भारत के अलावा अन्य देशों में भी होती है मां सरस्वती की पूजा
मां सरस्वती हिंदू धर्म की प्रमुख देवियों में से एक हैं. वे ब्रह्मा की मानसपुत्री हैं जो विद्या की अधिष्ठात्री देवी मानी गई हैं. इनका नामांतर ‘शतरूपा’ भी है. इसके अन्य पर्याय हैं, वाणी, वाग्देवी, भारती, शारदा, वागेश्वरी इत्यादि. ज्ञान की देवी मानी जाने वाली सरस्वती देवी आराधना केवल भारत और नेपाल में ही नहीं, बल्कि इण्डोनेशिया, बर्मा (म्यांमार), चीन, थाईलैंड, जापान और अन्य देशों में भी होती है. यह भी आपके ध्यान में आया हो कि देवी सरस्वती का सबसे ऊंचा मंदिर भारत में नहीं है! शायद आपको इस बात पर भी हैरत नहीं हो कि संसार में वीणाधारिणी का सबसे खूबसूरत मंदिर भारत में नहीं है.
भारत में ज्ञान की देवी के रूप में जिन चित्रों की पूजा कई वर्षों से की जाती रही है, उसी देवी की पूजा एशियाई देश जापान में भी की जाती है. जापान में सरस्वती के कई मंदिर हैं. सनातन धर्म में पूजे जाने वाले कई देवी-देवताओं जैसे गणेश, इंद्र और लक्ष्मी की पूजा वहाँ वर्षों से की जाती रही है. जापान में उन देवों की भी पूजा की जाती है जिन्हें सनातन धर्म के लोग शायद बिसर चुके हैं.
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6ठवीं 7वीं शताब्दी से जापान में बेंजाइटन देवी की पूजा शुरू हुई जो वर्तमान में भी जारी है. बेंजाइटन देवी विशाल कमल के फूल पर विराजित रहती हैं. उनके हाथ में जापान की परंपरागत वीणा जिसे ‘वीवा'( वीणा जैसा ही वाद्य यंत्र) मौजूद रहता है. हिंदू देवी सरस्वती संगीत और बुद्धि की देवी हैं, तो जापानियों की बेंजाइटन देवी जल, समय, शब्द, भाषण, वाक्पटुता, संगीत और ज्ञान की देवी हैं.
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जापान में सरस्वती को ‘बेंजाइटन’ कहते हैं. जापान में उनका चित्रन हाथ में एक संगीत वाद्य लिए हुए किया जाता है. जापान में वे ज्ञान, संगीत तथा ‘प्रवाहित होने वाली’ वस्तुओं की देवी के रूप में पूजित हैं. जिस तरह सरस्वती के हाथों में वीणा होती है उसी तरह वो अपने हाथों में जापानी वाद्य यंत्र बिवा लिये होती है.
देवी बेंजाइटन या सरस्वती जापान में दो रूपों में पूजी जाती है. एक रूप में उनके आठ हाथ हैं तो पूजी जाने वाली दूसरे रूप में उनके कवल दो हाथें हैं. दो हाथों वाले रूप में वो वीणा जैसी एक जापानी वाद्ययंत्र बिवा धारण किये हुए है.
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माना जाता रहा है कि सरस्वती छठी से आठवीं शताब्दी के बीच जापान आई. वहां उनका आगमन चीन के रास्ते हुआ.सरस्वती या बेंजाइटन की सबसे ऊंचा और आकर्षक माने जाने वाला मंदिर जापानी शहर ओसाका के बेनटेन्शु में है.
तकरीबन सरस्वती की सौ मंदिरों में यह संसार की सबसे ऊंचा और आकर्षक मंदिर है.
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