हरतालिका तीज 2026 में सोमवार, 14 सितंबर को मनाई जाएगी, और इस साल यह तारीख खास है क्योंकि इसी दिन गणेश चतुर्थी का पर्व भी पड़ रहा है। हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम और तपस्या से जुड़ा व्रत है, जिसे परंपरागत रूप से सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। लेकिन एक सवाल बार-बार पूछा जाता है – क्या कुंवारी लड़कियां भी हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं? धार्मिक मान्यता के अनुसार जवाब हां है। इस लेख में आपको तारीख, मुहूर्त, छुट्टी की स्थिति, पूजा विधि, नियम और जरूरी सवालों के जवाब – सब एक जगह मिलेंगे।
मुख्य बातें (Key Takeaways)
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- हरतालिका तीज 2026: 14 सितंबर, सोमवार
- इसी दिन गणेश चतुर्थी भी मनाई जाएगी – दोहरा शुभ संयोग
- शिव पुराण की कथा के आधार पर कुंवारी कन्याएं भी व्रत रख सकती हैं
- निर्जला व्रत कुंवारी कन्याओं के लिए अनिवार्य नहीं – स्वास्थ्य के अनुसार विकल्प चुना जा सकता है
- छत्तीसगढ़ में शासकीय अवकाश; बिहार व उत्तर प्रदेश में स्कूलों में छुट्टी
हरतालिका तीज 2026 कब है?
साल 2026 में हरतालिका तीज का व्रत सोमवार, 14 सितंबर को रखा जाएगा।
पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर सुबह करीब 7:08 बजे शुरू होगी और 14 सितंबर सुबह करीब 7:06 बजे समाप्त होगी। चूंकि हिंदू पर्वों में उदया तिथि को प्राथमिकता दी जाती है, इसलिए व्रत 14 सितंबर को ही रखा जाएगा।
पूजा मुहूर्त (संकेतात्मक):
- प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह करीब 6:05-7:06 बजे तक
- प्रदोष काल पूजा: शाम 6:27 बजे के बाद
पूजा के समय में शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि जरूर करें।
2026 का खास संयोग: इस साल हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ रहे हैं। कई शहरों में सुबह तीज की पूजा और शाम को गणपति स्थापना – दोनों एक साथ देखने को मिलेंगी, जो सामान्यतः हर साल नहीं होता।
क्या हरतालिका तीज सरकारी या स्कूल की छुट्टी है?
हरतालिका तीज पूरे देश में एक जैसी सार्वजनिक/बैंक छुट्टी नहीं है – यह राज्य-दर-राज्य अलग है।
- छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने 14 सितंबर को शासकीय कार्यालयों व शिक्षण संस्थानों में अवकाश घोषित किया है।
- बिहार के स्कूलों में भी 14 सितंबर को हरतालिका तीज की छुट्टी है।
- उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में यह अवकाश खासतौर पर महिला अध्यापिकाओं और बालिकाओं के लिए है।
- राष्ट्रीय स्तर पर RBI की बैंक अवकाश सूची में यह सामान्यतः शामिल नहीं होता।
अपने राज्य की सटीक स्थिति जानने के लिए स्थानीय शिक्षा विभाग या राज्य सरकार की अवकाश सूची जरूर देखें।
क्या कुंवारी लड़कियां हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं?
जी हां – धार्मिक मान्यता के अनुसार कुंवारी कन्याएं भी हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं।
शिव पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए वर्षों कठोर तपस्या की थी। उसी मान्यता को आधार बनाकर अविवाहित लड़कियां भी योग्य और मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत करती हैं। यहां फर्क सिर्फ उद्देश्य का है – सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं भविष्य के जीवनसाथी की कामना से। पूजा-विधि और भावना का मूल ढांचा दोनों के लिए एक जैसा ही रहता है।
क्या कुंवारी लड़कियों के लिए निर्जला व्रत जरूरी है?
हरतालिका तीज परंपरागत रूप से निर्जला व्रत माना जाता है – यानी अन्न और जल दोनों का त्याग। लेकिन कुंवारी कन्याओं के लिए यह सख्ती अनिवार्य नहीं बताई जाती।
अगर स्वास्थ्य अनुकूल हो तो निर्जला व्रत रखा जा सकता है। कमजोरी, लो ब्लड प्रेशर या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में फलाहार या जल ग्रहण करके व्रत रखना ज्यादा उचित माना जाता है। गंभीर स्वास्थ्य स्थिति में उपवास से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
हरतालिका तीज की पौराणिक कथा
शिव पुराण की कथा के अनुसार माता पार्वती भगवान शिव को ही अपना पति बनाना चाहती थीं, लेकिन उनके पिता हिमालयराज इस विवाह को लेकर सहमत नहीं थे। कथा के अनुसार पार्वती की सखियां उन्हें एक घने वन में ले गईं ताकि उनका विवाह किसी और के साथ न हो सके। वहां माता पार्वती ने बालू और रेत से शिवलिंग बनाकर वर्षों तक कठोर तपस्या की।
पार्वती की भक्ति और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसी घटना की स्मृति में हरतालिका तीज मनाई जाती है। “हरतालिका” शब्द भी इसी कथा से जुड़ा है – “हरत” का अर्थ हरण करने से और “आलिका” का अर्थ सखी से जोड़ा जाता है।
इस कथा का व्यावहारिक संदेश यह है कि दृढ़ संकल्प और धैर्य के साथ किया गया प्रयास फल जरूर देता है।
कुंवारी लड़कियां हरतालिका तीज की पूजा कैसे करें?
- संकल्प लें – सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और शिव-पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- मूर्ति स्थापना – साफ चौकी पर बालू या मिट्टी से बनी शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
- पूजन सामग्री अर्पित करें – फूल, फल, मिठाई, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य चढ़ाएं।
- कथा सुनें/पढ़ें – हरतालिका व्रत कथा सुनकर पूजा पूर्ण करें।
- प्रार्थना करें – योग्य जीवनसाथी की कामना के साथ आशीर्वाद मांगें।
- पारण करें – अगले दिन पूजा-अर्चना के बाद विधिपूर्वक व्रत का पारण करें।
क्या कुंवारी लड़कियां माता पार्वती को सुहाग सामग्री चढ़ा सकती हैं?
हां, परंपरा में कुंवारी कन्याएं भी माता पार्वती को सिंदूर, चूड़ी और श्रृंगार की अन्य सामग्री अर्पित कर सकती हैं। इसका उद्देश्य माता पार्वती के सुहाग व सौभाग्य रूप के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना है।
सुहागिन महिलाएं बनाम कुंवारी कन्याएं – क्या फर्क है?
| पहलू | सुहागिन महिलाएं | कुंवारी कन्याएं |
|---|---|---|
| व्रत का उद्देश्य | पति की लंबी उम्र व सुखी वैवाहिक जीवन | योग्य व मनचाहा जीवनसाथी |
| निर्जला व्रत | परंपरागत रूप से अपेक्षित | अनिवार्य नहीं, स्वास्थ्यानुसार विकल्प |
| पूजा विधि | शिव-पार्वती पूजन, कथा, पारण | शिव-पार्वती पूजन, कथा, पारण |
| सुहाग सामग्री | स्वयं धारण व अर्पण | केवल अर्पण (धारण नहीं) |
हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती की पूजा कैसे करें?
स्वास्थ्य से जुड़ी सावधानियां
- गर्भवती महिलाएं, गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोग या नाबालिग लड़कियां निर्जला व्रत से बचें
- फलाहार में पानी की कमी न होने दें
- चक्कर, कमजोरी या बेचैनी महसूस होने पर तुरंत व्रत तोड़ें और चिकित्सकीय सलाह लें
- आस्था के साथ स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना ही सही तरीका है
निष्कर्ष
हरतालिका तीज 2026 में 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी – और इस बार गणेश चतुर्थी के साथ पड़ने से यह दिन और भी खास बन गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कुंवारी कन्याएं भी यह व्रत रख सकती हैं, और उनके लिए निर्जला व्रत अनिवार्य नहीं है। श्रद्धा, संकल्प और स्वास्थ्य का संतुलन बनाकर रखा गया यह व्रत ही अपने वास्तविक अर्थ को पूरा करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. हरतालिका तीज 2026 में किस दिन है?
2. क्या कुंवारी लड़कियां हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं?
3. क्या कुंवारी कन्याओं के लिए निर्जला व्रत रखना अनिवार्य है?
4. क्या हरतालिका तीज पर सभी जगह सरकारी छुट्टी होती है?
5. कुंवारी लड़कियां माता पार्वती को क्या अर्पित कर सकती हैं?
6. 2026 में हरतालिका तीज खास क्यों मानी जा रही है?
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
Reviewed by Bhavya Srivasava on September 9, 2026.
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