RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

कजरी तीज: जानिये क्यों मनाई जाती है कजरी तीज, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कजरी तीज: जानिये क्यों मनाई जाती है कजरी तीज, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कजरी तीज: जानिये क्यों मनाई जाती है कजरी तीज, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Visual Archive

कजरी तीज: जानिये क्यों मनाई जाती है कजरी तीज, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कजरी तीज का त्योहार 6 अगस्त 2020 को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए इस व्रत को करती हैं। कजरी तीज के कैलेंडर के अनुसार इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। जिसमें आप नीमड़ माता की पूजा कर सकती हैं तो चलिए जानते हैं क्यों मनाई जाती है तीज-



जानिए क्यों मनाई जाती है कजरी तीज
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का त्योहार मनाया जाता है। यह त्योहार रक्षाबंधन के तीन दिन बाद आता है। कजरी तीज के दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत को न केवल सुहागन महिलाएं बल्कि कुंवारी लड़कियां भी सुयोग्य वर पाने के लिए करती हैं। कजरी तीज का यह व्रत निर्जला किया जाता है। इस दिन नीमड़ माता की पूजा की जाती है। कजरी तीज की पूजा तालाब के किनारे की जाती है। यदि घर के पास कोई तालाब न हो तो मिट्टी और गोबर से तालाब की आकृति बनाकर पूजा की जाती है। वहीं इस दिन गाय की पूजा को भी विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन गाय को आटें की सात लोई बनाकर उस पर गुड़ और घी रखकर खिलाया जाता है और उसके बाद ही कजरी तीज के व्रत का पारण किया जाता है।

कजरी तीज का शुभ मुहूर्त-

तृतीया तिथि प्रारंभ- सुबह 10 बजकर 50 मिनट से
तृतीया तिथि समाप्ति- रात 12 बजकर 15 मिनट पर।
चंद्रोदय का समय- रात 9 बजकर 8 मिनट पर।

कजरी तीज की पूजा विधि
कजरी तीज पर्व में सुहागिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती है और माता पार्वती संग भगवान भोलेनाथ की भक्ति भाव से पूजा करती है. भगवान के भोग के लिए जौ, गेहूं, चना और चावल के सत्तू में घी और मेवे मिलाकर प्रताद तैयार किया जाता है. शाम में महिलाएं कजरी तीज की कथा पढ़ती हैं. इसके बाद शाम के समय चंद्रमा की पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता हैं.



चांदी की अंगूठी और गेहूं के दानों के साथ दिया जाता है अर्घ्य
कजरी तीज पर शाम के समय पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. फिर चंद्रमा को रोली, अक्षत और मौली अर्पित की जाती है. चांदी की अंगूठी और गेहूं के दानों को हाथ में लेकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. इसके बाद अपने स्थान पर ही खड़े होकर परिक्रमा की जाती है. चंद्र की पूजा करने के बाद महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं.

[video_ads]
[video_ads2]
You can send your stories/happenings here:info@religionworld.in

RW

Editorial Review Note

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

August 6, 2020 3 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

विनायक चतुर्थी 2021: जानिये विनायक चतुर्थी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी मनाई जाती है. फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि आज है. जैसा कि नाम से…

Read now
Hinduism

देव दिवाली : जानिये कब है देवताओं की दीपावली? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त एवं महत्व

हर वर्ष कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को देव दीपावली मनाई जाती है। देव दीपावली हर वर्ष काशी में मनाए जाने की परंपरा है। इस वर्ष देव ​दीपावली…

Read now
Hinduism

शारदीय नवरात्रि 2020: जानिये शारदीय नवरात्रि की तिथि और शुभ मुहूर्त

इस बार शरद ऋतु की नवरात्रि 17 अक्टूबर को शुरू हो रही है। चलिए  जानते हैं साल 2020 की शारदीय नवरात्रि की जुड़ी महत्वपूर्ण तिथियां और मुहूर्त। शरद…

Read now