शारदीय नवरात्रि को मां दुर्गा की आराधना और साधना का विशेष पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और अपनी दिनचर्या में कई तरह के नियमों का पालन करते हैं। इन्हीं नियमों में एक मान्यता बाल, दाढ़ी-मूंछ और नाखून न काटने की भी है।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर नवरात्रि के दौरान बाल और नाखून काटने से क्यों मना किया जाता है? क्या यह नियम हर किसी के लिए जरूरी है या सिर्फ व्रत और साधना करने वालों के लिए? आइए जानते हैं इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।
नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी?
साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से होगी। इस दिन घटस्थापना के साथ मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा शुरू होगी। नवरात्रि का समापन 20 अक्टूबर 2026 को दशहरे के साथ होगा।
घटस्थापना के लिए प्रातःकाल का शुभ समय सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है। अलग-अलग शहरों में पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
नवरात्रि में बाल और नाखून काटना क्यों माना जाता है वर्जित?
धार्मिक परंपराओं में नवरात्रि के दौरान बाल, दाढ़ी और नाखून न काटने को संयम और साधना से जोड़कर देखा जाता है। इसके पीछे कई धार्मिक और पारंपरिक कारण बताए जाते हैं।
1. संयम और अनुशासन का प्रतीक
नवरात्रि के नौ दिन आत्म-संयम, साधना और अनुशासन के माने जाते हैं। इस दौरान भक्त अपनी रोजमर्रा की कई आदतों पर नियंत्रण रखते हैं।
बाल और नाखून न काटना भी इसी संयम का हिस्सा माना जाता है। इसका उद्देश्य बाहरी सजावट से ज्यादा ध्यान पूजा, जप और साधना पर रखना बताया जाता है।
2. शरीर और मन की शुद्धता
नवरात्रि में व्रत रखने वाले लोग सात्विक भोजन करते हैं और अपने खान-पान के साथ-साथ आचरण में भी शुद्धता रखने का प्रयास करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन दिनों शरीर और मन को साधना के लिए तैयार किया जाता है। इसलिए बाल और नाखून काटने जैसे कामों से दूरी रखने की परंपरा कुछ परिवारों में आज भी जारी है।
3. साधना पर ध्यान केंद्रित करना
नवरात्रि को केवल पूजा का नहीं बल्कि आत्मचिंतन और साधना का समय भी माना जाता है। ऐसे में कई लोग इन नौ दिनों में अपनी दिनचर्या को सरल रखते हैं।
बाल कटवाना, शेविंग या नाखून काटने जैसी व्यक्तिगत सज्जा से जुड़े कामों को रोकना इसी साधना और एकाग्रता की परंपरा से जोड़ा जाता है।
4. पुराने समय से चली आ रही परंपरा
बाल और नाखून न काटने की परंपरा के पीछे व्यावहारिक कारण भी बताए जाते हैं। पुराने समय में आज की तरह आधुनिक और सुरक्षित शेविंग या कटिंग उपकरण उपलब्ध नहीं थे।
कटने या चोट लगने की स्थिति में संक्रमण का खतरा भी रहता था। इसलिए धार्मिक अवसरों और व्रत के दौरान ऐसे कामों से बचने की परंपरा विकसित हुई हो, ऐसा भी माना जाता है।
क्या नवरात्रि में सभी लोगों को बाल नहीं कटवाने चाहिए?
यह नियम मुख्य रूप से धार्मिक मान्यता और पारिवारिक परंपरा से जुड़ा हुआ है। जो लोग नवरात्रि में नौ दिनों का व्रत रखते हैं, घटस्थापना करते हैं या विशेष साधना का संकल्प लेते हैं, वे आमतौर पर इन नियमों का पालन करते हैं।
वहीं, जो लोग व्रत नहीं रख रहे हैं और सामान्य दिनचर्या में हैं, उनके लिए बाल या नाखून काटने पर कोई सार्वभौमिक धार्मिक प्रतिबंध नहीं माना जा सकता।
अगर नौकरी, स्वास्थ्य, व्यक्तिगत स्वच्छता या किसी अन्य जरूरी कारण से बाल या दाढ़ी बनाना आवश्यक हो, तो व्यक्ति अपनी परिस्थिति के अनुसार निर्णय ले सकता है।
क्या नवरात्रि में नाखून काट सकते हैं?
नवरात्रि के दौरान नाखून न काटने की भी धार्मिक मान्यता कई जगहों पर प्रचलित है। खासकर नौ दिनों का व्रत या साधना करने वाले लोग इस नियम का पालन करते हैं।
हालांकि, इसे सभी लोगों पर लागू होने वाला अनिवार्य नियम नहीं माना जाना चाहिए। धार्मिक परंपराएं परिवार, क्षेत्र और साधना की पद्धति के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
नवरात्रि में और किन बातों का रखें ध्यान?
अगर आप नवरात्रि के दौरान व्रत या साधना कर रहे हैं तो इन बातों का ध्यान रखा जा सकता है:
- सात्विक भोजन करें।
- क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें।
- नियमित रूप से मां दुर्गा की पूजा और मंत्र जाप करें।
- घर और पूजा स्थान की साफ-सफाई रखें।
- अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।
- जरूरतमंदों की सहायता और दान करें।
- पूजा-पाठ के साथ अच्छे आचरण पर भी ध्यान दें।
धार्मिक परंपराओं में नवरात्रि के दौरान संयम, शुद्धता और सदाचार को विशेष महत्व दिया जाता है।
अगर बाल या नाखून गलती से काट लिए तो?
अगर किसी व्यक्ति से गलती से नवरात्रि के दौरान बाल या नाखून कट जाएं, तो इसे लेकर डरने की जरूरत नहीं है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भक्त मां दुर्गा से क्षमा प्रार्थना कर सकते हैं और अपनी साधना को श्रद्धा के साथ जारी रख सकते हैं।
नवरात्रि का मूल उद्देश्य श्रद्धा, भक्ति और आत्म-संयम है। इसलिए किसी छोटी गलती को लेकर भयभीत होने के बजाय पूजा और अच्छे आचरण पर ध्यान देना बेहतर माना जाता है।
निष्कर्ष
नवरात्रि में बाल, दाढ़ी और नाखून न काटने की परंपरा मुख्य रूप से धार्मिक मान्यता, संयम और साधना से जुड़ी हुई है। नौ दिनों तक इन चीजों से दूरी रखने का उद्देश्य भक्तों को सादगी और अनुशासन के साथ मां दुर्गा की आराधना पर ध्यान केंद्रित करने से जोड़ा जाता है।
हालांकि, यह नियम हर व्यक्ति के लिए समान रूप से अनिवार्य नहीं है। व्रत, साधना और पारिवारिक परंपरा के अनुसार लोग इसका पालन करते हैं। स्वास्थ्य, नौकरी या व्यक्तिगत जरूरत होने पर अपनी परिस्थिति के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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