गीता का सबसे बड़ा संदेश है त्याग : डॉ. प्रणव पण्ड्या
हरिद्वार, 31 अक्टूबर। गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि गीता का सबसे बड़ा संदेश त्याग है। गीता वासना, अहंकार व आसक्तियों का त्याग करना सिखाती है। गीता उपनिषदों का सार है।
वे शांतिकुंज के रामकृष्ण हॉल में आयोजित अंतेःवासी कार्यकर्त्ताओं की एक विशेष गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन के मन में उपजी आसक्तियों के त्याग की सीख के साथ उन्हें कर्त्तव्य परायणता का जो पाठ पढ़ाया, उसी तरह आज भी पूर्वाग्रहों व आसक्तियों को त्याग कर समाज हित में कर्त्तव्य परायणता को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कभी भी मन असमंजस में आ जाये, तो गीता का स्वाध्याय कर उससे उबरा जा सकता है। गीता में सभी तरह की समस्याओं के समाधान हैं। आज आवश्यकता है कि गीता का समुचित अध्ययन के साथ उसके मर्म को समझा जाए।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जिस तरह द्वापर युग में अर्जुन सहित पाण्डवों को प्रेरित किया है, उसी तरह पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने करोड़ों लोगों के जीवन में सकरात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करते रहे। इस अवसर पर श्री शिवप्रसाद मिश्र, श्री केसरी कपिल, श्री कालीचरण शर्मा, डॉ. ओपी शर्मा सहित शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्त्ता व अंतेःवासी भाई-बहिन उपस्थित रहे।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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