RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

क्या आप जानते हैं होली मनाने के पीछे के वैज्ञानिक कारण

क्या आप जानते हैं होली मनाने के पीछे के वैज्ञानिक कारण

क्या आप जानते हैं होली मनाने के पीछे के वैज्ञानिक कारण
Visual Archive

क्या आप जानते हैं होली मनाने के पीछे के वैज्ञानिक कारण

क्या आप जानते हैं होली मनाने के पीछे के वैज्ञानिक कारण

होली यानी रंगों और खुशियों का त्यौहार. हिन्दु कैलेंडर के अनुसार होली का त्योहार शिशिर और वसंत ऋतु के बीच में पड़ता है. यह ऋतुएं संधिकाल कहलाती हैं. मौसम में जैसे ही बदलाव होता हमारा शरीर भी उसके अनुरूप ढलने लगता है. हमेशा यह बदलाव सकारात्मक नहीं होते कई बार यह आने वाले बदलाव रोग का कारण भी होते हैं. आइये जानते हैं इसके वैज्ञानिक कारण और इससे बचने के उपाय.

क्या कहता है आयुर्वेद

आयुर्वेद के अनुसार दो ऋतुओं के संक्रमण काल में मानव शरीर रोग और बीमारियों से ग्रसित हो जाता है. आयुर्वेद के अनुसार शीत ऋतु में ठंड के प्रभाव से शरीर में कफ की अधिकता हो जाती है और वसंत ऋतु में तापमान बढ़ने पर कफ के शरीर से बाहर निकलने की क्रिया में कफ दोष पैदा होता है, जिसके कारण सर्दी, खांसी, सांस की बीमारियों के साथ ही गंभीर रोग जैसे खसरा, चेचक आदि होते हैं. इनका बच्चों पर प्रकोप अधिक दिखाई देता है. इसके अलावा वसंत के मौसम का मध्यम तापमान शरीर के साथ मन को भी प्रभावित करता है. इससे आलस्य भी उत्पन्न होता है.

यह भी पढ़ें – होली 2019 : होली से जुड़ी पौराणिक कथाएँ

होली से इसका सम्बन्ध

होली के त्यौहार पर होलिका दहन की परंपरा है। वैज्ञानिक रूप से यह वातावरण को सुरक्षित और स्वच्छ बनाती है क्योंकि सर्दियॉ और वसंत का मौसम के बैक्टीरियाओं के विकास के लिए आवश्यक वातावरण प्रदान करता है.पूरे देश में समाज के विभिन्न स्थानों पर होलिका दहन की प्रक्रिया से वातावरण का तापमान 145 डिग्री फारेनहाइट तक बढ़ जाता है जो बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक कीटों को मारता है.

उसी समय लोग होलिका के चारों ओर एक घेरा बनाते है जो परिक्रमा के रूप में जाना जाता है जिस से उनके शरीर के बैक्टीरिया को मारने में मदद करता है. पूरी तरह से होलिका के जल जाने के बाद, लोग चंदन और नए आम के पत्तों को उसकी राख के साथ मिश्रण को अपने माथे पर लगाते है,जो उनके स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करता है.

इस पर्व पर रंग से खेलने के भी स्वयं के लाभ और महत्व है. यह शरीर और मन की स्वस्थता को बढ़ाता है. घर के वातावरण में कुछ सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करने और साथ ही मकड़ियों, मच्छरों को या दूसरों को कीड़ों से छुटकारा पाने के लिए घरों को साफ और स्वच्छ में बनाने की एक परंपरा है

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

March 19, 2019 3 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

वेद, उपनिषद और हिंदू ग्रंथ – क्या हैं?

वेद, उपनिषद और हिंदू ग्रंथ – क्या हैं? हिंदू धर्म की नींव उसके पवित्र ग्रंथों पर टिकी हुई है। ये ग्रंथ केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं हैं,…

Read now
Hinduism

कांवड़ यात्रा सावन में ही क्यों होती है? Video

कांवड़ यात्रा सावन में ही क्यों होती है? Video भारत में कांवड़ यात्रा एक अनोखी धार्मिक परंपरा है, जो सावन के महीने में लाखों शिवभक्तों को भगवान शिव…

Read now
Hinduism

चातुर्मास में साधु-संत यात्रा क्यों रोक देते हैं? 

चातुर्मास में साधु-संत यात्रा क्यों रोक देते हैं? चातुर्मास — यह शब्द सुनते ही मन में एक पवित्र ठहराव, तप और आत्मचिंतन की छवि बनती है। यह वह…

Read now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *