किस शुभ मुहूर्त में कर सकते हैं पितरों को विदा
जानिये सर्व पिृत अमावस्या 2017 को पितृ विसर्जन, किस शुभ मुहूर्त में करें ??
विसर्जन का शाब्दिक अर्थ हैं पूर्ण होना, समापन या अंत। इसी प्रकार पितृविसर्जन मूलतः पितृपक्ष की समापन बेला हैं।
हमारी सनातन संस्कृति में यह मान्यता है कि पितृपक्ष में पितृ धरा पर उतरते हैं और पितृविसर्जन यानि श्राद्ध पक्ष की अमावस्या को पितृ हमसे विदा हो जाते हैं।
कहते हैं कि जो अपने अस्तित्व को सम्मान देकर पितृ को प्रतीक स्वरूप अन्न जल प्रदान करता है उससे प्रसन्न होकर पितृ सहर्ष शुभाशिष प्रदान कर अपने लोक में लौट जाते हैं। पर वैज्ञानिक और कुछ आध्यात्मिक अवधारणाएं इस मान्यता की पुष्टि नहीं करती।
वैदिक कर्मकाण्ड इसे दुर्भाग्य को नष्ट करने वाले कर्म के रूप में भी देखता।
पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि अपने परिजनों और पूर्वजों के देहत्याग की तिथि ज्ञात न होने पर या ज्ञात तिथि पर किसी अपरिहार्य कारणों से श्राद्ध न हो पाने, अमावस्या यानि पितृविसर्जन के दिन श्राद्ध का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में प्राप्त होता है। इसके अलावा अकाल मृत्यु से ग्रसित व्यक्तियों का श्राद्ध भी इसी दिन होता है।
यूं तो पितृ से सामान्य आशय पैतृक यानि पिता या उसके परिवार से माना जाता है। लेकिन यदि कोई अपने नाना-नानी का श्राद्ध करना चाहता है, तो यह क्रिया अमावस्या यानि पितृविसर्जन के दिन की जा सकती है।
इस वर्ष पितृविसर्जन यानि अमावस्या यूं तो उज्जैन के समयानुसार 19 सितम्बर, 2017 को दोपहर 11 बजकर 46 मिनट के पश्चात् घटित हो रही है जो 20 सितम्बर, 2017 को सुबह 10 बजकर 44 मिनट तक रहेगी।
चूँकि अमावस्या में सूर्योदय 20 सितम्बर को (वाराणसी में 5.46, पटना, रांची में 5 बजकर 37 मिनट, लखनऊ में 5.55, मथुरा में 6 बजकर 09 मिनट , दिल्ली में 6 बजकर 1 मिनट, और मुंबई में 6 बजकर 27 मिनट पर) होगा, लिहाजा पितृविसर्जन का पर्व मथुरा, बनारस, आगरा, हरिद्वार तथा अन्य धार्मिक स्थल में 19 सितम्बर 2017 को मनाया जायेगा तथा कुछ स्थानो पर 20 सितम्बर को मनाया जायेगा।
उज्जैन के ज्योतिषचार्य पं0 दयानन्द शास्त्री ने बताया कि निर्णय सागर पंचागानुसार सर्वपितृ अमावस्या 19 सितंबर को मनायी जायेगी उसी दिन अन्तिम श्राद्व भी होगा जो जातक श्राद्व करने से वंछित हो गये है वह इस दिन अपने पितरों का श्राद्व कर सकते है ।
मातामय श्राद्व नाना-नानी के श्राद्व 20 सितंबर को किये जाएंगें
पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि अमावस्या तिथि श्राद्व की मध्यान्ह तिथि मानी गयी है और पूर्व दिन अर्थात् 19 सित0 को दोपहर 11ः52 मिनट के बाद अमावस्या तिथि आ रही है तथा दूसरे दिन 20 सित0 को 10ः59 मिनट तक रहेगी इसलिए पहले दिन अमावस्या श्राद्व को शास्त्र सम्मत् बताया गया है तथा श्राद्व निर्णय में भी दोपहर तिथि को मन्याता दी गयी है ।
ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री, उज्जैन।
मोबाईल – 9039390067
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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