भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान सिंह द्वार से बाहर आते हैं, अश्व द्वार से नहीं। पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के चार प्रमुख द्वारों में से सिंह द्वार (Lion Gate) पूर्व दिशा का मुख्य प्रवेश मार्ग है, और इसी के सामने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के भव्य रथ खड़े किए जाते हैं। पहंडी अनुष्ठान के बाद तीनों देवता इसी द्वार से बाहर आकर रथों पर विराजमान होते हैं और यहीं से रथ यात्रा का शुभारंभ होता है। इस लेख में जानिए जगन्नाथ मंदिर के चारों द्वारों का महत्व, सिंह द्वार की विशेषता, पहंडी अनुष्ठान और तीनों रथों के नाम।
जगन्नाथ मंदिर के चार प्रमुख द्वार
पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में चार मुख्य प्रवेश द्वार हैं। प्रत्येक द्वार पर एक विशेष पशु की प्रतिमा स्थापित है, जिसके आधार पर उनका नाम रखा गया है। नीचे दी गई तालिका से चारों द्वारों का स्थान और प्रतीकात्मक महत्व एक नज़र में समझा जा सकता है:
| द्वार | दिशा | प्रतीक | भूमिका |
|---|---|---|---|
| सिंह द्वार (Lion Gate) | पूर्व | शक्ति, साहस, धर्म | मुख्य प्रवेश; रथ यात्रा का प्रस्थान द्वार |
| अश्व द्वार (Horse Gate) | दक्षिण | गति, पराक्रम | अन्य धार्मिक व प्रशासनिक परंपराएं |
| व्याघ्र द्वार (Tiger Gate) | पश्चिम | धर्म-रक्षा, वैराग्य | साधु-संतों व विशेष प्रवेश |
| हस्ति द्वार (Elephant Gate) | उत्तर | समृद्धि, ऐश्वर्य | उत्तर दिशा का प्रवेश मार्ग |
इन चारों द्वारों का धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व माना जाता है। सिंह द्वार मंदिर का सबसे प्रमुख प्रवेश मार्ग है और अधिकांश श्रद्धालु इसी द्वार से मंदिर में प्रवेश करते हैं।
रथ यात्रा में भगवान किस द्वार से निकलते हैं?
रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को विशेष “पहंडी” अनुष्ठान के माध्यम से मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाया जाता है। परंपरा के अनुसार देवता एक निश्चित क्रम में बाहर आते हैं—पहले सुदर्शन, फिर बलभद्र, फिर देवी सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ। इन सभी को मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार यानी सिंह द्वार के सामने खड़े भव्य रथों पर क्रमशः विराजमान कराया जाता है। रथ यात्रा का शुभारंभ भी यहीं से होता है।
इस प्रकार रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ का प्रस्थान सिंह द्वार से माना जाता है, न कि अश्व द्वार से।
सिंह द्वार का विशेष महत्व
सिंह द्वार को जगन्नाथ मंदिर का सबसे पवित्र और प्रमुख द्वार माना जाता है। इस द्वार के सामने स्थित प्रसिद्ध “अरुण स्तंभ” भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। धार्मिक मान्यता है कि सिंह शक्ति, साहस और धर्म की विजय का प्रतीक है। इसलिए भगवान की सार्वजनिक यात्रा का आरंभ इसी द्वार से किया जाता है। रथ यात्रा के दौरान सिंह द्वार के ठीक सामने ही ग्रैंड रोड (बड़ा डंडा) पर तीनों रथ पंक्तिबद्ध खड़े रहते हैं।
अश्व द्वार का क्या महत्व है?
अश्व द्वार मंदिर के दक्षिणी भाग में स्थित है। घोड़ा शक्ति, गति और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। हालांकि इस द्वार का मंदिर परंपराओं में अपना विशेष महत्व है, लेकिन रथ यात्रा के दौरान भगवान का मुख्य प्रस्थान मार्ग सिंह द्वार ही होता है। अश्व द्वार का उपयोग अन्य धार्मिक और प्रशासनिक उद्देश्यों से जुड़ी परंपराओं में किया जाता है।
रथ यात्रा क्यों है इतनी विशेष?
रथ यात्रा वर्ष का वह अवसर होता है जब भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के बीच स्वयं आते हैं। कई श्रद्धालु मानते हैं कि जो लोग मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर सकते, वे भी इस दिन भगवान के दर्शन कर सकते हैं। यही कारण है कि रथ यात्रा को समावेशिता, भक्ति और भगवान के भक्तों तक पहुंचने का प्रतीक माना जाता है। तीनों रथ पुरी के बड़ा डंडा मार्ग से होकर लगभग तीन किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर तक खींचे जाते हैं।
तीनों रथों के नाम
रथ यात्रा में भगवानों के लिए हर वर्ष नए रथ बनाए जाते हैं:
- नंदीघोष – भगवान जगन्नाथ का रथ
- तालध्वज – भगवान बलभद्र का रथ
- दर्पदलन – देवी सुभद्रा का रथ
इन रथों का निर्माण अक्षय तृतीया से प्रारंभ होता है और पारंपरिक विधि से तैयार किया जाता है।
निष्कर्ष
जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी अनेक परंपराओं में सिंह द्वार का विशेष स्थान है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ यात्रा के दौरान सिंह द्वार से बाहर आकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। यद्यपि अश्व द्वार सहित मंदिर के अन्य द्वार भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन रथ यात्रा का मुख्य केंद्र और प्रारंभ बिंदु सिंह द्वार ही माना जाता है। यही कारण है कि रथ यात्रा के समय सिंह द्वार भक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ किस द्वार से निकलते हैं?
जगन्नाथ मंदिर के चार द्वार कौन-कौन से हैं?
सिंह द्वार से ही भगवान क्यों निकलते हैं?
पहंडी अनुष्ठान क्या है?
रथ यात्रा के तीनों रथों के नाम क्या हैं?
अरुण स्तंभ क्या है और कहां स्थित है?
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.