मंदिर भगवान विष्णु का पर नाम है बूढा नीलकंठ
काठमांडू के मध्य से 10 किलोमीटर की दूरी पर शिवपुरी हिल के समीप बूढा नीलकंठ मंदिर स्थित है. मंदिर के प्रवेश द्वार की चंद्रशिला के ऊपर पद्मांकन है. उसके पश्चात पैड़ियों के बीच में चतुर्भुजी विष्णु की प्रतिमा स्थानक मुद्रा में स्थापित है. मुख्य द्वार के दरवाजों पर पीतल का पत्रा चढ़ा हुआ है और एक दरवाजे पर भगवान् कार्तिकेय और दुसरे दरवाजे पर भगवान गणेश विराजमान है.

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बूढा नीलकंठ महादेव कहीं नहीं है
मंदिर का नाम बूढ़ा नीलंकठ है तथा शेष शैया पर भगवान विष्णु विराजे हैं, द्वार पर जय विजय की तरह शिव परिवार के उत्तराधिकरी कार्तिकेय एवं गणेश पहरा दे रहे हैं और भगवान विष्णु क्षीर सागर में मजे से आनंद ले रहे हैं. बूढ़ा नीलकंठ महादेव तो कहीं नहीं है. जब बूढा नीलकंठ ही इस स्थान पर नहीं है तो यह नाम इस स्थान के लिए रुढ कैसे हो गया?

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क्या हैं किवदंतियां
बूढ़ा नीलकंठ प्रतिमा की स्थापना के विषय में स्थानीय स्तर पर दो किंवदंतिया प्रचलित हैं, पहली प्रचलित किंवदंती है कि लिच्छवियों के अधीनस्थ विष्णु गुप्त ने इस प्रतिमा का निर्माण अन्यत्र करवा कर 7 वीं शताब्दी में इस स्थान पर स्थापित किया. अन्य किवदन्ती के अनुसार एक किसान खेत की जुताई कर रहा था तभी उसके हल का फ़ाल एक पत्थर से टकराया तो वहाँ से रक्त निकलने लगा. जब उस भूमि को खोदा गया तो इस प्रतिमा का अनावरण हुआ. जिससे बूढ़ा नीलकंठ की प्रतिमा प्राप्त हुई तथा उसे यथास्थान पर स्थापित कर दिया गया. तभी से नेपाल के निवासी बूढ़ा नीलकंठ का अर्चन पूजन कर रहे हैं.

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