हर वर्ष कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को देव दीपावली मनाई जाती है। देव दीपावली हर वर्ष काशी में मनाए जाने की परंपरा है। इस वर्ष देव दीपावली कुछ लोग 29 नवंबर को और कुछ 30 नवम्बर को मनाएंगे। देव दीपावली को देव दिवाली भी कहा जाता है।
देव दीपावली का पर्व भगवान शिव के त्रिपुरासुर पर विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इसको त्रिपुरोत्सव या त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष देव दीपावली की पूजा का शुभ मुहूर्त एवं महत्व क्या है।
शुभ मुहूर्त
कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 29 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 47 मिनट से हो रहा है, जो 30 नवंबर दिन सोमवार को दोपहर 02 बजकर 59 मिनट तक है। ऐसे में देव दीपावली 29 नवंबर और 30 नवम्बर दोनों दिन मनाई जा रही है ।
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देव दिवाली का महत्व
यह उत्सव दिवाली के 15 दिन बाद आता है। दिवाली कार्तिक अमावस्या के दिन तथा देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा को होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवी-देवता देव दीपावली मनाने के लिए काशी जाते हैं।
देव दीपावली के दिन संध्या के समय में गंगा पूजन एवं आरती होती है तथा काशी के सभी घाटों को दीपकों से रोशन किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन दान, स्नान, उपासना और यज्ञ का अनंत फल प्राप्त होता है। कार्तिक पूर्णिमा को सायंकाल में मत्स्यावतार हुआ था, इसलिए इस दिन दान करने से 10 यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है।
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