- परमार्थ निकेतन में क्षेत्रीय आशा वर्कर एवं शिक्षकों को दिया जा रहा है प्राथमिक नेत्र चिकित्सा एवं देखभाल प्रशिक्षण
- दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्र में नेत्रों की सफाई, प्राथमिक उपचार, देखभाल एवं जांच सम्बन्धित विषयों पर दिया प्रशिक्षण
- 100 से अधिक आशा वर्कर एवं 50 शिक्षक लें रहे है प्रशिक्षण
- स्वामी शुकदेवानन्द चिकित्सालय परमार्थ निकेतन एवं लोटस अस्पताल बाम्बे के संयुक्त प्रयास से सम्पन हो रहा प्रशिक्षण
- भूजल के गिरते स्तर एवं पर्यावरण संरक्षण के लिये पर्याप्त उपाय करना नितांत आवश्यक – स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 27 अगस्त। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के सह-संस्थापक एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में परमार्थ निकेतन में दो दिवसीय प्राथमिक नेत्र चिकित्सा एवं देखभाल प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण शिविर स्वामी शुकदेवानन्द चिकित्सालय, परमार्थ निकेतन एवं लोटस अस्पताल बाम्बे के संयुक्त प्रयासों से सम्पन हो रहा है। इस प्रशिक्षण में यमकेश्वर ब्लाक और आस-पास के क्षेत्र की 100 से अधिक आशा वर्कर एवं 50 से भी अधिक शिक्षकों ने भाग लिया।
प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने हेतु लोटस अस्पताल बाम्बे से आयी प्रोफेसर हैरल ने बताया की किस प्रकार नेत्रों की सफाई, देखभाल की जाती है, प्राथमिक नेत्र चिकित्सा एवं अपने परिवर्तित होते नम्बर की जांच करना, नेत्र रोग की पहचान करना आदि विषयांे पर प्रायोगिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्राथमिक नेत्र प्रशिक्षण शिविर का निदेशन स्वामी शुकदेवानन्द चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ रवि कौशल ने किया तथा प्रतिभागियों को प्रशिक्षित प्रोफेसर हैरल, लोटस अस्पताल बाम्बे ने किया। प्रथम सत्र के पश्चात सभी प्रतिभागियोें ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भंेट कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा पूज्य स्वामी जी के सानिध्य में विश्व में जल की उपलब्धता के लिये वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन की।
प्रतिभागियोें को सम्बोधित करते हुये पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं भूजल के गिरते स्तर एवं पर्यावरण संरक्षण के लिये पर्याप्त उपाय करना नितांत आवश्यक है क्योकि प्रदूषित होती प्रकृति, कटते वृक्ष एवं गिरते एवं प्रदूषित जल स्तर का सीधा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पडता है जिससे स्थिति भयावह भी हो सकती है। प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारी अस्थमा, श्वास संबंधी, हृदय एवं नेत्र संबंधी बीमारीयां हो रही है। इन रोगों की प्राथमिक अवस्था में जानकारी हो जाये तो जीवन को सुरक्षित रखा जा सकता हैै। उन्होने सभी प्रतिभागियों से आहृवान किया कि वे स्वच्छता को जीवन में धारण करें और निरोग जीवन शैली को अपनाये तथा अपने सम्पर्क में आने वालोेें को भी प्रेरित करें।’ पूज्य स्वामी जी ने सभी प्रतिभागियों को मानसून सत्र में पौधा रोपण का संकल्प कराया।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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