सर्वपितृ अमावस्या का महत्व
2 सितंबर 2020 से आरंभ हुआ पितृ पक्ष 17 सितंबर को समाप्त हो जाएगा। कोरोना महामाहरी की वजह से इस बार धार्मिक स्थानों पर पिंडदान और तर्पण की प्रक्रियाएं संपन्न नहीं हो पा रही है। वैसे हर कोई अपने पूर्वजों के श्राद्ध करने की कोशिश करता है। हमारे शास्त्रों के अनुसार परिजनों की मृत्यु तिथि के अनुसार पिंडदान, पितर तर्पण तथा श्राद्ध आदि कार्य समस्य प्रकार के कर्म कांड करते हैं। लेकिन अपने पितरों की मृत्यु तिथि का पता न हो तो वे सभी लोग पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाली अमावस्या के दिन अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान कर सकते है। ये धार्मिक विधान सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया जाता है।

सर्वपितृ अमावस्या की तिथि इस पितृपक्ष में 17 सितंबर को पड़ रही है। आश्विन मास में पड़ने वाली अमावस्या तिथि को ही सर्व पितृ अमावस्या तिथि के नाम सेे जाना जाता है। इसे मोक्ष दायिनी अमावस्या भी कहा जाता है।
पुराणों में अमावस्या में श्राद्ध की कथा
मान्यताओं के अनुसार देवताओं के पितृगण ‘अग्निष्वात्त’ जो समपथ लोक में निवास करते हैं। उनकी मानसी कन्या, ‘अच्छोदा’ नाम की एक नदी के रूप में अवस्थित हुई। अच्छोदा ने 1,000 वर्ष तक निर्बाध तपस्या की। इस तप से प्रसन्न होकर देवताओं के पितृगण ‘अग्निष्वात्त’ अच्छोदा को वरदान देने के लिए दिव्य सुदर्शन शरीर धारण कर आश्विन अमावस्या के दिन उपस्थित हुए।
उन पितृगणों में ‘अमावसु’ नाम की एक अत्यंत सुंदर पितर की मनोहारी-छवि, यौवन और तेज को देखकर अच्छोदा कामातुर हो गई और उनसे प्रणय निवेदन करने लगीं किन्तु अमावसु अच्छोदा की काम प्रार्थना को ठुकराकर अनिच्छा प्रकट की, जिससे अच्छोदा लज्जित होकर और स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गिरी। अमावसु के ब्रह्मचर्य और धैर्य की समस्त पितरों ने सराहना की। तथा वरदान दिया कि आज के बाद यह अमावस्या तिथि ‘अमावसु’ के नाम से ही जानी जाएगी।
इस दिन करें श्राद्ध और पाएं सभी फल
जो भी व्यक्ति या परिवार इस दिन अपने किसी भी परिजन का श्राद्ध कर पाए उनके लिए ये दिन शुभ माना जाएगा। इस अमावस्या के दिन श्राद्ध-तर्पण करके लोग सभी बीते 14 दिनों का पुण्य प्राप्त करते हुए अपने पितरों को तृप्त कर पाएंगे।ऐसा कहा जाता है तभी से प्रत्येक माह की अमावस्या तिथि को सर्वाधिक महत्व दिया जाता है और यह तिथि ‘सर्वपितृ श्राद्ध’ के रूप में भी मनाई जाती है।
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Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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