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अधिक मास शिवरात्रि 2026: कब है मासिक शिवरात्रि, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस बार का विशेष महत्व

अधिक मास शिवरात्रि 2026: कब है मासिक शिवरात्रि, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस बार का विशेष महत्व

अधिक मास शिवरात्रि 2026: कब है मासिक शिवरात्रि, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस बार का विशेष महत्व
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अधिक मास शिवरात्रि 2026: कब है मासिक शिवरात्रि, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस बार का विशेष महत्व

सनातन धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव की आराधना के लिए मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। वर्ष 2026 में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के दौरान पड़ने वाली शिवरात्रि को बेहद शुभ माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में अधिक मास शिवरात्रि भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर मानी जा रही है।

अधिक मास शिवरात्रि 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार अधिक ज्येष्ठ मास की मासिक शिवरात्रि 13 जून 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। यह व्रत कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर रखा जाएगा और इस दिन भक्त दिनभर उपवास रखकर रात्रि में भगवान शिव की विशेष पूजा करेंगे।

क्यों खास है 2026 की अधिक मास शिवरात्रि?

ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से वर्ष 2026 की अधिक मास शिवरात्रि कई कारणों से विशेष मानी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लगभग 27 वर्षों बाद ज्येष्ठ अधिक मास में आने वाली यह शिवरात्रि शुभ संयोग लेकर आ रही है। इस दौरान गौरी योग का निर्माण भी बताया जा रहा है, जिसे शिव-पार्वती की कृपा प्राप्ति के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।

अधिक मास स्वयं में आध्यात्मिक साधना, उपवास, मंत्र जाप और आत्मचिंतन का महीना माना जाता है। इसलिए इस माह में पड़ने वाली शिवरात्रि का महत्व सामान्य मासिक शिवरात्रि से अधिक माना जाता है।

अधिक मास का धार्मिक महत्व

अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है और हिंदू पंचांग में चंद्र तथा सौर गणना के अंतर को संतुलित करने के लिए जोड़ा जाता है। शास्त्रों में इसे भगवान विष्णु को समर्पित महीना बताया गया है, लेकिन इस दौरान शिव, विष्णु और अन्य देवी-देवताओं की उपासना का भी विशेष फल प्राप्त होता है।

मान्यता है कि इस महीने में किए गए धार्मिक कार्य, दान-पुण्य और व्रत साधारण दिनों की तुलना में अधिक पुण्य प्रदान करते हैं।

अधिक मास शिवरात्रि पूजा विधि

इस दिन प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लें और भगवान शिव का ध्यान करें।

पूजा के दौरान:

  • शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक करें।
  • दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद पुष्प अर्पित करें।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
  • महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
  • शिव चालीसा और शिव आरती करें।
  • रात्रि जागरण कर शिव नाम का स्मरण करें।

शिवरात्रि व्रत के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास शिवरात्रि का व्रत रखने से:

  • भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
  • वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
  • मानसिक तनाव और नकारात्मकता कम होती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

इस दिन क्या करें?

  • शिव मंदिर में दर्शन करें।
  • रुद्राभिषेक कराएं।
  • गरीबों को अन्न और वस्त्र दान दें।
  • शिव मंत्रों का अधिक से अधिक जाप करें।
  • सात्विक भोजन और संयम का पालन करें।

क्या नहीं करना चाहिए?

  • क्रोध और विवाद से बचें।
  • मांसाहार और नशे का सेवन न करें।
  • किसी का अपमान न करें।
  • नकारात्मक विचारों को मन में स्थान न दें।

निष्कर्ष

13 जून 2026 को पड़ने वाली अधिक मास शिवरात्रि भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जा रही है। अधिक मास, गौरी योग और मासिक शिवरात्रि का यह दुर्लभ संयोग भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ प्रदान करने वाला माना जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया व्रत तथा शिव आराधना जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग खोल सकती है।

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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June 6, 2026 3 min read
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