वृन्दावन, 7 मार्च; वृन्दावन में यमुना के पुलिन तट पर चल रहे कुम्भ मेले में धर्म , सँस्कृति का अद्भुत दर्शन देखने को मिल रहा है. यहां देश विदेश से आये वैष्णव सन्तों के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ रहा है. इस वैष्णव कुम्भ में देश के अलग अलग हिस्सों से सन्त आये हुए हैं . यहाँ इन दिनों पोरबन्दर गुजरात से आये संत मुनीन्द्र दास महत्यागी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं .
कौन है संत मुनीन्द्र दास महात्यागी
वृन्दावन में 16 फरवरी से शुरू हुई कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक में आए खड़ेश्वरी बाबा बैठक शुरू होने से कुछ दिन पहले रमणरेती में रुके थे। यहां यमुना का जल हाथों में लेकर उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मस्थान के बारे में संकल्प लिया। करीब 65 वर्षीय खड़ेश्वरी बाबा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हैं.
1992 में अयोध्या कांड के बाद लिया था प्रण
संत मुनीन्द्र दास महात्यागी करीब 4 दशक से खड़े रहकर जीवन गुजारने की प्रतिज्ञा निभा रहे हैं . वह खड़े हो कर ही नित्य कर्म करते हैं , खड़े हो कर ही भगवान की आराधना, खड़े हो कर ही भोजन करते हैं खड़े हो कर ही सोते हैं . 1992 से खड़े हो कर जीवन गुजार रहे संत मुनीन्द्र दास महत्यागी ने अयोध्या कांड के बाद प्रतिज्ञा ली थी कि जब तक भव्य राम मंदिर नहीं बनेगा और उसमें राम लला विराजमान नहीं होंगे तब तक वह खड़े रहकर ही जीवन गुजारेंगे.
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अयोध्या को राजधानी बनाने की इच्छा
करीब 40 साल का सफर हो चुका और संत मुनीन्द्र दास महात्यागी देश भर में भृमण कर रहे हैं लेकिन 1992 के बाद अयोध्या नहीं गए . वह प्रयागराज गए , फैजाबाद गए लेकिन अयोध्या नहीं गए . सन्त मुनीन्द्र दास चाहते है कि अयोध्या राजधानी बने ,विश्व का कल्याण हो जन मानस में सद्भावना हो . वृन्दावन कुम्भ में आये संत मुनीन्द्र दास महत्यागी अन्न नहीं लेते वह केवल फल , सब्जियाँ अग्नि कुंड में भून कर ही पाते हैं .
झोपड़ी में प्रवास
सन्त मुनीन्द्र दास की यह साधना ही वृन्दावन वैष्णव कुम्भ में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. माथे पर चंदन और ललाट पर तेज इनकी साधना के प्रताप को दर्शाता है .संत मुनीन्द्र दास त्यागी वृन्दावन कुम्भ में साधारण सी झौंपड़ी बना कर प्रवास कर रहे हैं .खपरैल की छत और उसके नीचे बैठे अनुयायी यही उनका वृन्दावन प्रवास है. सन्त मुनींद्र दास खुद एक झूले नुमा आसन के सहारे खड़े रहते हैं .
अखंड भारत का निर्माण
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शनिवार को उन्होंने बताया कि जब तक अखंड भारत का सपना पूरा नहीं होता, वह खड़ेश्वरी साधना करते रहेंगे. अखंड भारत का निर्माण कैसे होगा, इस सवाल पर कहते हैं कि आज स्थिति बदल रही है. मुझे पूरा भरोसा है देश एक बार फिर अखंड भारत के रूप में स्थापित होगा. उसकी राजधानी अयोध्या होगी.
चार कुंभ कर चुके हैं खड़ेश्वरी बाबा
खड़ेश्वरी बाबा अब तक देश के चारों स्थानों पर लगने वाले कुंभ में शामिल हो चुके हैं. बाबा ने बताया कि सफर के लिए वह खुले वाहन का इस्तेमाल करते हैं. उनके भक्त यह मुहैया करवा देते हैं. वे खड़े-खड़े ही यात्रा करते हैं.
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