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जबलपुर में विराजमान है तीन लोकों की सुंदरी त्रिपुर सुंदरी

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जबलपुर में विराजमान है तीन लोकों की सुंदरी त्रिपुर सुंदरी

जबलपुर में विराजमान है तीन लोकों की सुंदरी त्रिपुर सुंदरी 

विश्व प्रसिद्ध त्रिपुर सुंदरी मंदिर जबलपुर के 14 किमी दूर तेवर गांव के भेड़ाघाट रोड पर स्थित है. इस मंदिर में मां महाकाली, मां महालक्षी और मां सरस्वती की विशाल मूर्ति एक साथ विराजमान है. प्रमुख आकर्षण होने के अलावा इस मंदिर को काफी पवित्र माना जाता है और यह धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केन्द्र है.

11वीं शताब्दी में बने इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां जो मूर्ति है वह धरती के अंदर से प्रकट हुई थी. त्रिपुर का शाब्दिक अर्थ होता है ‘तीन शहर’ और सुंदरी का अर्थ होता है ‘खूबसूरत महिला’. ऐसे में इस मंदिर का अर्थ निकाला गया तीन शहरों की खूबसूरत देवियां. हालांकि ऐसा कहा जाता है कि शक्ति के सिद्धांत में देवी के जो तीन रूप पाए जाते हैं, वही सही व्याख्या है और इसमें देवी की शक्ति और सामर्थ को प्रतीक के तौर पर लिया गया है.

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पूरे साल यहां हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं. खासकर 10 दिवसीय दुर्गा पूजा या दशहरा उत्सव के दौरान यहां भारी भीड़ उमड़ती है. संतों और धार्मिक गुरुओं में त्रिपुर सुंदरी मंदिर विशेष स्थान रखता है.

त्रिपुर सुंदरी मंदिर की भव्य प्रतिमा

यहां प्रत्येक वर्ष नवरात्रि के समय 10 दिनों तक मेला लगता है जिसमें दूर-दूर से लोग यहां पर माता त्रिपुर सुंदरी के दर्शन के लिए आते है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मां महाकाली, मां महालक्ष्मी, और मां सरस्वती की मूर्ति इतनी विशाल है की वह आधी से ज्यादा जमीन के अंदर समायी हुयी है सिर्फ तीनों देवियों के मष्तिष्क ही दिखाई देते है.

मन्नत के लिए बांधे गये नारियल

त्रिपुर सुंदरी का मंदिर जिस इलाके में है उस इलाके को हथियागढ़ के नाम से भी जाना था है हथियागढ़ के राजा करन मां त्रिपुर सुंदरी देवी के बड़े भक्त थे. वे देवी के सामने खोलते हुये तेल के कढ़ावे में अपने आप को समर्पित कर देते थे राजा के समर्पण और भक्ति को देखकर त्रिपुर सुंदरी देवी प्रसन्न होकर राजा को उनके वजन के बराबर कीमती सोना देती थी और राजा करन उस सोने को अपनी प्रजा में बांट दिया करते थे.

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मंदिर के समीप ही भरा बाजार

त्रिपुर सुंदरी के दर्शन के लिए साल भर लोग आते है लेकिन नवरात्री के समय यहां आने से लोगों को पुण्य का लाभ मिलता है. त्रिपुर सुंदरी का मंदिर जहां लोगों के लिये एक आस्था का केंद्र है वहीं यह आर्कियोलॉजिकल  सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के लिए पुरातात्विक धरोहर का केंद्र बन गया है. जिसके लिए एएसआई ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में वर्ष 2014 में एक याचिका लगाकर इस स्थान को पुरातात्विक धरोहर घोषित किए जाने की मांग की है.

एएसआई ने हाईकोर्ट के समक्ष दलील दी है कि 1954 के कर्णबेल-पटवारी सर्किल तेवर के नोटिफिकेशन के अनुसार प्रतिमा पुरातात्विक महत्व की है. इसलिए त्रिपुर सुंदरी मंदिर की प्रतिमा एएसआई की मिल्कियत है. कोर्ट ने इस सिलसिले में राज्य शासन, संभागायुक्त व कलेक्टर जबलपुर सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब भी किया है.

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September 24, 2017 4 min read
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