प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी मनाई जाती है. फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि आज है. जैसा कि नाम से ही पता चलता है यह दिन गणेश जी को समर्पित है. इस दिन गणेश जी की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है. आज बुधवार भी है. यह दिन भी गणेश जी को समर्पित होता है.
ऐसे में इस बार आने वाली विनयाक चतुर्थी और भी खास हो गई है. इस दिन गणेश जी को उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाया जाता है. इन्हें विघ्नहर्ता भी कहा गया है क्योंकि ये अपने भक्तों के विघ्नों को हर लेते हैं. आइए जानते हैं विनायक चतुर्थी का शुभ मुहूर्त और महत्व.
शुभ मुहूर्त:
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 16 मार्च, मंगलवार, रात 8 बजकर 58 मिनट से
चतुर्थी तिथि समाप्त: 17 मार्च, बुधवार, रात 11 बजकर 28 मिनट तक
पूजा मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 17 मिनट से दोपहर 1 बजकर 42 मिनट तक
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विनायक चतुर्थी पूजा विधि
विनायक चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए.
भगवान गणेश की मूर्ति या प्रतिमा के सामने बैठकर या मंदिर में जाकर व्रत और पूजा का संकल्प लें.
गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करें.
पूरे दिन नियम और संयम से रहकर व्रत रखें.
शाम को सूर्यास्त के पहले फिर से नहाएं और भगवान गणेश की पूजा करें.
रात में चंद्रमा के दर्शन कर के अर्घ्य दें और चंद्रमा की पूजा करें.
अब परिवार के साथ बैठकर फलाहार ग्रहण करें.
विनायक चतुर्थी का महत्व
मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा के साथ विनायक चतुर्थी का व्रत करता है उसे गणेश जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है. इस दिन गणपति की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के सभी बिगड़े कार्य बन जाते हैं. साथ ही अगर जीवन में किसी तरह की कोई बाधा चली आ रही है तो वो भी समाप्त हो जाती है. गणपति बप्पा अपने भक्तों के विघ्नों को हर लेते हैं इसलिए इन्हें विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है.
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