“ईश्वर के नाम पर किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए” : लंदन में ‘हाउस ऑफ़ ऑल फेथ्स एंड कम्युनिटीज’ (HOFAC) का शुभारंभ
6 नवंबर 2026 | लंदन नए वैश्विक संगठन ने सभी धर्मों के नेताओं से अपने समुदायों के प्रति ज़िम्मेदारी निभाने और केवल उनके शब्दों से नहीं, बल्कि उनके कार्यों के आधार पर जवाबदेही तय करने का आह्वान किया।
लंदन के सिटी क्षेत्र स्थित सेंट एथेलबर्गा सेंटर फॉर रिकंसिलिएशन एंड पीस में रविवार को ‘हाउस ऑफ़ ऑल फेथ्स एंड कम्युनिटीज’ (HOFAC) का आधिकारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर ब्रिटेन और दुनिया के विभिन्न देशों से आए धर्मगुरु, सामुदायिक नेता, राजनयिक और शांति दूत एक मंच पर एकत्र हुए।
प्रसिद्ध समाजसेवी और मानवतावादी ब्रह्मऋषि मोहनजी द्वारा स्थापित HOFAC एक ऐसा सामूहिक मंच है, जो एक मूल सिद्धांत पर आधारित है—ईश्वर, आस्था या धर्म के नाम पर किसी भी व्यक्ति, जीवित प्राणी, समुदाय या संस्कृति को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।
इस संगठन का कार्य तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—जिम्मेदारी, जवाबदेही और सम्मान।
‘नीड ऑफ द आवर : द लीडर्स रिस्पॉन्सिबिलिटी’ (समय की मांग : नेताओं की ज़िम्मेदारी) विषय पर आयोजित यह कार्यक्रम इंटरफेथ वीक (8 से 15 नवंबर) की प्रस्तावना के रूप में आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में स्कॉटलैंड, बेल्जियम, न्यूयॉर्क और सर्बिया से अतिथि पहुंचे, जबकि दुनिया भर से 200 से अधिक लोगों ने ऑनलाइन प्रसारण के माध्यम से इसमें भाग लिया।
“कार्यक्रम का आयोजन स्थल भी अपने आप में एक विशेष संदेश दे रहा था। सेंट एथेलबर्गा चर्च एक मध्यकालीन चर्च था, जिसे 1993 में IRA के बम विस्फोट में नष्ट कर दिया गया था। बाद में इसे पुनर्निर्मित कर मेल-मिलाप और शांति के केंद्र के रूप में विकसित किया गया। यह स्थान ऐसे आंदोलन की शुरुआत के लिए उपयुक्त था, जिसका उद्देश्य धर्म और आस्था के माध्यम से समाज में शांति स्थापित करना है, न कि विभाजन और नुकसान पहुंचाना।
केवल फोटो खिंचवाने का मंच नहीं होगा HOFAC
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मोहनजी ने बताया कि HOFAC की स्थापना का विचार उन्हें विभिन्न अंतरधार्मिक सम्मेलनों में वर्षों तक भाग लेने के अनुभव से आया। उन्होंने देखा कि इन सम्मेलनों में बड़े-बड़े भाषण तो होते हैं, लेकिन उनके बाद ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
मोहनजी ने कहा, “यदि आप किसी भी प्रकार के नेता हैं, भले ही केवल दस लोग आपकी बात सुनते हों या आपका अनुसरण करते हों, तब भी आप ज़िम्मेदार हैं। अपने आचरण के लिए भी और दुनिया में आपके अनुयायियों के आचरण के लिए भी। HOFAC केवल फोटो खिंचवाने के लिए बैठकें नहीं करेगा। हम स्वयं कार्य करेंगे और अपने कार्यों से दूसरों को प्रेरित करेंगे।”
न्यूयॉर्क में सर्बिया गणराज्य के महावाणिज्यदूत और HOFAC के शांति दूत महामहिम व्लादिमीर बोजोविच ने भी इस विचार का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि HOFAC ज़िम्मेदारी, कार्रवाई और वास्तविक गतिविधियों का मंच बनेगा, न कि साल में एक बार आयोजित होने वाला सम्मेलन।”
मानवतावादी संस्था ACT Foundation की ग्लोबल प्रेसिडेंट देवी मोहन ने अपने गृह देश सर्बिया के नोवी साद रेलवे स्टेशन हादसे की दूसरी बरसी पर उन लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने इस दुर्घटना में अपनी जान गंवाई थी। उन्होंने उन विद्यार्थियों के शांतिपूर्ण आंदोलन का भी उल्लेख किया, जिसने सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देवी मोहन ने कहा, “यह आंदोलन किसी के खिलाफ़ नहीं, बल्कि बेहतर बदलाव के लिए था और इसे बिना किसी हिंसा के पूरा किया गया।”
स्कंद वेल के स्वामी सूर्यनंद, जो HOFAC के संस्थापक ट्रस्टियों में शामिल हैं, ने कहा, “प्रेम की अनुभूति जीवन की सेवा से होती है। प्रेम की वास्तविक पहचान कर्मों से होती है।”
कार्यक्रम में नई दिल्ली से श्री गोस्वामी सुशील जी महाराज का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया। वे भारतीय सर्व धर्म संसद के राष्ट्रीय संयोजक और HOFAC के प्रथम सलाहकार हैं। भारतीय सर्व धर्म संसद को भारत का सबसे बड़ा अंतरधार्मिक मंच बताया गया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा, “आपसी सम्मान, ज़िम्मेदारी, जवाबदेही और सार्थक कार्यों के माध्यम से धर्म एवं समुदायों के नेताओं को एक साथ लाना वास्तव में सराहनीय पहल है। मेरी कामना है कि HOFAC एकता, शांति और मानवता के लिए एक सार्थक वैश्विक मंच के रूप में विकसित हो।”
अजमेर शरीफ़ दरगाह के हाज़ी सैयद सलमान चिश्ती, जो HOFAC के शांति दूत भी हैं, ने अपने संदेश में कहा, “इस मंच को ऐसा स्थान बनाएं, जहां हम बोलने से पहले सुनें, उपदेश देने से पहले कार्य करें और निर्णय सुनाने से पहले घावों को भरने का प्रयास करें।”
नेताओं की जिम्मेदारी पर विशेष परिचर्चा : मौन बहुसंख्यक को सक्रिय करने का आह्वान
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘द लीडर्स रिस्पॉन्सिबिलिटी’ विषय पर आयोजित परिचर्चा रही। इसका संचालन HOFAC के CEO क्रिस्टोफर ग्रीनवुड ने किया। इस परिचर्चा को HOFAC के पहले पॉडकास्ट के रूप में भी रिकॉर्ड किया गया।
विभिन्न धार्मिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन प्रमुख वक्ताओं ने इस बात पर चर्चा की कि वास्तविक जीवन में नेतृत्व की जिम्मेदारी का क्या अर्थ है।
परिचर्चा में एक महत्वपूर्ण विचार उभरकर सामने आया कि समाज के उस बड़े वर्ग को जागरूक और सक्रिय करने की जरूरत है, जो शांति और सद्भाव में विश्वास तो रखता है, लेकिन अक्सर चुप रहता है।
GPS नेटवर्क के निदेशक जेरेमी वूटलिफ ने अपने अभियान को ‘मौन बहुसंख्यक को जगाने’ का प्रयास बताया। GPS नेटवर्क विभिन्न धर्मों को मानने वाले और किसी धर्म को न मानने वाले लोगों को एक साथ जोड़ता है। इसका उद्देश्य आम लोगों को अपने समुदायों में नफ़रत और कट्टरता के खिलाफ व्यावहारिक कदम उठाने के लिए सक्षम बनाना है।
उन्होंने कहा, “मेरे विचार में यह अद्भुत संस्थान जिस चीज़ को एक साथ ला रहा है, वह है नागरिक समाज की सामूहिक क्षमता और मजबूती। हमें इसे विकसित करना होगा, ताकि हम केवल अपने विचारों में ही मज़बूत न हों, बल्कि अपने कार्यों में भी मज़बूत बनें।”
स्कॉटिश हिंदू फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. ऋचा सिन्हा MBE ने मोहनजी को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इस तरह के मंच की बेहद आवश्यकता है। उन्होंने HOFAC का स्वागत ऐसे मंच के रूप में किया, जहां कठिन सवाल पूछे जाएंगे, भले ही वे सवाल लोकप्रिय हों या नहीं। उनका कहना था कि नेताओं को आलोचना या अलोकप्रिय विचारों से डरना नहीं चाहिए। असहमति होने के बावजूद संवाद के दरवाजे खुले रखने चाहिए। उन्होंने कहा,
“नेतृत्व की बुनियाद लोगों की स्वीकृति हासिल करने के बजाय अपने उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्धता पर आधारित होनी चाहिए।”
स्कन्द वेल के 40 वर्षों से संन्यासी जीवन जी रहे स्वामी सूर्यनंद ने नेताओं से आग्रह किया कि वे अपनी पहचान किसी के विरोध के आधार पर न बनाएं। इसके बजाय उन मूल्यों पर बातचीत को आगे बढ़ाएं, जो सभी को एक-दूसरे से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा, “मानवीय दयालुता वह भावना है, जिससे समाज का मौन बहुसंख्यक भी जुड़ाव महसूस करता है। हर व्यक्ति इसे समझ सकता है।”
ब्रिटिश संस्कृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने पर ज़ोर
HOFAC का मानना है कि ब्रिटेन में धार्मिक और सामुदायिक जीवन को वहां की मौजूदा संस्कृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलना चाहिए, न कि उसे बदलने के उद्देश्य से आगे बढ़ना चाहिए। संगठन के अनुसार, संस्कृति किसी समाज की जड़ों का प्रतिनिधित्व करती है। जब ये जड़ें कमज़ोर होती हैं या खो जाती हैं, तो अगली पीढ़ी अपनी पहचान और विरासत से दूर होने लगती है और उसे गुमराह करना आसान हो जाता है।
HOFAC के CEO क्रिस्टोफ़र ग्रीनवुड ने कहा, “हम ऐसा मंच नहीं बनाना चाहते थे, जहां केवल बातें होती रहें। हमारा उद्देश्य विभिन्न समुदायों के नेताओं को एक साथ लाना और समाज में उनके द्वारा किए जा रहे वास्तविक कार्यों को सामने लाना था।”
अब अमेरिका और UAE में भी होगा HOFAC का विस्तार
लंदन में सफल शुभारंभ के बाद HOFAC अब अपने वैश्विक विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आगामी कुछ सप्ताह में न्यूयॉर्क में HOFAC की एक शाखा का पंजीकरण कराया जाएगा। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भी इसकी शाखा स्थापित करने के लिए रुचि व्यक्त की गई है।
अब संगठन ऐसे सदस्यों को अपने साथ जोड़ेगा, जो इसके मूल सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हों। इसमें यह भी शामिल है कि यदि उनके अपने समुदायों में कोई गलत कार्य समाज या दूसरे लोगों को नुकसान पहुंचाता है, तो वे उसके खिलाफ आवाज़ उठाएं और उसकी निंदा करें।
एक प्रतिनिधि संस्था के रूप में HOFAC विभिन्न नगर परिषदों, सरकारों और संगठनों को अपने विचारों और कार्ययोजनाओं से संबंधित पत्र भेजेगा। इसके साथ ही शिक्षा, जागरूकता और संस्कृति के क्षेत्र में विभिन्न कार्यक्रम विकसित किए जाएंगे।
कार्यक्रम का पूरा वीडियो YouTube पर उपलब्ध है: https://www.youtube.com/watch?v=TZ5xHyAOIpk
HOFAC के बारे में
हाउस ऑफ ऑल फेथ्स एंड कम्युनिटीज (HOFAC)डेम स्कॉटलैंड में पंजीकृत एक चैरिटी संस्था है, जिसका पंजीकरण नंबर SC055598 है। इसकी स्थापना मोहनजी ने की है। यह संगठन विभिन्न धर्मों और समुदायों के नेताओं को जिम्मेदारी, जवाबदेही और आपसी सम्मान के आधार पर एक मंच पर लाने का कार्य करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नेता केवल भाषण न दें, बल्कि अपने समुदायों में ठोस कार्य भी करें और अपने कार्यों के प्रति जवाबदेह रहें।
संगठन के ट्रस्टी:
क्रिस्टोफर ग्रीनवुड (CEO)
जज प्रोफेसर माइकल ड्रेपर
स्वामी सूर्यनंद
सलाहकार:
श्री गोस्वामी सुशील जी महाराज
रेवरेंड मदर एग्नेस-मैरियम ऑफ द क्रॉस
गौरांग दास (ISKCON)
डेम ग्लोरिया किंग्स
नाज़ेम अलकुदसी CFA
मोहनजी के बारे में – मोहनजी एक प्रसिद्ध समाजसेवी और मानवतावादी हैं। वे मोहनजी फाउंडेशन के संस्थापक हैं, जो दुनिया के 90 से अधिक देशों में सक्रिय है।
कार्यक्रम के सहयोगी संगठन ‘नीड ऑफ द आवर : द लीडर्स रिस्पॉन्सिबिलिटी’ कार्यक्रम रविवार, 1 नवंबर 2026 को लंदन के सेंट एथेलबर्गा सेंटर फॉर रिकंसिलिएशन एंड पीस, 78 बिशप्सगेट, लंदन EC2N 4AG में आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम का आयोजन मोहनजी फाउंडेशन, स्कांडा वेले और GPS नेटवर्क के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम में शामिल प्रमुख संस्थाएं:
मोहनजी फाउंडेशन: वैश्विक आध्यात्मिक और मानवतावादी संगठन, जो 90 से अधिक देशों में सक्रिय है। यह कार्यक्रम का प्रमुख सहयोगी रहा।
स्कांडा वेले: विभिन्न धर्मों के लोगों की सेवा करने वाला बहुधार्मिक मठवासी समुदाय, जो भोजन, देखभाल और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। इसका प्रतिनिधित्व
स्वामी सूर्यनंद ने किया।
GPS नेटवर्क: विभिन्न संगठनों को जोड़ने वाला नेटवर्क, जो कट्टरता और नफरत के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ समुदायों में व्यावहारिक कदम उठाने के लिए लोगों को सक्षम बनाता है। इसका प्रतिनिधित्व निदेशक जेरेमी वूटलिफ ने किया।
स्कॉटिश हिंदू फाउंडेशन: इसकी ओर से अध्यक्ष डॉ. ऋचा सिन्हा MBE शामिल हुईं।
ACT फाउंडेशन: मानवतावादी संस्था, जिसका प्रतिनिधित्व ग्लोबल प्रेसिडेंट देवी मोहन ने किया।
Source – Press Release
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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