महाराष्ट्र में एक साथ 12 जैन भागवती दीक्षायें संपन्न : पढ़ी लिखी छात्राओं ने लिया संन्यास



- दीक्षार्थी अपने आत्म कल्याण के साथ समाज व राष्ट्र उत्थान में सहयोगी बनेंगे – आचार्य लोकेश
- जैन भागवती दीक्षा है अन्धकार से प्रकाश की ओर प्रस्थान – गुरुदेव नम्रमुनि
जैन आचार्य व अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य डा. लोकेश मुनि ने महाराष्ट्र के पडघा में गुरुदेव नम्रमुनि जी, श्री देवेन्द्र मुनि जी, श्री विमल मुनि जी, श्री धीरज मुनि जी, श्री विवेक मुनि जी, श्री पारस मुनि जी आदि 70 से अधिक साधू साध्वी सान्निध्य में आयोजित दीक्षा समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान के भौतिकतावादी युग में संसार की सभी सुख सुविधाओं को छोड़ कर जैन भागवती दीक्षा स्वीकार करना एक अनूठा आश्चर्य है |


आचार्य लोकेश ने कहा कि यह सभी दीक्षार्थी भगवान महावीर के बतायें हुए मार्ग पर चलते हुए अपने आत्म कल्याण के साथ साथ समाज व राष्ट्र के उत्थान में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे | उन्होंने इस अवसर पर गुरुदेव नम्रमुनि की जैन समाज के लिए विशिष्ठ सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि नम्रमुनि जिस तरह से युवाओं को प्रभावित कर धर्म के मार्ग चलने के लिए प्रेरित करते है यह समाज के लिए उनका बहुत बड़ा योगदान है | आचार्य लोकेश ने कहा जैन भागवती दीक्षा मोम के दांतों से लोहे के चने चबाने के समान है | उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह 12 दीक्षार्थी जिस सिंह वृति से सन्यास स्वीकार कर रहे है उसका पूरी निष्ठा से पालन करते हुए जैन एकता तथा भगवान महावीर के अहिंसा, अनेकांत व अपरिग्रह के सिद्धांतों को जन जन में फैलाते हुए जैन एकता के लिए भी काम करेंगे |



गुरुदेव नम्र मुनि ने मंत्रोच्चार के साथ 12 मुमुक्षुओं को दीक्षा प्रदान की और कहा कि यें युवतियां त्याग, तपस्या, संयम का मार्ग अपनाकर युवा पीढ़ी को नई प्रेरणा देंगी। जैन भागवती दीक्षा अन्धकार से प्रकाश की ओर प्रस्थान है। अर्थ–मोहरूपी अंधकार के नष्ट हो जाने पर सम्यग्दर्शन और सम्यग्ज्ञान की प्राप्ति करके दीक्षार्थी राग–द्वेष की निवृत्ति से सम्यक्चारित्र को प्राप्त कर लेते हैं | आत्मकल्याण के इच्छुक वही जीव जब मिथ्यात्वयुक्त मोह को घटाकर सम्यक्त्व क्रियाओं सहित चारित्र को गुरु के समीप धारण करते हैं, तब दीक्षा की प्रक्रिया आरंभ होती है। दीक्षा के माध्यम से वेष परिवर्तन के साथ–साथ मन का परिवर्तन होकर भावों में परम शुद्धता आती है । जैन दीक्षा अंगीकार करना सबसे बड़ा तप है। यह उतना आसान नहीं, जितना लोगों को लगता है। सभी तरह की सुविधाओं का त्याग कर पांचों इंद्रियों पर नियंत्रण करने के बाद ही कोई दीक्षा ले सकता है।

दीक्षा महोत्सव में सोलानी बेन पारेख, चार्मी बेन कामदार, परिधि बेन मेहता, प्रिया बेन बेलानी, दिव्या बेन सोलंकी, छाया बेन कक्का, वीरान्शी बेन भयानी, हेत बेन मेहता, अवनी बेन पारेख, प्रफुल्ला बेन वेगडा में जैन भागवती दीक्षा ली। हजारों की संख्या में उपस्थित जनसमूह के समक्ष जब सजे धजे दीक्षार्थीयों ने जब सांसारिक वेशभूषा त्याग कर सन्यासियों का वेश धारण किया तब वातावरण भाव विभोर हो गया। इस अवसर पर दिल्ली से जैन समाजरत्न श्री सुभाष ओसवाल अपनी धर्मपत्नी श्रीमती नीलम ओसवाल के साथ उपस्थित थे।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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