परमार्थ निकेतन में गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट महोत्सव का आयोजन
ऋषिकेश, 20 अक्टूबर; परमार्थ निकेतन के पावन गंगा तट पर पर्यावरण मित्र मिट्टी के दीप जलाकर पर्यावरण प्रिय दीपावली मनायी. इस अवसर पर विश्व के अनेक देशों यथा अमेरीका, यूके, चिली, नार्वे, जापान, चीन, स्पेन, जर्मनी, भारत के विभिन्न प्रांतों एवं दक्षिण भारत से आये श्रद्धालुओं ने परमार्थ गंगा तट पर दीपदान किया. यह दृश्य विविधता में एकता एवं वसुधैव कुटुम्बकम का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रहा था. सभी साधकों ने हाथों में मिट्टी का दीप लेकर विश्व शान्ति की प्रार्थना की.
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल इण्टर फेथ वाश एलायंस के सह-संस्थापक एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी जी के पावन सानिध्य में माँ गंगा के तट पर वेद मन्त्रों के साथ भगवान श्री गणेश एवं माँ लक्ष्मी जी का विधिवत पूजन सम्पन्न हुआ.
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परमार्थ गुरूकुल, वीरपुर में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं परमार्थ परिवार के सदस्यों ने स्थानीय ग्र्रामीणों के साथ दीपावली का पर्व मनाया. पूज्य स्वामी जी ने कहा कि ’मनुष्य का व्यवहार दीपक की तरह होना चाहिये जो की बिना भेदभाव किये महलों में भी उतना ही प्रकाश देता है जितना की गरीब की झोपड़ी में. उन्होने आन्तरिक स्वच्छता के लिये दीपदान एवं बाह्म स्वच्छता हेतु सभी ग्रामीणों को संकल्पित किया कि वे घरों की स्वच्छता के साथ गली एवं गांव की स्वच्छता पर भी ध्यान दें और अपने गांव को खुले में शौच से मुक्त करने हेतु सहयोग प्रदान करें. पूज्य स्वामी जी ने कहा कि ’अपने आसपास के परिवेश को स्वच्छ रखने के लिये जिम्मेदार नागरिक बने तथा सहयोगात्मक रूप से सभी मिलकर स्वच्छता के पर्व पर स्वच्छता को अंगीकार करने का संकल्प लें यही दीपावली की सार्थकता है.’
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आज परमार्थ निकेतन में गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया गया जिसमें दक्षिण भारत से हजारों की संख्या में आये साधकों ने भी सहभाग किया. पूज्य स्वामी जी ने ठाकुर जी का पूजन कर विविध व्यंजनों का भोग अर्पित किया तथा गौ माता एवं बछड़े का पूजन कर सभी देशी-विदेशी साधकों को गौ संरक्षण का संकल्प कराया.
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ‘पर्व हर्ष, उत्कर्ष, उल्लास एवं उमंग के प्रतीक होते हैं. पर्व स्वच्छता का संदेश लेकर आते हैं. आन्तरिक स्वच्छता, शक्ति, शान्ति, नदियों, पेड़ों, पहाड़ों एवं पृथ्वी के प्रति अपनत्व के भाव से जीना सीखाते हैं . इस दीपावली पर सभी के दिलों में यही भाव जगे; पर्यावरण के साथ आत्मीयता से जुड़े और पर्यावरण मित्र बनें. उन्होने कहा कि सम्पूर्ण वसुधा एक परिवार है इस भाव से मनुष्य अपना प्रत्येक कर्म करें यही तो उत्सव है; यही पर्व है.’
जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि ’दीप हमें प्रकाशित होने की शिक्षा देते हैं. दीपों से जुड़ने का अर्थ है अपनी माटी से जुड़ना. दीपक, परम्परा और सभ्यता का प्रतीक है हड़प्पा संस्कृति से लेकर आधुनिक संस्कृति, संवेदनायें और आशाओं को समेटे दीपक स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता हैं. दीप जीवटता की मिसाल कायम करता है और सीखाता है कि किस प्रकार जीवन में विपरीत परिस्थितियों का सामना जीवटता के साथ कर आगे बढ़ते रहना है.’
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इस अवसर पर दक्षिण भारत से आये विद्वान नेच्चुर वेंकटरमण, आभा माताजी, नन्दिनी त्रिपाठी, लौरी, सूजी, एलिस, विन्नी, वन्दना शर्मा, इन्दू जी, प्रीति, नरेन्द्र बिष्ट, लक्की सिंह, आचार्य संदीप, आचार्य दीपक, भगत सिंह एवं दक्षिण भारत के हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे.
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सानिध्य में वीरपुर ग्राम में श्री गुरूमीत जी, वीरपुर प्रधान श्रीमती बबीता कश्यप, श्री लव काम्बोन, श्री संजय त्यागी, वन विभाग के अधिकारीगण, जल विभाग के अधिकारीगण, विद्युत विभाग के अधिकारी एवं स्थानीय लोगो ने मिलकर शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा परमार्थ गुरूकुल प्रांगण, वीरपुर में रोपित कर प्रदूषण मुक्त दीपावली पर्व मनाने का संकल्प लिया.
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Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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