सिमरिया साहित्य महाकुम्भ : आध्यात्मिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महाआयोजन

बेगुसराय। बिहार के बेगुसराय के सिमरिया में लगा है महामेला। एक ओर साहित्य का मंच सजा है तो दूसरी ओर प्रसिद्ध रामकथा वाचक की रामकथा जारी है। दोनों में ही समाज, मनुुष्य और संस्कृति की बात हो रही है। 1 दिसंबर से शुुरू हुआ साहित्य महाकुम्भ लोगों को जमकर आकर्षित कर रहा है। इस आयोजन में 1 से 9 दिसंबर 2018 दिन के पूर्वाह्न में मोरारी बापू द्वारा रामकथा 2 से 8 दिसंबर 2018 दिन के अपराह्न में, साहित्य महाकुम्भ (साहित्य सत्र एवं सांस्कृतिक ओलम्पिक) का आयोजन किया जा रहा है । इस पूरे आयोजन को मोरारी बापू का स्नेहसिक्त संरक्षण प्राप्त है। आयोजन में भारतीय संस्कृति पर विश्व के कई देशों के संस्कृति प्रेमी अपनी कला का प्रदर्शन कर अभिराम छटा बिखेरेंगें।


सिमरिया में चलने वाले इस आयोजन की भव्यता देखने लायक है। लगभग 16 किमी की लंबाई और चौड़ाई में ये आयोजन संपन्न हो रहा है। 3500 फीट लंबा और 250 फीट चौड़ा पंडाल बनाया गया है। दर्शक कहीं से भी कथा और कार्यक्रमों का आनंद ले सकें इसके लिए 50,000 वर्ग फीट में एलईडी वॉल का निर्माण किय गया है। पंडाल की निर्माण यूएस की कंपनी मेटालिका, जर्मनी की कंपनी भ्योम और दुबई की कंपना हैनज ने किया है। 1500 लोगों के लिए 5 सितारा होटल जैसे इंतजाम 1500 स्विस कॉटेजों में की गई है। इसके अलावा 50 ,000 श्रद्धालुओं के भी ठहरने की व्यवस्था की जा रही है । पूरे आयोजन काल में शामिल होने वाले लगभग एक करोड़ श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की तैयारी पूरी कर ली गयी है ।







मोरारी बापू की रामकथा में भीड़ ऐसी जुट रही है कि माहौल किसी कुंभ जैसा हो गया है। वहीं श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था कथास्थल के पास ही विशाल पंडाल में की गयी है जहां श्रद्धालु कतारबद्ध हो प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। रोजाना दो से चार लाख लोग यहां भोजन ले रहें हैं। मोरारी बापू के रामकथा सुनने और साहित्य महाकुंभ की छटा देखने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं का पहुंचना सड़क व रेल मार्ग से जारी है।
हर शाम सिमरिया में होता है सांस्कृतिक आयोजन
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मभूमि सिमरिया में हो रहे ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए भी लोगों की भीड़ जुट रही है। शाम होते ही पूरा सिमरिया धाम दुधिया रोशनी से सराबोर हो जाता है। यहां शाम को हर दिन सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। कई किलोमीटर में फैला यह महाकुंभ सचमुच स्वर्गलोक जैसा दिखायी पड़ता है।

Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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