पुरी की विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा केवल भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य यात्रा तक सीमित नहीं है। इस उत्सव से कई ऐसी धार्मिक परंपराएं जुड़ी हैं, जो सदियों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करती आ रही हैं। इनमें सबसे रोचक परंपरा है मां लक्ष्मी का भगवान जगन्नाथ से नाराज़ होना, जिसे हेरा पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यह उत्सव रथ यात्रा के पांचवें दिन आयोजित होता है और जगन्नाथ संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस वर्ष जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 (गुरुवार) से शुरू हो रही है और हेरा पंचमी 2026 में 20 जुलाई, सोमवार को मनाई जाएगी। इस लेख में जानिए मां लक्ष्मी के नाराज़ होने की कथा, रथ तोड़ने की अनोखी रस्म और इस परंपरा का आध्यात्मिक संदेश।
हेरा पंचमी 2026 — एक नज़र में
- तिथि: 20 जुलाई 2026, सोमवार (आषाढ़ शुक्ल पक्ष)
- स्थान: गुंडिचा मंदिर, पुरी (ओडिशा)
- रथ यात्रा प्रारंभ: 16 जुलाई 2026, गुरुवार
- बहुदा यात्रा (वापसी): 24 जुलाई 2026, शुक्रवार
हेरा पंचमी पर मां लक्ष्मी क्यों नाराज़ होती हैं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ श्रीमंदिर से निकलकर गुंडिचा मंदिर चले जाते हैं। इस यात्रा में उनकी पत्नी मां लक्ष्मी साथ नहीं जातीं। जब कई दिन बीत जाते हैं और भगवान जगन्नाथ वापस नहीं लौटते, तब मां लक्ष्मी स्वयं उन्हें बुलाने के लिए गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं। इस प्रसंग को प्रेम, मान-मनुहार और दांपत्य संबंधों के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
क्या है हेरा पंचमी और कैसे मनाई जाती है?
रथ यात्रा के पांचवें दिन मनाए जाने वाले हेरा पंचमी उत्सव में मां लक्ष्मी को विशेष पालकी में गुंडिचा मंदिर ले जाया जाता है। वहां वे भगवान जगन्नाथ से शीघ्र श्रीमंदिर लौटने का आग्रह करती हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ उन्हें सहमति के प्रतीक के रूप में एक पुष्पमाला (आज्ञामाला) अर्पित करते हैं। इसके बाद मां लक्ष्मी वापस लौट जाती हैं।
हेरा पंचमी पर रथ का एक हिस्सा क्यों तोड़ा जाता है?
हेरा पंचमी की सबसे प्रसिद्ध रस्मों में से एक यह है कि मां लक्ष्मी के सेवक भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ के एक छोटे हिस्से को प्रतीकात्मक रूप से क्षतिग्रस्त करते हैं। इसे देवी के नाराज़ होने का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद मां लक्ष्मी मुख्य मार्ग से नहीं, बल्कि एक अलग मार्ग जिसे हेरा गोहिरि साही कहा जाता है, से श्रीमंदिर लौटती हैं। यह परंपरा सदियों से निभाई जा रही है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसे देखने आते हैं।
इस परंपरा का आध्यात्मिक संदेश
जगन्नाथ संस्कृति में इस प्रसंग को केवल देवी के क्रोध के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि यह पारिवारिक प्रेम, संवाद, सम्मान और रिश्तों में संतुलन का संदेश भी देता है। भगवान जगन्नाथ का मां लक्ष्मी को मनाना और उनका अंततः वापस लौटना इस बात का प्रतीक माना जाता है कि रिश्तों में प्रेम और सम्मान सबसे महत्वपूर्ण हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 में हेरा पंचमी का विशेष महत्व
पुरी की रथ यात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में गिनी जाती है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं और कुछ दिनों बाद बहुदा यात्रा के माध्यम से वापस श्रीमंदिर लौटते हैं। पंचमी इसी यात्रा का एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है।
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 एक नज़र |
निष्कर्ष
मां लक्ष्मी के नाराज़ होने की कथा पुरी की रथ यात्रा को और भी विशेष बनाती है। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में प्रेम, समर्पण और पारिवारिक संबंधों की सुंदर अभिव्यक्ति भी है। हेरा पंचमी का यह उत्सव हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ की अनूठी परंपराओं से जोड़ता है।
हेरा पंचमी से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
हेरा पंचमी 2026 में कब है?
हेरा पंचमी 2026 में 20 जुलाई, सोमवार को मनाई जाएगी। यह रथ यात्रा (16 जुलाई 2026) के पांचवें दिन गुंडिचा मंदिर, पुरी में आयोजित होती है।
हेरा पंचमी क्यों मनाई जाती है?
रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ मां लक्ष्मी को साथ नहीं ले जाते। पांचवें दिन मां लक्ष्मी उन्हें ढूंढते हुए गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं और शीघ्र लौटने का आग्रह करती हैं। इसी प्रसंग की स्मृति में हेरा पंचमी मनाई जाती है।
हेरा पंचमी पर रथ का हिस्सा क्यों तोड़ा जाता है?
मां लक्ष्मी के सेवक भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ का एक छोटा हिस्सा प्रतीकात्मक रूप से तोड़ते हैं। इसे देवी की नाराज़गी का प्रतीक माना जाता है, जिसके बाद वे हेरा गोहिरि साही मार्ग से श्रीमंदिर लौट जाती हैं।
‘हेरा’ शब्द का अर्थ क्या है?
‘हेरा’ का अर्थ है ‘देखना’ और ‘पंचमी’ का अर्थ है ‘पांचवां दिन’। अर्थात इस दिन मां लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ को देखने गुंडिचा मंदिर जाती हैं।
रथ यात्रा 2026 में भगवान जगन्नाथ श्रीमंदिर कब लौटेंगे?
बहुदा यात्रा (वापसी यात्रा) 24 जुलाई 2026, शुक्रवार को होगी, जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा गुंडिचा मंदिर से वापस श्रीमंदिर लौटेंगे।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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