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क्या आप जानते हैं इन अंधविश्वासों के वैज्ञानिक कारण

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क्या आप जानते हैं इन अंधविश्वासों के वैज्ञानिक कारण

क्या आप जानते हैं इन अंधविश्वासों के वैज्ञानिक कारण

भारत की हर परंपरा के पीछे वैज्ञानिक कारण रहे हैं. हमारे समाज में कुछ रिवाज ऐसे हैं जिन्हें अंधविश्वास की नजर से देखा जाता है. जैस घर के बाहर नींबू मिर्ची टांग देना, दही खा कर घर से बाहर ना निकलना वगैरहा वगैरहा. पर क्या आप जानते है कि हमारे पूर्वजो द्वारा बनाए गए इन रिवाजों पीछे विज्ञान काम करता है. जी हां हर अंधविश्वास के पीछे छुपा है एक वैज्ञानिक तथ्य. आइये जानते हैं उनके कारण —

गर्भवती महिला के बाहर जाने पर पाबंदी

ऐसा माना जाता है गर्भावास्ता के दौरान यदि कोई स्त्री घर से बहार निकलती है तो बुरी आत्मा का साया मां और होने वाले बच्चे पर पड़ सकता है. लेकिन पुराने समय में ऐसा करने के पीछे लॉजिक हिता था क्यूंकि उस समय आने-जाने के साधनों की कमी थी और गर्भवती महिलाओं को पैदल चलने की समस्या होती थी.

 

नदी में सिक्के फेंकना शुभ माना जाता है

अक्सर नदी में सिक्का फेंककर लोग भगवान से अपनी मनोकामना पूरी करने की दुआ मांगते हैं और ऐसा माना जाता है की नदी में सिक्का फेंकने से भाग्य मजबूत होता है ! लेकिन इसके पीछे के वैज्ञानिक कारण की बात करें तो पहले के समय में ताम्बे के सिक्के हुआ करते थे जो पानी को बैक्टिरिया मुक्त करते थे और इसी लिए पानी में सिक्के डाले जाते थे लेकिन धीरे धीरे लोगों ने इसे भाग्य चमकाने से जोड़ दिया.

रात में नाखून नहीं काटना

लोगों में रात में नाखून ना काटने को लेकर अंधविश्वास है कि रात में ऐसा करने से किस्मत पर बुरा प्रभाव पड़ता है. जबकि पुराने वक्त में बिजली नहीं होने के कारण रात में नाखून नहीं काटे जाते थे. उस वक्त नाखून काटने के लिए भी औजारों का इस्तेमाल किया जाता था. इससे अंधेरे में उंगिलयों के कटने के कटने का डर भी होता था.

 

बिल्ली का रास्ता काटना

पुराने समय में लोग जब व्यापार के लिए एक बैलगाड़ियों से एक शहर से दूसरे शहर जाया करते थे, रात के समय में बिल्ली की आंखे चमकती थी जिससे गाय, बैल और घोड़े डर जाया करते थे. इसलिए थोड़ी देर के लिए यात्रा रोक दी जाती थी. इसी आधार लोग आपस में कहने लगे कि जब बिल्ली गुजरे तो थोड़ी देर के लिए रुक जाना चाहिए और यही बाद में अंधविश्वास बन गया.

 

सांप को मारने के बाद सिर कुचलना

कहा जाता है सांप को मारने वाले की तस्वीर उसकी आंखों में छप जाती है. जबकि इस अंधविश्वास के पीछे लॉजिक ये है कि सांप के मरने के बाद भी उसका जहर लोगों को मार सकता है. इसलिए उसके सिर को कुचल कर दबा दिया जाता है .

ग्रहण के समय बाहर ना आना 

हमारे बड़े अक्सर हमें ग्रहण के समय बाहर निकलने नहीं देते उनके मुताबिक इस दौरान बुरी ताकते हावी हो जाती हैं. जबकि इसके पीछे का असली लॉजिक है कि ग्रहण के वक्त सूर्य की किरणों से त्वचा के रोग हो सकते हैं. साथ ही नंगी आंखों से उसे देखने से लोग अंधे भी हो सकते हैं.

 

शव यात्रा से लौटने के बाद स्नान करना

भारत में ऐसी मान्यता है की जब भी शव यात्रा में शामिल हों तो लौटने के बाद स्नान करना जरुरी है क्योंकि ऐसा ना करना अशुभ माना जाता है ! लेकिन इसके पीछे के वैज्ञानिक कारण की बात करें तो मौत के बाद शरीर में कई हानिकारक बैक्टीरिया जन्म लेते हैं और इनके संपर्क में आने से ये बैक्टीरिया दूसरों के शरीर में फ़ैल सकते हैं इससे बचने के लिए स्नान किया जाता है ताकि ये बैक्टीरिया दूर हो जाएं !

दही खा कर घर से बाहर निकलना

किसी भी शुभ काम पर जाने से पहले घर से दही खाकर निकलना शुभ माना जाता है. लेकिन इसके पीछे लॉजिक है कि गर्म मौसम के कारण दही खाने से पेट ठंडा रहता है. साथ ही दही में चीनी मिलाकर खाने से शरीर में ग्लूकोज की मात्रा सही बनी रहती है.

यह भी पढ़ें-अच्छी सेहत और वास्तुशास्त्र : कुछ उपाय

जानिए क्यों तोडा जाता हैं नारियल

कहते है की जब भी कुछ नया लिया जाता है उसका पूजा या भगवान का नाम ले कर ही शुरू किया जाता है. लोग जब भी नये घर या फिर नया गाडी लेते है तो उसके लिए पूजा करते है और उसके सामने नारियल तोडते है नारियल को बहुत जोड़ से नीचे फेकते है ताकि वह टुकडे टुकेडी हो जाये. लोगो का यह मानना है की ऐसा करने से वह उस चीज़ को आपने मानने लगते है.

 

दरवाजे पर नींबू मिर्ची लटकाना

दरवाजे पर नींबू मिर्ची लटकाने पीछे लोगों का अंधविश्वास है कि ऐसा करने से बुरी ताकतो का साया दूर रहता है. इसके पीछे असली लॉजिक है कि नींबू मिर्ची में मौजूद सायटिक एसिड होता है जो कीड़े-मकौड़ों को घर में घुसने से रोकता है.

 

मंगल और गुरुवार को बाल न धोना

आपने अक्सर देखा होगा अक्सर महिलाएं मंगल और गुरूवार को बाल धोने से परहेज करती है. क्योंकि उन्हें लगता है कि इस दिन बाल धोने से बुरे वक्त की शुरूआत होती है. लेकिन आपको बता दें कि पुराने वक्त में लोग अपने घरों में पानी स्टोर करके रखते थे. बाल धोने में पानी ज्यादा खर्च होता है , तो इन दो दिन पानी बचाने के लिए बाल नहीं धोए जाते थे.

यह भी पढ़ें-पहली बार जानिए – चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण से जुड़े हर विश्वास-अंधविश्वास का वैज्ञानिक पहलू

मंदिर में घंटे का बजाना का अर्थ

भगवान को खुश करना मन जाता हैं  कइँती इसका कारण/लॉजिक यह हैं की मंदिर घंटे को बजाने से उसके वाइब्रेशन से साकारात्मक उर्जा पैदा होती है. चारों ओर का वातावरण साफ रहता है. इसलिए हमारे घरों में भी घंटे और शंख का प्रयोग किया जाता है.

 

क्यों लगाया जाता है तिलक

भारतीय संस्कृति में तिलक लगाना शुभ संकेत माना जाता है लेकिन क्या आपको पता है आखिर तिलक लगाते क्यों हैं ? इसके पीछे के कारण क्या है जो ये प्रथा सदियों से चली आ रही है ? आइये हम आपको इसके वैज्ञानिक कारणों के बारे में बताते हैं !

 

माथे पर तिलक लगाना हिन्दू धर्म की एक पहचान होती है जो माथे के बीचों बीच लगाया जाता है ! जब भी कोई सुबह कार्य किया जाता है तो माथे पर तिलक लगाया जाता है जो हल्दी, सिन्दूर, केशर, भस्म और चंदन आदि का इस्तेमाल किया जाता है !  साधारणतः तिलक लगाने के लिए चन्दन का इस्तेमाल किया जाता है और चन्दन लगाने से मस्तिष्क में शांति और तरावट बनी रहती है साथ ही चन्दन से मस्तिष्क ठंडा रहता है ! जब भी दिमाग पर जोर पड़ता है तो हमे सिर दर्द की शिकायत होती है लेकिन चन्दन का तिलक लगाने से हमारे मस्तिष्क को ठंडक मिलती है और सिरदर्द की समस्या से निजात मिलती है ! इसी कारण कहा जाता है जो लोग सुबह उठकर नहाने के बाद सिर पर चन्दन का तिलक लगाते हैं उन्हें सिरदर्द जैसी समस्या नहीं होती !

यह भी पढ़ें-सही दिशा में सोने के प्रभाव, परिणाम एवं दुष्प्रभाव : वास्तुशास्त्र


आखिर सूर्य को जल चढाने का वैज्ञानिक कारण क्या है ??

सूर्य की किरणे जब हमारे शरीर पर पड़ती हैं तो वो कई हानिकारत तत्वों को नष्ट कर देती है साथ ही हमारी नकारात्मक ऊर्जा को भी दूर करती है ! इन सब कारणों से कहा जाता है की अपनी दिनचर्या में रोज सुबह उठकर सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए. वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाये तो सूर्य एक तारा है जो एक आग का गोला है ! सूर्य के प्रकाश से ही धरती पर हमारे दिन की शुरुआत होती है और सूर्य ना सिर्फ मनुष्य के लिए बल्कि जीव जंतुओं और पेड़ पौधों के जीवित रहने के लिए भी आवश्यक है ! सूर्य हमारी पृथ्वी से करीब 15 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर है और इसका प्रकाश धरती पर करीब 8 मिनट और 19 सेकण्ड में पहुँचता है !सूर्य धरती पर सभी के लिए ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है अगर सूर्य की ऊर्जा ना मिले तो पेड़ पौधे अपने भोजन का निर्माण नहीं कर पाएंगे ! सूर्य को जल चढ़ाना हमारे शरीर पर सीधा असर डालता है, सुबह उगते सूर्य को जल चढाने से हमारे स्वास्थ्य पर बहुत लाभकारी प्रभाव पड़ता है ! जब सुबह सुबह की हवा और उगते सूर्य की किरणे हमारी त्वचा पर पड़ती हैं तो हमारी स्किन दमक उठती है और हमारे चेहरे पर तेज दिखाई देता है ! सूर्य को जब जल चढ़ाया जाता है तो पानी की धार के बीचे में से जो सूर्य की किरणे आती हैं उनसे हमारे आँखों की रौशनी तेज होती है ! साथ ही पानी के बीच से होकर आने वाली सूर्य की किरणों से जो रंग निकलते हैं वो भी हमारे शरीर के लिए बेहद लाभकारी होते हैं ! इसके अलावा सूर्य की रौशनी से हमारे शरीर को विटामिन डी मिलता है जिससे हमारी हड्डियां मजबूत होती हैं .

साभार:पंडित दयानंद शास्त्री (ज्योतिष वास्तु सलाहकार)

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August 12, 2017 8 min read
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