RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

गणगौर पूजा – जानिए गणगौर व्रत कथा व पूजा विधि

गणगौर पूजा – जानिए गणगौर व्रत कथा व पूजा विधि

गणगौर पूजा – जानिए गणगौर व्रत कथा व पूजा विधि
Visual Archive

गणगौर पूजा – जानिए गणगौर व्रत कथा व पूजा विधि

गणगौर पूजा – जानिए गणगौर व्रत कथा व पूजा विधि

गणगौर मुख्यत: राजस्थान में मनाया जाने वाला पर्व है। जिसे हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाते हैं। यह पर्व विशेष रूप से महिलाएं मनाती हैं। इसमें गुप्त रूप से यानि पति को बताये बिना ही विवाहित स्त्रियां उपवास रखती हैं।

गणगौर [ गौरी पूजा ] सोभाग्यवती स्त्रियों और कन्याओ का प्रमुख त्यौहार हैं | राजस्थान में कन्याये पुरे सौलह दिन गणगौर पूजन कर माँ पार्वती को प्रसन्न करती हैं | जिन कन्याओं का विवाह होता हैं उन्हें भी प्रथम वर्ष सौलह दिन गणगौर पूजन अत्यंत आवश्यक माना गया हैं।अखंड सौभाग्य, उत्तम गुणवान पति एवं एश्वर्य तथा भगवान शिव और माँ पार्वती के आशीर्वाद प्राप्ति के लिए ईश्वर – गणगौर की बड़े उत्साह व उल्लास एवं समारोह के रूप में मनाया जाने वाला त्यौहार हैं।

अविवाहित कन्याएं भी मनोवांछित वर पाने के लिये गणगौर पूजा करती हैं। हालांकि गणगौर का पर्व चैत्र मास की कृष्ण तृतीया से ही आरंभ हो जाता है लेकिन इस पर्व की मुख्य पूजा चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को ही की जाती है।

जानिए 2018 में कब है गणगौर पूजा ?

गणगौर पूजा चैत्र मास की शुक्ल तृतीया को की जाती है। अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार इस वर्ष यह तिथि 20 मार्च 2018  को है।

गणगौर की पौराणिक कथा

एक बार की बात है कि भगवान शिव शंकर और माता पार्वती भ्रमण के लिये निकल पड़े, उनके साथ में नारद मुनि भी थे। चलते-चलते एक गांव में पंहुच गये उनके आने की खबर पाकर सभी उनकी आवभगत की तैयारियों में जुट गये। कुलीन घरों से स्वादिष्ट भोजन पकने की खुशबू गांव से आने लगी। लेकिन कुलीन स्त्रियां स्वादिष्ट भोजन लेकर पंहुचती उससे पहले ही गरीब परिवारों की महिलाएं अपने श्रद्धा सुमन लेकर अर्पित करने पंहुच गयी। माता पार्वती ने उनकी श्रद्धा व भक्ति को देखते हुए सुहाग रस उन पर छिड़क दिया। जब उच्च घरों स्त्रियां तरह-तरह के मिष्ठान, पकवान लेकर हाज़िर हुई तो माता के पास उन्हें देने के लिये कुछ नहीं बचा तब भगवान शंकर ने पार्वती जी कहा, अपना सारा आशीर्वाद तो उन गरीब स्त्रियों को दे दिया अब इन्हें आप क्या देंगी? माता ने कहा इनमें से जो भी सच्ची श्रद्धा लेकर यहां आयी है उस पर ही इस विशेष सुहागरस के छींटे पड़ेंगे और वह सौभाग्यशालिनी होगी। तब माता पार्वती ने अपने रक्त के छींटे बिखेरे जो उचित पात्रों पर पड़े और वे धन्य हो गई। लोभ-लालच और अपने ऐश्वर्य का प्रदर्शन करने पंहुची महिलाओं को निराश लौटना पड़ा। मान्यता है कि यह दिन चैत्र मास की शुक्ल तृतीया का दिन था तब से लेकर आज तक स्त्रियां इस दिन गण यानि की भगवान शिव और गौर यानि की माता पार्वती की पूजा करती हैं।

जानिए गणगौर उपवास पति से गुप्त क्यों रखा जाता है? 

इसी कहानी में आगे का वर्णन उपरोक्त प्रश्न का उत्तर देता है। हुआ यूं कि जब माता पार्वती से आशीर्वाद पाकर महिलाएं घरों को लौट गई तो माता पार्वती ने भी भगवान शिव से इज़ाजत लेकर पास ही स्थित एक नदी के तट पर स्नान किया और बालू से महादेव की मूर्ति स्थापित कर उनका पूजन किया। पूजा के पश्चात बालू के पकवान बनाकर ही भगवान शिव को भोग लगाया। तत्पश्चात प्रदक्षिणा कर तट की मिट्टी का टीका मस्तक पर लगाया और बालू के दो कणों को प्रसाद रूप में ग्रहण कर भगवान शिव के पास वापस लौट आईं। अब शिव तो सर्वज्ञ हैं जानते तो वे सब थे पर माता पार्वती को छेड़ने के लिये पूछ लिया कि बहुत देर लगा दी आने में? माता ने जवाब देते हुए कहा कि मायके वाले मिल गये थे उन्हीं के यहां इतनी देर लग गई। तब और छेड़ते हुए कहा कि आपके पास तो कुछ था भी नहीं स्नान के पश्चात प्रसाद में क्या लिया? माता ने कहा कि भाई व भावज ने दूध-भात बना रखा था उसे ग्रहण कर सीधी आपके पास आई हूं। अब भगवान शिव ने कहा कि चलो फिर उन्हीं के यहां चलते हैं आपका तो हो गया लेकिन मेरा भी मन कर गया है कि आपके भाई भावज के यहां बने दूध-भात का स्वाद चख सकूं। माता ने मन ही मन भगवान शिव को याद किया और अपनी लाज रखने की कही। नारद सहित तीनों नदी तट की तरफ चल दिये। वहां पहुंच क्या देखते हैं कि एक आलीशान महल बना हुआ है। वहां उनकी बड़ी आवभगत होती है। इसके बाद जब वहां से प्रस्थान किया तो कुछ दूर जाकर ही भगवान शिव बोले कि मैं अपनी माला आपके मायके में भूल आया हूं। माता कहने लगी ठीक है मैं अभी ले आती हूं तब भगवान शिव बोले आप रहने दें नारद जी ले आयेंगें। अब नारद जी चल दिये उस स्थान पर पंहुचे तो हैरान रह गये चारों और बीयाबान दिखाई दे महल का नामों निशान तक नहीं फिर एक पेड़ पर उन्हें भगवान शिव की रूद्राक्ष की माला दिखाई दी उसे लेकर वे लौट आये आकर प्रभु को यह विचित्र वर्णन कह सुनाया तब भगवान शिव ने बताया कि यह सारी पार्वती की माया थी। वे अपने पूजन को गुप्त रखना चाहती थी इसलिये उन्होंने झूठ बोला और अपने सत के बल पर यह माया रच भी दी। यही दिखाने के लिये मैनें तुम्हें वापस भेजा था। तब नारद ने माता के सामने नतमस्तक होकर कहा कि हे मां आप सर्वश्रेष्ठ हैं, सौभाग्यवती आदिशक्ति हैं। गुप्त रूप से की गई पूजा ही अधिक शक्तिशाली एवं सार्थक होती है। हे मां मेरा आशीर्वचन है कि जो स्त्रियां इसी तरह गुप्त रूप से पूजन कर मंगल कामना करेंगी महादेव की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

तभी से लेकर गणगौर के इस गोपनीय पूजन की परंपरा चली आ रही है।

यह हैं गणगौर व्रत व पूजा विधि

गणगौर की कहानी तो आप जान ही चुकें हैं और यह भी कि सबसे पहले तो मन में सच्ची श्रद्धा होनी चाहिये। इस पर्व के ईष्ट महादेव व पार्वती हैं। जो पूजा व उपवास करने पर सौभाग्य का वरदान देते हैं। सुहागिनें इस दिन दोपहर तक व्रत रखती हैं व कथा सुनती हैं, नाचते गाते खुशी से पूजा-पाठ कर इस पर्व को मनाती हैं।

इस पर्व के लिये चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी यानि की पापमोचिनी एकादशी को प्रात: स्नानादि कर गीले वस्त्रों में ही रहते हुए घर में किसी पवित्र स्थान पर लकड़ी की टोकरी में जवारे को बोयें। एकादशी से लेकर चैत्र शुक्ल तृतीया तक व्रती एक समय भोजन करे। जवारों की भगवान शिव यानि ईसर एवं माता पार्वती यानि गौर के रूप में पूजा करनी चाहिये। जब तक इनका विसृजन नहीं होता तब तक प्रतिदिन विधिवत पूजा करनी चाहिये। सुहाग की निशानियों का पूजन कर गौरी जी अर्पित करें। कथा श्रवण के पश्चात माता पार्वती यानि गौरी जी पर अर्पित किये सिंदूर से अपनी मांग भरनी चाहिये। अविवाहित कन्यें गौरी जी को प्रणाम कर आशीर्वाद प्राप्त करें। चैत्र शुक्ल द्वितीया को किसी पवित्र तीर्थ स्थल या नजदीकी सरोवर में गौरीजी को स्नान करवायें। तृतीया को उन्हें सजा-धजा कर पालने में बैठाकर नाचते गाते शोभायात्रा निकालते हुए विसर्जित करें। उपवास भी इसके पश्चात ही छोड़ा जाता है।

मान्यता है कि गौरीजी स्थापना जहां होती है वह उनका मायका होता है और जहां विसर्जन किया जाता है वह ससुराल।

गणगौर के पावन पर्व पर आप सबको माता पार्वती व महादेव की कृपा मिले।

यह हैं गणगौर पूजन के गीत

प्रार्थना

गौरि ए गणगौरी माता ! खोल किवाड़ी ‘

बाहर    उबी    थारी   पुजनवाली |

पूजो ए पूजाओ बाई , काई  – काई  ! मांगों ?

अन्न मांगों , धन मांगों , लाछ मांगों ,  लछमी ||

जलहर  जामी बाबल माँगा रातादेई माई |

कान कुंवर सो बीरों माँगा राई सी भोजाई

ऊंट चढ्यो बहणेंई माँगा चुडला वाली बहणल ||

गणगौर पूजन का गीत

गौर – गौर गणपति ईसर पूजे पार्वती

पार्वती का आला गीला , गौर का सोना का टिका ,

टिका दे , टमका दे , राजा रानी बरत करे ,

करता करता , आस आयो वास आयो ,

खेरो   खांडो   लाडू  लायो ,

लाडू ले बीरा न दियो ,बीरो म्हाने चुनड  दी

चुनड को में बरत करयो

सन मन सोला , ईसर गोरजा ,

दोनु जौड़ा , जोर ज्वार

रानी पूजे राज में , मैं पूजा सुहाग में ,

रानी को राज घटतो जाई , म्हाखो सुहाग बढतों जाय ,

किडी किडी कीड़ो ल्याय , किडी थारी जात दे ,

जात दे , गुजरात दे , गुजरात्या को पानी

दे दे थम्बा तानी , ताणी का सिघडा, बारी का बुजारा

म्हारो भाई एम्ल्यो खेम्ल्यो ,

सेर सिंघाड़ा ल्यो , पेफ का फूल ल्यो ,

सूरज जी को डोरों ल्यो , सोना को कचोलो ल्यो

गणगौर पूज ल्यो |

सोलह बार गणगौर पूजने के बाद पाटे धोने का गीत गाते हैं |

पाटा धोने का गीत

पाटो धोय पाटो धोय , बीरा की बहन पाटो धो ,

पाटा ऊपर पिलो पान , महे जास्या बीरा की जान ,

जान जास्या , पान खास्या , बीरा न परनार ल्यास्या ,

अली गली में  साँप जाय , भाभी थारो बाप जाय ,

अली गली गाय जाय , भाभी तेरी माय जाये ,

दूध में  डोरों , म्हारो भाई गोरो ,

खाट पर खाजा , म्हारो भाई राजा ,

थाली में जीरो म्हारो भाई हीरो ,

थाली में हैं , पताशा बीरा करे तमाशा

ए खेले नंदी बैल , ओ पानी कठे जासी राज ,

आधो जासी अली गली ,आधो ईसर न्हासी राज ,

ईसर जी तो न्हाय लिया , गौर बाई न्हासी राज ,

गौरा बाई रे बेटो जायो , भुवा बधाई ल्याई राज ,

अरदा तानो परदा तानो , बंदरवाल बंधाओ राज ,

सार की सुई पाट का धागा , भुआ बाई के कारने भतीजा रहगया नागा ,

नागा नागा काई करो और सिवास्या बागा ,

ओडा खोडो का गीत

ओडो छे खोड़ो छे घुघराए , रानियारे माथे मोर ,

ईसर दास जी , गौरा छे घुघराए रानियारे माथे मोर ….

[ इसी प्रकार पुरे परिवार के सदस्यों का नाम ले ]

इसी के साथ आरत्या भी करे |

[ एक बड़े दिये में एक कोढ़ी , सुपारी ,चांदी की अगुठी और एक रुपया डाल कर उसमे थौड़ा पानी डाल कर लोटे के ऊपर रख कर आरती गाये | 

म्हारी डूंगर चढती सी बेलन जी

म्हारी मालण फुलडा से लाय |

सूरज जी थाको आरत्यों जी

चन्द्रमा जी थाको आरत्यो जी |

ब्रह्मा जी थाको आरत्यो जी

ईसर जी थाको आरत्यो जी

थाका आरतिया में आदर मेलु पादर मेलू

पान की पचास मेलू

पीली पीली मोहरा मेलू , रुपया मेलू

डेड सौ सुपारी मेलू , मोतीडा रा आखा मेलू

राजा जी रो सुवो मेलू , राणी जी री कोयल मेलू

करो न भाया की बहना आरत्यो जी

करो न सायब की गौरी आरत्यो जी

गणगौर पूजन करने के बाद गणगौर माता की कहानी सुनना चाहिए |

गणगौर माता की कहानी (जनश्रुति पर आधारित)

राजा के बोया जौ – चना , माली ने बोई दूब , राजा का जौ – चना बढ़ता जाय माली की दूब घटती जाये | एक दिन माली बगीचे की घास में जाकर कम्बल ओढ़ कर छुप गया | छोरिया जब दूब लेने आई , दूब तोड़ कर जाने लगी तो माली ने उनसे उनके हार , डोरे खोस लिए | छोरिया बोली , क्यों तो हार खोसे , क्यों डोरे खोसे , जब सोलह दिन की गणगौर पूरी हो जायेगी तब हम पुजापा [ पूजा का सामान ] दे जायेंगे |

सोलह दिन पुरे हुए तो छोरिया आई  पुजापा देने और उसकी माँ से बोली तेरा बेटा कहा गया | माँ बोली वो तो गाय चराने गयो हैं , छोरिया  ने कहा यह पुजापा कहा रखे तो माँ ने कहा , ओबरी गली में रख दो | बेटो आयो गाय चराकर , और माँ से बोल्यो छोरिया आई थी ,माँ बोली आई थी , पुजापा लाई थी |

हा बेटा लाई थी ओबरी गली में रख्यो हैं | ओबरी ने एक लात मारी , दो लात मारी पर ओबरी नहिं  खुली | बेटे ने माँ को आवाज लगाई और बोल्यो माँ ओबरी तो नही खुले तो माँ बोली बेटा ओबरी नही खुले तो पराई जाई को कैसे ढाबेगा [ रखेगा ] , माँ पराई जाई तो ढाब लूँगा पर ओबरी नही खुले | माँ ने आकर गणगौर माता के नाम का रोली , मोली , काजल का छीटा लगाया और ओबरी खुल गई | ओबरी में ईशर गणगौर बैठे ,हीरे मोती ज्वारात के भंडार भरिये पड़े |

हे गणगौर माता ! जैसे माली के बेटे को ठुठी वैसे सबको ठुठना, कहता ने, सुनता ने, हुंकारा भरता ने, म्हारा सारा परिवार ने |

पंडित दयानन्द शास्त्री,

(ज्योतिष-वास्तु सलाहकार)

 

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

March 21, 2018 11 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Astrology

कैसे मनाया जाता है रक्षाबंधन भारत के अलग-अलग राज्यों में

कैसे मनाया जाता है रक्षाबंधन भारत के अलग-अलग राज्यों में रक्षाबंधन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्यार, विश्वास और सुरक्षा के अटूट बंधन का प्रतीक है।भारत…

Read now
Hinduism

भारत में कोरोना वायरस के स्टेज-3 से लड़ने की तैयारी पूरी

नयी दिल्ली, 28 मार्च;   इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR), स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ कोविड -19 टास्क फोर्स के सदस्यों ने इस बात को बनाए रखा है कि…

Read now
Hinduism

कोरोना वायरस: इतने राज्यों में पहुंचा कोरोना वायरस, 5 की मौत, 200 से ज्यादा संक्रमित

नई दिल्ली, 20मार्च; कोरोना वायरस से भारत में अबतक पांच लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे पहली मौत कर्नाटक के कुलबर्गी से, दूसरी मौत देश की राजधानी…

Read now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *