सबरीमाला, 17 नवम्बर; सबरीमाला मंदिर को मंडला पूजा के लिए शनिवार शाम पांच बजे खोल दिया गया. पिछली बार छावनी में तब्दील रहे सबरीमाला मंदिर में इस बार शांति है. हालांकि शनिवार को केरल पुलिस ने 10 महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में अंदर जाने से रोक दिया.
पुलिस ने इनके पहचान पत्र को देखने के बाद सबरीमाला मंदिर के अंदर जाने नहीं दिया. यह मामला उस समय सामने आया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को हटा रखा है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला पर 28 सितंबर 2018 के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है, जिसको 7 न्यायमूर्तियों की बड़ी बेंच को भेज दिया गया है.
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अगले फैसले तक सबरीमाला में सभी उम्र की महिलाओं का प्रवेश जारी रहेगा. वहीं, सबरीमाला मंदिर की परंपरा के अनुसार 10 से 50 साल के बीच की उम्र की महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित है.
जिन महिलाओं को सबरीमाला मंदिर के अंदर जाने से रोका गया है, वो आंध्र प्रदेश से आई थीं और श्रद्धालुओं के पहले जत्थे का हिस्सा थीं. केरल पुलिस ने पंबा बेस कैम्प में पहचान पत्र देखने के बाद इन महिलाओं को रोक दिया.
सूत्रों के मुताबिक पुलिस को शक था कि इन महिलाओं की उम्र 10-50 साल के बीच है, जिसके चलते उनको श्रद्धालुओं के जत्थे से अलग कर दिया गया. सूत्रों का कहना है कि जब इन महिलाओं को मंदिर की परंपरा के बारे में बताया गया, तो वो वापस जाने को राजी हो गईं. वहीं, जत्थे में शामिल बाकी लोग आगे बढ़ गए.
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