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कांवड़ यात्रा सावन में ही क्यों होती है? Video

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कांवड़ यात्रा सावन में ही क्यों होती है? Video

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भारत में कांवड़ यात्रा एक अनोखी धार्मिक परंपरा है, जो सावन के महीने में लाखों शिवभक्तों को भगवान शिव की ओर खींच लाती है। हर वर्ष यह यात्रा विशेष रूप से श्रावण मास में की जाती है, जब श्रद्धालु उत्तर भारत के पवित्र स्थलों जैसे हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख या सुलतानगंज से गंगाजल लेकर अपने नजदीकी शिव मंदिरों तक पहुंचते हैं और शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया नंगे पांव की जाती है, और श्रद्धालु रास्ते भर “बोल बम” के जयकारे लगाते हुए चलते हैं। लेकिन सवाल उठता है कि ये यात्रा साल भर नहीं, सिर्फ सावन में ही क्यों की जाती है?

इसका उत्तर हमें पौराणिक कथाओं में मिलता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय जब विष निकला था, तो भगवान शिव ने उसे पीकर सारी सृष्टि की रक्षा की थी। इससे उनका गला नीला पड़ गया और उनके शरीर में अत्यधिक ताप उत्पन्न हो गया। इस विष की तीव्रता को शांत करने के लिए देवताओं और भक्तों ने उन्हें जल चढ़ाया, और यह घटना सावन के महीने में ही हुई थी। तभी से सावन का महीना शिव उपासना के लिए विशेष माना जाने लगा और इसी समय जलाभिषेक की परंपरा की शुरुआत हुई। इसी परंपरा को श्रद्धालु आज भी कांवड़ यात्रा के माध्यम से निभाते हैं।

सावन का माह न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से बल्कि प्राकृतिक रूप से भी अनुकूल होता है। इस समय मानसून की बारिश से वातावरण शुद्ध और ठंडा होता है, हरियाली छा जाती है और भक्तों के लिए पैदल यात्रा करना अपेक्षाकृत सहज होता है। यह माह एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है, जो भक्तों को शिव की आराधना के लिए प्रेरित करता है। कांवड़ यात्रा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि साधना का एक माध्यम बन जाती है, जिसमें कष्ट सहकर भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण दिखाया जाता है।

आधुनिक समय में भी यह यात्रा अपनी परंपरा और महत्व को बनाए हुए है। यह न सिर्फ एक व्यक्तिगत आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामूहिक श्रद्धा और सामाजिक एकता का भी उदाहरण है। लाखों लोग मिलकर, एक ही लक्ष्य और भक्ति की भावना से प्रेरित होकर, कठिनाइयों को पार करते हैं और भगवान शिव के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। यही वजह है कि कांवड़ यात्रा सावन में ही की जाती है—क्योंकि यह वह समय होता है जब शिवभक्ति अपने शिखर पर होती है और हर भक्त शिव को पाने की एक नई कोशिश करता है।
~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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July 9, 2025 3 min read
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