RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

Ganesh Chaturthi 2026: घर में किस दिशा में रखें गणपति की मूर्ति? जानें स्थापना से विसर्जन तक के नियम

Ganesh Chaturthi 2026: घर में किस दिशा में रखें गणपति की मूर्ति? जानें स्थापना से विसर्जन तक के नियम

Ganesh Chaturthi 2026: घर में किस दिशा में रखें गणपति की मूर्ति? जानें स्थापना से विसर्जन तक के नियम
Visual Archive

Ganesh Chaturthi 2026: घर में किस दिशा में रखें गणपति की मूर्ति? जानें स्थापना से विसर्जन तक के नियम

गणेश चतुर्थी 2026 में 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी, और इस दिन घर में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित करते समय सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल यही होता है — गणपति की मूर्ति किस दिशा में रखें? वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर-पूर्व दिशा, यानी ईशान कोण, को इसके लिए सबसे शुभ माना गया है। इस लेख में आपको मूर्ति की सही दिशा और मुख की दिशा, स्थापना की पूरी विधि, पूजा सामग्री, दिल्ली और पुणे की पूजा मुहूर्त समय-सारणी, तथा 25 सितंबर को होने वाले गणपति विसर्जन तक की पूरी जानकारी मिलेगी।

🔑 मुख्य बातें

  • गणेश चतुर्थी 2026: 14 सितंबर, सोमवार
  • स्थापना मुहूर्त (नई दिल्ली): सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक
  • स्थापना मुहूर्त (पुणे): सुबह 11:16 बजे से दोपहर 1:44 बजे तक
  • मूर्ति की शुभ दिशा: उत्तर-पूर्व (ईशान कोण); विकल्प — उत्तर या पश्चिम
  • मूर्ति का मुख: घर के अंदर की ओर
  • मुख्य विसर्जन: 25 सितंबर, शुक्रवार (अनंत चतुर्दशी)
  • राष्ट्रीय बैंक अवकाश: नहीं — राज्य अनुसार स्थानीय अवकाश संभव

गणेश चतुर्थी 2026 कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार, 2026 में गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इसी दिन घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की जाती है। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह शुरू होकर 15 सितंबर तक रहती है, इसलिए स्थापना का शुभ मुहूर्त मध्याह्न काल में रखा जाता है।

गणेशोत्सव की अवधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग होती है। कुछ लोग डेढ़ दिन में विसर्जन कर देते हैं, तो कई परिवार तीन, पांच, सात या पूरे दस दिनों तक गणपति को घर में विराजमान रखते हैं। पारंपरिक दस दिवसीय गणेशोत्सव का मुख्य समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ होता है।

शहर अनुसार गणपति स्थापना मुहूर्त 2026

मध्याह्न पूजा मुहूर्त हर शहर में सूर्योदय और स्थानीय समय के हिसाब से थोड़ा बदलता है:

शहर मुहूर्त प्रारंभ मुहूर्त समाप्त
नई दिल्ली 11:02 AM 1:31 PM
पुणे 11:16 AM 1:44 PM

अपने शहर का सटीक मुहूर्त जानने के लिए स्थानीय पंचांग या द्रिक पंचांग की वेबसाइट देखना बेहतर रहता है, क्योंकि कुछ मिनटों का अंतर भी पड़ सकता है।

घर में गणपति की मूर्ति किस दिशा में रखें?

वास्तु शास्त्र से जुड़ी मान्यताओं में घर में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा, यानी ईशान कोण, को सबसे शुभ माना जाता है। ईशान कोण को पूजा और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए ऊर्जा की दृष्टि से महत्वपूर्ण दिशा माना जाता है — वास्तु में इसे जल और ईश्वर तत्व की दिशा कहा गया है, इसलिए पूजा स्थल अक्सर इसी कोण में बनाए जाते हैं।

अगर घर में ईशान कोण में जगह उपलब्ध न हो, तो उत्तर या पश्चिम दिशा में भी गणपति की मूर्ति स्थापित की जा सकती है। दक्षिण दिशा और घर के शौचालय या सीढ़ियों के नीचे का हिस्सा — इनसे बचने की सलाह दी जाती है।

व्यावहारिक उदाहरण: अगर घर का ईशान कोण किचन या बाथरूम से लगा है और वहां मूर्ति रखना संभव नहीं, तो लिविंग रूम की उत्तर दिशा वाली दीवार के पास एक साफ जगह चुनना व्यावहारिक विकल्प है — जब तक वहां रोज पूजा के लिए पहुंचना आसान हो।

दिशा स्थिति
उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) सबसे शुभ — प्राथमिक विकल्प
उत्तर वैकल्पिक
पश्चिम वैकल्पिक
दक्षिण उपयुक्त नहीं माना जाता

गणपति बप्पा का मुख किस दिशा में होना चाहिए?

मूर्ति की दिशा के अलावा उनके मुख की दिशा का भी ध्यान रखा जाता है। मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का मुख घर के अंदर की ओर होना चाहिए, ताकि पूजा करते समय भक्तों को भगवान का मुख साफ दिखाई दे। मूर्ति की पीठ घर के बाहर की ओर या दीवार की तरफ रखने की परंपरा है।

गणेश जी की मूर्ति जमीन पर क्यों नहीं रखनी चाहिए?

गणपति की प्रतिमा को सीधे जमीन पर रखने के बजाय किसी साफ चौकी या पाटे पर स्थापित करना उचित माना जाता है। चौकी पर रखी मूर्ति नमी और धूल से बची रहती है, और पूजा सामग्री व्यवस्थित तरीके से रखी जा सकती है। जिस स्थान पर स्थापना हो, वह साफ-सुथरा और शांत होना चाहिए।

कैसी गणपति प्रतिमा घर में लानी चाहिए?

घर में स्थापना के लिए परंपरागत रूप से मिट्टी से बनी प्रतिमा को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि गणेशोत्सव समाप्त होने के बाद ऐसी प्रतिमा आसानी से और स्वाभाविक रूप से विसर्जित हो जाती है। प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियां पानी में आसानी से नहीं घुलतीं और जल स्रोतों को प्रदूषित कर सकती हैं, इसलिए कई राज्यों में इन पर पाबंदी भी है।

गणपति स्थापना से पहले क्या करें?

सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। एक साफ चौकी रखें, उस पर स्वच्छ कपड़ा बिछाएं और फूलों से सजाएं। इसके बाद प्रतिमा को सम्मानपूर्वक चौकी पर स्थापित करें और ऊपर बताए गए मुहूर्त के अनुसार आह्वान व पूजा करें।

गणपति पूजा में क्या चढ़ाएं?

  • दूर्वा
  • फूल
  • मोदक
  • फल
  • नैवेद्य
  • चंदन
  • धूप और दीप

गणपति को मोदक विशेष रूप से प्रिय माना जाता है, इसलिए भक्त उन्हें मोदक का भोग जरूर लगाते हैं।

गणपति स्थापना के बाद रोज क्या करें?

गणपति जितने दिनों के लिए घर में विराजमान हों, उतने दिनों तक नियमित पूजा-अर्चना करने की परंपरा है। सुबह-शाम आरती के साथ भोग लगाया जाता है, और पूजा स्थल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है।

गणपति विसर्जन की विधि

विसर्जन के दिन सबसे पहले विधि-विधान से पूजा करें, भोग लगाएं और आरती करें। इसके बाद प्रतिमा को सम्मानपूर्वक उठाकर विसर्जन के लिए ले जाएं — विसर्जन से पहले भगवान से किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करने की परंपरा है। स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित सुरक्षित विसर्जन स्थल और नियमों का पालन करना भी जरूरी है।

गणपति विसर्जन के समय क्या ध्यान रखें?

पूजा सामग्री को नदी या तालाब में सीधे न डालकर, फूल और सजावटी सामग्री का अलग से उचित निपटान करना बेहतर है। जहां तक संभव हो, प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमा का इस्तेमाल करें ताकि विसर्जन के बाद पर्यावरण पर कम प्रभाव पड़े।

क्या गणेश चतुर्थी पर राष्ट्रीय बैंक अवकाश होता है?

गणेश चतुर्थी RBI की राष्ट्रीय अवकाश सूची में शामिल नहीं है, इसलिए यह देशभर में बैंक बंद होने वाला दिन नहीं है। महाराष्ट्र, गोवा जैसे राज्यों में स्थानीय/प्रतिबंधित अवकाश घोषित हो सकता है। स्कूल-दफ्तर बंद रहेंगे या नहीं, यह हर राज्य की अपनी अवकाश सूची पर निर्भर करता है।

दिशा के अलावा और क्या जरूरी है?

धार्मिक और वास्तु मान्यताओं में दिशा का महत्व बताया गया है, लेकिन पूजा का मूल आधार श्रद्धा और भक्ति है। घर में साफ और शांत स्थान चुनना, नियमित पूजा करना और स्वच्छता बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में नियमों में अंतर हो सकता है, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा को भी ध्यान में रखें।

गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है, और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले उनका स्मरण करने की परंपरा है। गणेश चतुर्थी उनके जन्मोत्सव का पर्व है। गणेशोत्सव केवल पूजा तक सीमित नहीं है — सार्वजनिक पंडालों की रौनक और मोहल्लों में इकट्ठा होने वाली भीड़ इसे परिवार और समाज को जोड़ने वाला सांस्कृतिक उत्सव भी बनाती है।

✅ व्यावहारिक सुझाव

  • स्थापना ईशान कोण में करें; जगह न हो तो उत्तर या पश्चिम चुनें
  • मूर्ति सीधे जमीन पर नहीं, साफ चौकी पर रखें
  • मुख घर के अंदर की तरफ रखें
  • मिट्टी या प्राकृतिक सामग्री से बनी मूर्ति चुनें, POP से बचें
  • अपने शहर का सटीक मुहूर्त पूजा से एक दिन पहले दोबारा जांच लें
  • विसर्जन से पहले अपने राज्य की अवकाश सूची और तय विसर्जन स्थल की जानकारी ले लें

निष्कर्ष

गणेश चतुर्थी 2026 में 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। मूर्ति स्थापित करते समय वास्तु मान्यता के अनुसार ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) सबसे शुभ है, विकल्प के रूप में उत्तर या पश्चिम दिशा भी ली जा सकती है। मूर्ति साफ चौकी पर, मुख घर के अंदर की ओर रखते हुए स्थापित करें। मुख्य विसर्जन 25 सितंबर, अनंत चतुर्दशी को है।

गणपति बप्पा मोरया!

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. गणेश चतुर्थी 2026 कब है?

गणेश चतुर्थी 2026 में 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। इसी दिन घरों में गणपति की स्थापना की जाती है।

2. घर में गणपति की मूर्ति किस दिशा में रखें?

वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) सबसे शुभ मानी जाती है। जगह न होने पर उत्तर या पश्चिम दिशा में भी मूर्ति रखी जा सकती है।

3. गणपति बप्पा का मुख किस दिशा में होना चाहिए?

मान्यता के अनुसार मूर्ति का मुख घर के अंदर की ओर होना चाहिए, ताकि पूजा करते समय भगवान का मुख भक्तों को दिखाई दे।

4. गणेश चतुर्थी 2026 में विसर्जन कब है?

पारंपरिक दस दिवसीय गणेशोत्सव का मुख्य विसर्जन 25 सितंबर, अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। परिवार अपनी परंपरा के अनुसार डेढ़, तीन, पांच या सात दिन बाद भी विसर्जन कर सकते हैं।

5. क्या गणेश चतुर्थी 2026 में बैंक अवकाश रहेगा?

गणेश चतुर्थी राष्ट्रीय स्तर पर गजटेड बैंक अवकाश नहीं है, लेकिन महाराष्ट्र और गोवा जैसे राज्यों में स्थानीय/प्रतिबंधित अवकाश घोषित किया जा सकता है।

6. गणपति की मूर्ति जमीन पर क्यों नहीं रखनी चाहिए?

प्रतिमा को साफ चौकी या पाटे पर रखना धार्मिक मान्यता के साथ-साथ स्वच्छता की दृष्टि से भी उचित माना जाता है।

7. दिल्ली और पुणे में गणपति स्थापना मुहूर्त का समय अलग क्यों है?

मध्याह्न पूजा मुहूर्त सूर्योदय और स्थानीय समय पर निर्भर करता है, इसलिए हर शहर का सटीक समय कुछ मिनट आगे-पीछे होता है।


Religion World

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

September 9, 2026 • 8 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

Ganpati Visarjan 2026: 25 सितंबर को बप्पा को कब दें विदाई? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Ganpati Visarjan 2026: 25 सितंबर को बप्पा को कब दें विदाई? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि Ganpati Visarjan 2026: गणपति बप्पा की भक्ति और उत्सव के बाद…

Read now
Hinduism

Ganpati Visarjan 2026: 25 सितंबर को बप्पा को कब दें विदाई? जानें सुबह से रात तक के शुभ मुहूर्त

Ganpati Visarjan 2026: 10 दिनों तक गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना के बाद अब उन्हें विदाई देने का समय आ गया है। गणेश उत्सव का मुख्य समापन अनंत चतुर्दशी…

Read now
Hinduism

Ganesh Chaturthi 2026: 10 दिन बप्पा को लगाएं अलग-अलग भोग, जानें किस दिन क्या चढ़ाएं

गणेश चतुर्थी 2026: 10 दिन बप्पा को लगाएं अलग-अलग भोग, जानें किस दिन क्या चढ़ाएं गणेश चतुर्थी का पर्व शुरू होते ही घर-घर में गणपति बप्पा की पूजा…

Read now