने से समस्त सांसारिक सुख की प्राप्ति होती है, धन-सम्पति की कभी भी कमी नहीं होती है।

अगर बेलपत्र पर ॐ नम: शिवाय या राम राम लिखकर उसे भगवान भोलेनाथ पर अर्पित किया जाय तो यह बहुत ही पुण्यदायक होता है ।

शास्त्रों के अनुसार रविवार के दिन बेलपत्र का पूजन करने से समस्त पापो का नाश होता है।

तृतीया तिथि के स्वामी देवताओं के कोषाध्यक्ष एवं भगवान भोलाथ के प्रिय कुबेर जी है । तृतीया को बेलपत्र चढ़ाकर कुबेर जी की पूजा करने , उनके मन्त्र का जाप करने से अतुल ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। और अगर कुबेर जी की पूजा बेल के वृक्ष के नीचे बैठकर, अथवा शिव मंदिर में की जाय तो पीढ़ियों तक धन की कोई भी कमी नहीं रहती है । भगवान शंकर को विल्वपत्र अर्पित करने से मनुष्य कि सर्वकार्य व मनोकामना सिद्ध होती हैं।

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी

RW

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July 23, 2019 4 min read
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