RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

जगन्नाथ बहुदा यात्रा 2026: जब भगवान जगन्नाथ लौटते हैं अपने धाम, जानिए वापसी यात्रा की पूरी परंपरा और धार्मिक महत्व

जगन्नाथ बहुदा यात्रा 2026: जब भगवान जगन्नाथ लौटते हैं अपने धाम, जानिए वापसी यात्रा की पूरी परंपरा और धार्मिक महत्व

जगन्नाथ बहुदा यात्रा 2026: जब भगवान जगन्नाथ लौटते हैं अपने धाम, जानिए वापसी यात्रा की पूरी परंपरा और धार्मिक महत्व
Visual Archive

जगन्नाथ बहुदा यात्रा 2026: जब भगवान जगन्नाथ लौटते हैं अपने धाम, जानिए वापसी यात्रा की पूरी परंपरा और धार्मिक महत्व

पुरी की विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण चरण बहुदा यात्रा (Bahuda Yatra) माना जाता है। यह वह पावन अवसर होता है जब भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा, गुंडिचा मंदिर में सात दिन प्रवास करने के बाद पुनः श्रीजगन्नाथ मंदिर लौटते हैं। वर्ष 2026 में बहुदा यात्रा 24 जुलाई को मनाई जाएगी।

क्या होती है बहुदा यात्रा?

‘बहुदा’ का अर्थ है वापसी। रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा तीन भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर जाते हैं। वहां सात दिन प्रवास करने के बाद वे उसी मार्ग से अपने मूल धाम लौटते हैं। इस वापसी यात्रा को बहुदा यात्रा कहा जाता है।

बहुदा यात्रा की प्रमुख परंपराएं

पाहंडी विजय

बहुदा यात्रा की शुरुआत पाहंडी अनुष्ठान से होती है। सेवायत भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को विशेष शैली में झूमते हुए गुंडिचा मंदिर से बाहर लाते हैं और उनके-अपने रथों पर विराजमान कराते हैं। यह दृश्य लाखों श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक और दिव्य माना जाता है।

मौसी मां मंदिर में विशेष भोग

वापसी यात्रा के दौरान तीनों रथ मौसी मां मंदिर के सामने रुकते हैं। यहां भगवान जगन्नाथ को उनका प्रिय पोड़ा पीठा (एक पारंपरिक ओड़िया व्यंजन) अर्पित किया जाता है। यह बहुदा यात्रा की सबसे प्रसिद्ध परंपराओं में से एक है।

भक्तों द्वारा रथ खींचना

बहुदा यात्रा में हजारों श्रद्धालु भगवान के रथों को रस्सियों से खींचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा से रथ खींचने वाले भक्तों को भगवान जगन्नाथ का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

बहुदा यात्रा के बाद कौन-कौन से उत्सव होते हैं?

बहुदा यात्रा के बाद जगन्नाथ महोत्सव के कई महत्वपूर्ण अनुष्ठान संपन्न होते हैं—

  • सुना बेशा – भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत किया जाता है।
  • अधर पाना – देवताओं को विशेष पेय अर्पित किया जाता है।
  • नीलाद्रि बीजे – भगवान जगन्नाथ पुनः श्रीमंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते हैं। इसी दिन मां लक्ष्मी और भगवान जगन्नाथ के मिलन की प्रसिद्ध परंपरा भी निभाई जाती है।

बहुदा यात्रा का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, बहुदा यात्रा केवल भगवान की वापसी नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती है कि ईश्वर अपने भक्तों के बीच आकर पुनः अपने धाम लौटते हैं और सभी पर समान रूप से कृपा बरसाते हैं।

यह यात्रा भक्त और भगवान के बीच प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक मानी जाती है।

2026 में विशेष तैयारियां

ओडिशा सरकार और प्रशासन ने 2026 की बहुदा यात्रा के लिए व्यापक सुरक्षा, स्वास्थ्य, सफाई और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की है। इस वर्ष लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है।

निष्कर्ष

जगन्नाथ बहुदा यात्रा केवल रथों की वापसी नहीं, बल्कि श्रद्धा, संस्कृति और सनातन परंपरा का भव्य उत्सव है। भगवान जगन्नाथ का अपने धाम लौटना भक्तों के लिए आनंद, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस दिव्य यात्रा के साक्षी बनने के लिए पुरी पहुंचते हैं।

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

July 24, 2026 3 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

कलियुग खत्म होने में कितना समय बाकी है? जानिए शास्त्रों में भगवान कल्कि अवतार को लेकर क्या कहा गया है

हिंदू धर्म में समय को चार युगों—सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग—में विभाजित किया गया है। वर्तमान समय को कलियुग माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में यह भी वर्णित…

Read now
Hinduism

हिमाचल के इस गांव की अनोखी परंपरा: सावन में महिलाएं 5 दिनों तक एकांतवास क्यों करती हैं?

भारत विविध संस्कृतियों, परंपराओं और लोक आस्थाओं का देश है। यहां हर क्षेत्र की अपनी अलग पहचान है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की पार्वती घाटी में स्थित…

Read now
Hinduism

कांवड़ यात्रा की शुरुआत सबसे पहले किसने की थी? जानिए भगवान परशुराम से जुड़ी पौराणिक मान्यता

सावन का महीना आते ही देशभर में भगवान शिव की भक्ति का अनूठा उत्साह देखने को मिलता है। लाखों शिवभक्त पवित्र नदियों से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते…

Read now