दीपावली 2026: 8 नवंबर को मनेगी दिवाली, जानिए लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त, घर और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए अलग-अलग समय
दीपावली पर कब करें मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा? वैदिक यात्रा गुरुकुल, श्रीधाम वृंदावन ने जारी की 22 प्रमुख शहरों की मुहूर्त सूची। दिल्ली में शाम 5:49 से 7:43 बजे तक वृषभ लग्न में पूजा का विशेष अवसर।
नई दिल्ली। देशभर में इस वर्ष दीपावली का पर्व रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। कार्तिक अमावस्या के अवसर पर घरों, मंदिरों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भगवान गणेश और माता महालक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इस वर्ष अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 10:34 बजे प्रारंभ होकर 9 नवंबर को सुबह 11:09 बजे तक रहेगी। ऐसे में प्रदोषकाल में अमावस्या की उपलब्धता के आधार पर 8 नवंबर को दीपावली पूजन का दिन निर्धारित किया गया है।
श्रीधाम वृंदावन स्थित वैदिक यात्रा गुरुकुल शोध केंद्र की ओर से जारी दीपोत्सव 2026: पर्व-निर्णय एवं मुहूर्त के अनुसार, इस वर्ष दीपावली पर घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए अलग-अलग शुभ लग्न निर्धारित किए गए हैं। गणना में सूर्यास्त, प्रदोषकाल, स्थिर एवं चर लग्न तथा निशीथकाल को आधार बनाया गया है।

दिल्ली में शाम 5:49 से 7:43 बजे तक लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
वैदिक गणना के अनुसार, दिल्ली में दीपावली पर घर में लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए वृषभ लग्न शाम 5:49 बजे से 7:43 बजे तक रहेगा। इसे स्थिर लग्न होने के कारण गृहस्थों के लिए विशेष रूप से श्रेष्ठ माना गया है।
इसके अतिरिक्त दोपहर 1:24 बजे से 2:51 बजे तक कुंभ लग्न, रात 11:31 बजे से अगले दिन 12:24 बजे तक निशीथकाल और मध्यरात्रि 12:19 बजे से 2:37 बजे तक सिंह लग्न का समय भी बताया गया है।
पंचांग के अनुसार, गृहस्थों के लिए वृषभ लग्न सर्वोत्तम है, जबकि साधना और विशेष जप के लिए सिंह लग्न को भी महत्व दिया गया है।
दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए अलग मुहूर्त
दीपावली पर व्यापारियों और कारोबारियों के लिए भी विशेष पूजन समय निर्धारित किया गया है। दिल्ली में दुकान, कार्यालय और बही-खाता पूजन के लिए सुबह 11:42 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक मकर लग्न रहेगा।
इसके बाद शाम 4:15 बजे से 5:49 बजे तक मेष लग्न और रात 9:58 बजे से अगले दिन 12:19 बजे तक कर्क लग्न का समय उपलब्ध रहेगा। जारी मुहूर्त सूची में मेष लग्न के अंतर्गत शाम 5:20 बजे के बाद के समय को अधिक श्रेष्ठ बताया गया है।
पंचांग में सुझाव दिया गया है कि जिन परिवारों को घर और दुकान दोनों स्थानों पर पूजा करनी है, वे पहले व्यापारिक प्रतिष्ठान में मेष लग्न में पूजन कर सकते हैं और उसके बाद घर में वृषभ लग्न में लक्ष्मी-गणेश पूजन कर सकते हैं।
प्रमुख शहरों में लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
8 नवंबर 2026 को घर में लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए वृषभ लग्न के समय इस प्रकार हैं:
| शहर | शुभ पूजन मुहूर्त |
|---|---|
| दिल्ली | शाम 5:49 – 7:43 |
| वृंदावन-मथुरा | शाम 5:49 – 7:44 |
| लखनऊ | शाम 5:37 – 7:33 |
| जयपुर | शाम 5:58 – 7:53 |
| वाराणसी | शाम 5:32 – 7:28 |
| पटना | शाम 5:23 – 7:19 |
| मुंबई | शाम 6:22 – 8:21 |
| पुणे | शाम 6:19 – 8:18 |
| अहमदाबाद | शाम 6:17 – 8:14 |
| भोपाल | शाम 5:57 – 7:55 |
| इंदौर | शाम 6:04 – 8:02 |
| कोलकाता | शाम 5:15 – 7:12 |
| चंडीगढ़ | शाम 5:47 – 7:40 |
| हैदराबाद | शाम 6:02 – 8:02 |
| चेन्नई | शाम 6:02 – 8:03 |
| बेंगलुरु | शाम 6:12 – 8:14 |
सभी समय भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार हैं।
लक्ष्मी पूजन में किन बातों का रखें ध्यान?
वैदिक यात्रा गुरुकुल की ओर से जारी मार्गदर्शन में दीपावली पूजन के लिए संकल्प, गणेश पूजन, कलश स्थापना, श्रीमहालक्ष्मी पूजन, कुबेर एवं बही-खाता पूजन, दीपदान और आरती का क्रम बताया गया है।
पूजन के दौरान श्रीमहालक्ष्मी अष्टक या कनकधारा स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है। श्रद्धालु ‘श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ मंत्र का जप भी कर सकते हैं।
दीपदान के संबंध में बताया गया है कि पहला दीपक भगवान के सामने, उसके बाद तुलसी, रसोई, जल-स्थान, मुख्य द्वार और घर के अन्य कोनों में जलाना चाहिए। एक दीपक रातभर जलाने की परंपरा का भी उल्लेख किया गया है।
धनतेरस से भाई दूज तक पांच दिनों का दीपोत्सव
जारी पर्व निर्णय के अनुसार, दीपोत्सव की शुरुआत शुक्रवार, 6 नवंबर को धनतेरस और यमदीपदान से होगी। शनिवार, 7 नवंबर को श्रीहनुमान जयंती और छोटी दीपावली मनाई जाएगी। रविवार, 8 नवंबर की सुबह नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान तथा शाम को दीपावली और लक्ष्मी-गणेश पूजन होगा।
सोमवार, 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का आयोजन होगा। भाई दूज, यम द्वितीया और चित्रगुप्त पूजा के लिए 10 अथवा 11 नवंबर का उल्लेख किया गया है। इसमें स्थानीय परंपराओं के अनुसार तिथि चुनने की बात कही गई है।
क्यों महत्वपूर्ण है प्रदोषकाल और स्थिर लग्न?
हिंदू धार्मिक परंपराओं में दीपावली के दिन प्रदोषकाल में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। स्थिर लग्न में पूजा करने के पीछे धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में सुख, समृद्धि और स्थिरता की कामना की जाती है।
वृषभ और सिंह स्थिर राशियां हैं। इसी कारण पंचांग परंपरा में दीपावली के अवसर पर इन लग्नों को विशेष महत्व दिया जाता है। वहीं व्यापारिक प्रतिष्ठानों में पूजन के लिए चर लग्न का भी उपयोग किया जाता है।
वैदिक यात्रा गुरुकुल की गणना में स्पष्ट किया गया है कि सभी मुहूर्त सूर्यसिद्धांत आधारित गणना के अनुसार तैयार किए गए हैं। इसमें सूर्यास्त के बाद के प्रदोषकाल, अरुणोदय, अपराह्न और लग्न की अवधि को ध्यान में रखा गया है।
इस प्रकार दीपावली 2026 पर श्रद्धालु अपने शहर के निर्धारित मुहूर्त के अनुसार लक्ष्मी-गणेश पूजन कर सकते हैं। हालांकि अलग-अलग पंचांग पद्धतियों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार मुहूर्त में अंतर संभव है।
स्रोत: दीपोत्सव 2026 – पर्व-निर्णय एवं मुहूर्त (सम्पूर्ण भारत), गणना एवं प्रस्तुति: वैदिक यात्रा गुरुकुल शोध केंद्र, श्रीधाम वृंदावन।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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