इस्लाम धर्म में आब-ए-जमजम को बेहद पवित्र और मुकद्दस पानी माना जाता है। जिस तरह हिंदू धर्म में गंगाजल का विशेष महत्व है, उसी तरह मुसलमानों के लिए जमजम का पानी अल्लाह की रहमत और चमत्कार का प्रतीक माना जाता है। हर साल लाखों हज और उमराह यात्री मक्का में स्थित जमजम के कुएं का पानी पीते हैं और इसे अपने साथ घर भी लेकर आते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यह पानी बरकत, शिफा और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।
क्या है आब-ए-जमजम?
आब-ए-जमजम मक्का स्थित मस्जिद-अल-हरम में काबा शरीफ के पास मौजूद एक पवित्र कुएं का पानी है। “आब” का मतलब पानी होता है और “जमजम” का अर्थ रुक-रुक कर बहना माना जाता है। इस कुएं को इस्लाम में अल्लाह का खास तोहफा माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पानी लगभग चार हजार वर्षों से लगातार बह रहा है और आज भी लाखों लोगों की प्यास बुझा रहा है।
आब-ए-जमजम की पवित्र कहानी
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम अल्लाह के हुक्म पर अपनी पत्नी हजरत हाजरा और छोटे बेटे हजरत इस्माइल को मक्का के सूखे रेगिस्तान में छोड़ गए थे। कुछ समय बाद जब पानी खत्म हो गया तो हाजरा अपने बेटे के लिए पानी की तलाश में सफा और मरवा पहाड़ियों के बीच सात बार दौड़ीं।
तभी अल्लाह के फरिश्ते जिब्रील अलैहिस्सलाम प्रकट हुए और जमीन से पानी का चश्मा फूट पड़ा। कहा जाता है कि हाजरा ने पानी को बहने से रोकने के लिए “जम-जम” यानी “रुको-रुको” कहा था। तभी से इस पवित्र जल को जमजम कहा जाने लगा।
हज यात्रा में जमजम का महत्व
हज और उमराह करने वाले मुसलमानों के लिए जमजम का पानी बेहद खास माना जाता है। मक्का पहुंचने वाले श्रद्धालु इस पानी को पीते हैं और अपने परिवार के लिए भी साथ लेकर आते हैं। हज की सई की रस्म, जिसमें सफा और मरवा के बीच चला जाता है, हाजरा की उसी संघर्ष यात्रा की याद दिलाती है।
इस्लाम में जमजम पानी का महत्व
इस्लामिक परंपराओं में जमजम के पानी को बरकत वाला और शिफा देने वाला माना गया है। कई हदीसों में इसका उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि सच्चे दिल से दुआ करके जमजम का पानी पीने से अल्लाह रहमत बरसाते हैं।
मुस्लिम समुदाय में यह भी मान्यता है कि यह पानी:
- आध्यात्मिक शांति देता है
- बीमारी से राहत के लिए दुआ के साथ पिया जाता है
- बरकत और नेकी का प्रतीक माना जाता है
- हज यात्रा की सबसे पवित्र निशानियों में से एक है
जमजम पानी की खासियत
धार्मिक मान्यता के अनुसार जमजम का पानी कभी सूखता नहीं है। आधुनिक समय में भी इसके स्रोत की लगातार निगरानी की जाती है और इसे सुरक्षित रखा जाता है। लाखों श्रद्धालुओं द्वारा उपयोग किए जाने के बावजूद यह कुआं आज भी सक्रिय है।
निष्कर्ष
आब-ए-जमजम केवल पानी नहीं, बल्कि इस्लाम में आस्था, सब्र और अल्लाह की रहमत का प्रतीक माना जाता है। हजरत हाजरा की संघर्ष और विश्वास की कहानी आज भी करोड़ों मुसलमानों को प्रेरित करती है। हज यात्रा के दौरान जमजम का पानी श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव और पवित्रता का अहम हिस्सा बन जाता है।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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