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परमार्थ निकेतन में ’’एक्युपैंचर एवं नैचुरोपैथी’’ चिकित्सा शिविर का शुभारम्भ

परमार्थ निकेतन में ’’एक्युपैंचर एवं नैचुरोपैथी’’ चिकित्सा शिविर का शुभारम्भ

परमार्थ निकेतन में ’’एक्युपैंचर एवं नैचुरोपैथी’’ चिकित्सा शिविर का शुभारम्भ
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परमार्थ निकेतन में ’’एक्युपैंचर एवं नैचुरोपैथी’’ चिकित्सा शिविर का शुभारम्भ

परमार्थ निकेतन में ’’एक्युपैंचर एवं नैचुरोपैथी’’ चिकित्सा शिविर का शुभारम्भ

  • अमेरिका से आये 15 चिकित्सको का दल कर रहा है’’एक्युपैंचर एवं नैचुरोपैथी पद्धति से चिकित्सा
  • चिकित्सकों के दल ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में दीप प्रज्वलित कर किया उद्घाटन
  • सेवा हेतु कोई सीमाएं व सरहदें नहीं बस एक संवेदनायुक्त हृदय चाहिये-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 15 फरवरी। परमार्थ निकेतन द्वारा संचालित स्वामी शुकदेवानन्द चेरिटेबल अस्पताल में निःशुल्क ’’एक्युपैंचर एवं नैचुरोपैथी’’ चिकित्सा शिविर का शुभारम्भ हुआ। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महराज, अमेरिका से आये प्रसिद्ध एक्युपैंचर एवं नैचुरोपैथी विशेषज्ञ डाॅ सैमी, डाॅ एंजी, डाॅ रवि कौशल एंव अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों ने दीप प्रज्जवलित कर चिकित्सा शिविर का उद्घाटन किया। इस चिकित्सा शिविर के माध्यम से अमेरिका से आये प्रसिद्ध एक्युपैंचर एवं नैचुरोपैथी विशेषज्ञ आठ दिनों तक माँ गंगा के तट पर स्वामी जी के सानिध्य में अपनी सेवायें प्रदान करेंगे। इस दल में एक्युपैंचर, नैचुरोपैथी, योग, मसाज एवं अन्य अनेक विधाओं के विशेषज्ञों ने सहभाग किया। एक्युपैंचर, पुरानी वेदनाओं का शमन करने की बेहतर चिकित्सा पद्धति है। इस पद्धति द्वारा शरीर के विभिन्न बिन्दुओं में सुई चुभाकर दर्द से राहत दिलायी जाती है। इस चिकित्सा से कोई साइडइफेक्ट नहीं होता, एक्युपैंचर के 365 पाॅइंट्स होते है उनमें से कुछ काफी असरदार होते है और डिप्रेशन, सिरदर्द, चक्कर, लकवा, यूटरस, दिमागी असंतुलन, नाक व कान से जुड़ी बीमारियों के लिये बहुत लाभदायक पद्धति है।
प्रसिद्ध एक्युपैंचर विशेषज्ञ डाॅ सैमी ने अमेरिका में पूज्य स्वामी जी से मुलाकात कर आशीर्वाद प्राप्त किया था। स्वामी जी महाराज ने चर्चा के दौरान पहाड़ों की स्थिति एवं चिकित्सा सुविधाओं के विषय में सैमी को अवगत कराया। उसी चर्चा से प्रभावित होकर अमेरिका से एक्युपैंचर एवं नैचुरोपैथी विशेषज्ञों के 15 सदस्यों के दल के साथ वह सेवा हेतु भारत आयेें हैं।


स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’’सेवा कार्य के लिये कोई सीमाएं और सरहदें नहीं होती, उसके लिये तो बस एक संवेदनायुक्त हृदय चाहिये जो दूसरों के दःुखों को समझ सके। संसार में आज लोगों के पास अपने लिये सोचने को वक्त नहीं है और ये सभी अपने वतन को; अपनों को छोड़कर दूसरों को दुःखों से राहत दिलाने के लिये आये है, यही तो सबसे बड़ी साधना है; यही तो पूजा है और ’’मानव सेवा ही माधव सेवा है’’। डाॅ रवि कौशल जी ने बताया अब तक 400 रोगियों ने अपना पंजियन करवाया है तथा प्रतिदिन 50 से 60 रोगियों का परिक्षण किया जायेंगा।


डाॅ सैमी ने कहा कि पहाड़ों की जटिलताओं से भरी जीवनचर्या में पीठ और घुटनों से सम्बंधित समस्यायें अत्यधिक होती। ’’एक्युपैंचर एवं नैचुरोपैथी’’ चिकित्सा पद्धति में इसका बेहतर इलाज सम्भव हैं। उन्होने बताया कि प्रतिदिन दर्द निवारक दवाईयों के सेवन से शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है इसलिये इस चिकित्सा पद्धति को अपनाना अधिक सुरक्षित और कम खर्चीला भी है। चिकित्सा शिविर के उद्घाटन अवसर पर डाॅ सैमी, डाॅ डैन, डाॅ एंजी, मैट लाॅरा, डेनिस, कैथी, एड्रियाना, ब्रिटेट, बायराॅन, स्टेफनी, डेब्रा, बैरोन, शाना, डाॅ रवि कौशल जी, लौरी, एलिस, ट्रीसा, एवं अन्य उपस्थित थे।

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Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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February 15, 2018 3 min read
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