ब्रह्माकुमारीज की रानी बहन – जो बालों से खींचती है ट्रेन का इंजन…खास मुलाकात

- बालों से ट्रेन का इंजन खींचने वाली बीके रानी से खास मुलाकात
- बचपन में लोग जिसे झांसी की रानी कहते थे, वो कैसे बनी बीके रानी?

खेल का मैदान, सिनेमा, शिक्षा और सेना आज सभी क्षेत्रों में महिलाएं अपनी ताकत और हुनर का लोहा मनवा रही हैं। लेकिन आज हम आपको मिलवा रहे हैं ऐसी नारी शक्ति से जो इन सब क्षेत्रों से अलग ऐसे क्षेत्र से हैं जिसके बारे में पता चलने पर आप आश्चर्य करेंगे कि भला ये कैसे संभव है। वो आध्यात्मिक क्षेत्र से हैं लेकिन दुनिया को दम कुछ इस तरह दिखाया कि हर कोई हैरान रह गया। अपनी चोटी से ट्रेन का इंजन और लोडेड ट्रक खींचने वाली बीके रानी से डॉ. देवेन्द्र शर्मा की खास बातचीत।
प्रश्न- आपकी इस शक्ति का स्त्रोत क्या है, कैसे आप ये सब कर पाती हैं?
जवाब- मेडिटेशन…जी हां। मेडिटेशन ही इसका राज है। एक संकल्प को लेकर आगे चलेंगे तो आपको पता नहीं चलेगा कि शक्ति कहां से आई।
सवाल- अपने केशों की शक्ति से आप क्या-क्या कर चुकी हैं?
जवाब- ट्रेन का इंजन, लोडेड ट्रक और बस खींच चुकी हूं। मेरे नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड है। गिनीज बुक, लिम्का बुक और इंडिया बुक में नाम दर्ज करवा चुकी हूं।
सवाल- इसकी शुरुआत कैसे हुई ?
जवाब- भोपाल आई तो सिंगरोली में भवन बन रहा था, वहां सेवा देने गई। भाई लोग ज्याता ईंटें उठाते तो लगा कि हम भी उठा सकते हैं। एक दिन ठेले पर ज्यादा ईंटें रखकर बालों से खींचा तो अच्छा लगा। तभी से ये सिलसिला जारी है।00
सवाल- कब से ज्ञान में हैं?
जवाब- 11 साल की उम्र से। घरवाले बचपन में ही शादी करना चाहते थे लेकिन कुछ अलग करने की ठान रखी थी। 11 साल की उम्र में आश्रम आ गई। घर में और गांव में मुझे देखकर कोई मुस्कुराता नहीं था। जब पहली बार ब्रह्मकुमारी दीदी घर आईं, मुझेदेखकरमुस्कुराईंतभीसोचलियाकिऐसाहीबननाहै।
सवाल- गांव की एक बच्ची से राजयोगिनी तक के सफर के बारे में कुछ बताइए?
जवाब- छोटे थे तो ये शौक छोटे थे बाद में बड़े होते गए। गांव में जीवन जीने की आजादी नहीं होती है। कुछ सिखाया जाता है तो इसलिए कि पराए घर जाकर कुछ कर सकें। बचपन में कुछ तोड़ने-फोड़ने या किसी को मारने के लिए हाथ उठते थे।यूपी के झांसी के एक छोटे से गांव से हूं। बचपन में मेरी आदतों की वजह से लोग झांसी की रानी कहते थे।लेकिन ये शौक जो पहले विनाशक था अब कल्याणकारी बन गया है।
सवाल- बच्चे और युवा आज जरा-जरा सी बातों पर आत्महत्या कर लेते हैं, क्या वजह है इसकी?
जवाब- आंतरिक शक्ति की कमी। वो वास्तिवकता को पहचान नहीं पाते और भटक जाते हैं।आंतरिक शक्ति की कमी होने की वजह से इस तरह के कदम उठाते हैं। आज बच्चों को उन्हीं की भाषा में ज्ञान दिए जाने की जरूरत है। उन्हें लिक्विड डाइट की जरूरत है।सरल तरीके से उन्हें आंतरिक शक्ति का अहसास करवाने की जरूरत है।
सवाल- इनते साले रिकॉर्ड आपके नाम हैं, अब अगला लक्ष्य क्या है?
जवाब- जल्द कुछ नया और करेंगे, योजनाचलरहीहै।आंतरिक शक्ति को पहचानने से ये सब संभव हुआ।मेडिटेशन के जरिए आंतरिक तैयारी की और यहां तक पहुंचे।
बीके रानी भोपाल स्थित राजयोग भवन में अपनी सेवाएं दे रही हैं। शाबास इंडिया जैसे कई शो में वो दुनिया को दिखा चुकी हैं कि मेडिटेशन के जरिए कैसे तन और मन को मजबूत कर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है? उन्होंने बताया कि खुद को ईश्वरीय सेवा में लगाकर जो भी तन-मन और धन से समर्पण करते हैं परमपिता उससे कई गुना ज्यादा हमें देता है।
भोपाल स्थित राजयोग भवन में बीके रानी से डॉ. देवेन्द्र शर्मा बातचीत पर आधारित खास इंटरव्यू।
देखिए वीडियो…
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Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality.
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