जितिया व्रत 2026 हिंदू धर्म में जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जितिया या जिउतिया व्रत भी कहा जाता है, संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखा जाता है। इस व्रत में कई परंपराओं के अनुसार माताएं करीब एक दिन तक निर्जला उपवास करती हैं यानी अन्न के साथ पानी का भी सेवन नहीं करतीं। यही वजह है कि जितिया को कठिन व्रतों में गिना जाता है।
साल 2026 में जितिया व्रत की तारीख को लेकर लोगों के बीच भ्रम है। पंचांग के अनुसार मुख्य जितिया व्रत 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को रखा जाएगा। इसके एक दिन पहले नहाय-खाय होगा और अगले दिन पारण किया जाएगा।
ध्यान दें: इस साल जितिया व्रत पितृ पक्ष 2026 (27 सितंबर–10 अक्टूबर) के बीच ही पड़ रहा है। कई परिवारों में इस दौरान एक साथ श्राद्ध और जितिया व्रत दोनों की तैयारी करनी पड़ती है, इसलिए सामग्री पहले से जुटा लेना बेहतर रहेगा।
जितिया व्रत 2026 कब है?
जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत 2026 में 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा।
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को पड़ रही है। इसी तिथि के आधार पर उदया तिथि में जितिया व्रत रखा जाएगा। अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर से जुड़ी रहेगी और इसका समापन 4 अक्टूबर की सुबह होगा। सटीक समय के लिए DrikPanchang पर अपने शहर का पंचांग देखा जा सकता है।
जितिया 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां
- 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार – नहाय-खाय
- 3 अक्टूबर 2026, शनिवार – जितिया का निर्जला व्रत
- 4 अक्टूबर 2026, रविवार – पारण
इस तरह जितिया पर्व की परंपरा तीन दिनों में पूरी होती है।
24 घंटे का निर्जला व्रत क्यों रखा जाता है?
जितिया व्रत की सबसे खास बात इसका निर्जला स्वरूप है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, व्रत रखने वाली महिलाएं अन्न और जल दोनों का त्याग करती हैं। इस दौरान पूरे दिन और रात व्रत रखा जाता है और अगले दिन पारण के बाद ही व्रत खोला जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि माताएं यह कठिन व्रत अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुख और सुरक्षा की कामना से करती हैं।
हालांकि, निर्जला उपवास हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उचित नहीं हो सकता। खासकर गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को व्रत के कठोर नियमों का पालन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
जितिया व्रत से पहले होता है नहाय-खाय
जितिया पर्व की शुरुआत 2 अक्टूबर को नहाय-खाय से होगी।
इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं स्नान आदि करके सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं और अगले दिन के निर्जला व्रत की तैयारी करती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में नहाय-खाय से जुड़ी भोजन और पूजा की परंपराएं अलग हो सकती हैं।
बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में जितिया की लोकपरंपराओं में नहाय-खाय और इसके बाद होने वाले ओठगन का विशेष महत्व माना जाता है।
जितिया व्रत में किसकी पूजा होती है?
जितिया व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। व्रत से जुड़ी लोककथा में राजा जीमूतवाहन के त्याग और परोपकार की कथा सुनाई जाती है।
कई क्षेत्रों में पूजा के दौरान चील और सियारिन से जुड़ी लोकपरंपराओं का भी पालन किया जाता है। पूजा के दौरान व्रत कथा सुनना और भगवान जीमूतवाहन का स्मरण करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
जितिया व्रत कहां ज्यादा मनाया जाता है?
जितिया व्रत मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश यानी पूर्वांचल में विशेष रूप से लोकप्रिय है। इसके अलावा नेपाल के तराई क्षेत्रों में भी इस पर्व को श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
मैथिली, भोजपुरी और थारू समुदायों में इस पर्व से जुड़ी अलग-अलग लोक परंपराएं देखने को मिलती हैं। नेपाल में इसे कई जगह जितिया पावनी के नाम से भी जाना जाता है।
जितिया व्रत में क्या-क्या किया जाता है?
जितिया की पूजा की विधि और सामग्री क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर पूजा में इन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है:
- कुश, मिट्टी, गोबर
- सुपारी, लौंग और इलायची
- सरसों का तेल
- दही और चूड़ा, चावल
- चंदन
- फल और प्रसाद
- पूजा के लिए धागा
- श्रृंगार की सामग्री
कई जगह भगवान जीमूतवाहन की प्रतीकात्मक प्रतिमा बनाकर पूजा करने की परंपरा है।
जितिया व्रत का पारण कब होगा?
जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026, रविवार को किया जाएगा।
अलग-अलग पंचांग और क्षेत्रीय परंपराओं में पारण के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार अष्टमी तिथि 4 अक्टूबर की सुबह समाप्त होती है और उसके बाद पारण किया जाता है। इसलिए व्रत रखने वालों को अपने स्थानीय पंचांग या परिवार की परंपरा के अनुसार पारण का सही समय देखना चाहिए।
जितिया व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार जितिया व्रत मातृत्व के त्याग, प्रेम और संतान के प्रति समर्पण का प्रतीक है। माना जाता है कि इस व्रत के माध्यम से माताएं अपनी संतान की सुरक्षा, दीर्घायु और सुखी जीवन के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं।
जितिया से जुड़ी लोककथाओं में राजा जीमूतवाहन के त्याग को विशेष स्थान दिया गया है। उनकी कथा त्याग, करुणा और दूसरों के जीवन की रक्षा करने का संदेश देती है।
जितिया व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
- व्रत से पहले शरीर को पर्याप्त आराम दें।
- नहाय-खाय के दिन सात्विक भोजन करें।
- पूजा और व्रत की सामग्री पहले से तैयार रखें।
- व्रत के दौरान अपनी स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखें।
- किसी बीमारी, गर्भावस्था या कमजोरी की स्थिति में निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
- पारण अपने स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें।
निष्कर्ष
जितिया व्रत 2026 में 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। 2 अक्टूबर को नहाय-खाय से इसकी शुरुआत होगी और 4 अक्टूबर को पारण के साथ व्रत पूरा होगा। यह पर्व विशेष रूप से संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना से जुड़ा है। निर्जला व्रत इसकी प्रमुख परंपरा है, लेकिन स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए व्रत के नियमों का पालन करना जरूरी है।
जितिया के तुरंत बाद पितृ पक्ष का समापन और फिर शारदीय नवरात्रि 2026 की तैयारी शुरू हो जाएगी — अक्टूबर का यह महीना लगातार व्रत-त्योहारों से भरा रहेगा।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और उपलब्ध पंचांग गणनाओं पर आधारित है। अलग-अलग शहरों और पंचांगों में समय में अंतर हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
जितिया व्रत 2026 कब है?
जितिया व्रत 2026 में 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। नहाय-खाय 2 अक्टूबर को और पारण 4 अक्टूबर को होगा।
जितिया व्रत में पानी क्यों नहीं पीते?
जितिया एक निर्जला व्रत है — धार्मिक मान्यता के अनुसार माताएं संतान की लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना से पूरे दिन-रात अन्न और जल दोनों का त्याग करती हैं। पारण के बाद ही व्रत खोला जाता है।
जितिया व्रत का पारण कब होगा?
जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026, रविवार को किया जाएगा। सटीक समय अष्टमी तिथि समाप्त होने और स्थानीय पंचांग के अनुसार तय करें।
जितिया व्रत में किस भगवान की पूजा होती है?
जितिया व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। व्रत कथा में राजा जीमूतवाहन के त्याग और परोपकार की कहानी सुनाई जाती है।
जितिया व्रत मुख्य रूप से कहां मनाया जाता है?
यह व्रत बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) में विशेष रूप से लोकप्रिय है, साथ ही नेपाल के तराई क्षेत्रों में भी श्रद्धा से मनाया जाता है।
क्या गर्भवती या बीमार महिलाएं निर्जला व्रत रख सकती हैं?
निर्जला उपवास हर व्यक्ति के लिए उचित नहीं हो सकता। गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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