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क्या बदल जायेगा शून्य का इतिहास ?

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क्या बदल जायेगा शून्य का इतिहास ?

क्या बदल जायेगा शून्य का इतिहास ?

अभी तक आप सबको यह बात मालूम होगी की शून्य की खोज आर्यभट्ट ने की. शून्य कब आया इसे लेकर आज तक जितनी भी रिसर्च की गई, उन सब से उलट एक नई खोज सामने आई है. आइये जानते हैं उस रिसर्च के बारे में.

शून्य को लेकर आई नयी खोज

1902 से ब्रिटेन के ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में रखी गई बखशाली पांडुलिपि से ऐसे प्रमाण सामने आए हैं जिसमें शून्य की उम्र 3-4 सदी और ज्यादा बढ़ाने की बात छेड़ दी है. नई कार्बन डेटिंग तकनीकी से यह बात सामने आई है कि 4 से 6 शताब्दी में बीच ही शून्य की खोज हो चुकी थी. 1881 में पेशावर के करीब मिली पांडुलिपि बख्शाली में इसके प्रमाण मिले हैं.

पहले बिंदु के रूप में था शून्य

पांडुलिपि बख्शाली से मिली नई जानकारियां गणित के इतिहास के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं. प्राचीन भारत में गणित में इस्तेमाल होने वाला बिंदु समय के साथ शून्य के चिह्न के रूप में विकसित हुआ और इसे पूरी बखशाली पांडुलिपि में देखा जा सकता है.

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आठवीं सदी से भी पुराना है शून्य

पहले के शोध में पांडुलिपि को 8वीं और 12 वीं शताब्दी के बीच का माना जा रहा था, लेकिन कार्बन डेटिंग में सामने आया है कि ये इससे भी कई शताब्दियां पुरानी है. कार्बन डेटिंग के मुताबिक ये पांडुलिपि दूसरी से चौथी शताब्दी के बीच की है. इसका सीधा सा मतलब है कि शून्य अभी तक की मान्यता से भी 500 साल पुराना है.

 बखशाली पांडुलिपि ट्रेनिंग मैन्युअल जैसी

यह बखशाली पांडुलिपि 70 भोजपत्रों पर लिखी है जिसमें संस्कृत और गणित लिखी हुई है. यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफर्ड के मारकुस डू सॉटॉय के अनुसार यह पांडुलिपि बौद्ध भिक्षुओं के लिए तैयार की गई ट्रेनिंग मैनुअल जैसी प्रतीत होती है.

बिंदु के तौर पर शून्य का सैंकड़ो बार इस्तेमाल

अभी तक ग्वालियर में एक मंदिर की दीवार पर शून्य के जिक्र को ही सबसे पुराना अभिलेखीय प्रमाण माना जाता रहा है. लेकिन प्रोफेसर मारकुस डू सॉटॉय जब ग्वालियर के उस छोटे से मंदिर गए जहां दीवार पर शून्य अंकित है, तो उन्हें वहां कुछ नहीं मिला.

पांडुलिपि में लिखे टेक्स्ट में बिंदु के तौर पर सैकड़ों बार शून्य का इस्तेमाल किया गया है. लेकिन बीतते समय के साथ मध्य में छेद वाला आकार विकसित हुआ. माना जा रहा है कि इस नए सबूत से गणित के शुरुआती इतिहास के बारे में जानने में और मदद मिलेगी.

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September 15, 2017 3 min read
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