जैन धर्म के 400 साल पुराने ग्रंथ का करवाया अनुवाद
जोधपुर, 30 अगस्त; जैनधर्म के चार सौ साल पुराने ग्रंथ श्री ज्योतिषसार: हीरकलश का जयपुर फुट यूएसए के चेयरमैन प्रेम भंडारी ने हिंदी में अनुवाद करवाया है. अब इस ग्रंथ का दिसंबर में जोधपुर में जैन मुनी से विमोचन करवाया जाएगा. ग्रंथ के बारे में प्राकृत भारी अकादमी के संस्थापक एवं मुख्य संरक्षक जयपुर फुट के संस्थापक डी.एस. मेहता ने लिखा है. यह जैन ज्योतिष का विशेष ग्रंथ है, जो प्राकृत भाषा में था. इसे जैन धर्म दर्शन साहित्य के प्रख्यात विद्वान पंडित भगवान दास जैन ने हिंदी में अनुवाद किया. प्राकृत भारती अकादमी ने इस अनुपलब्ध ग्रंथ के पुन: प्रकाशन का निर्णय लिया है. इसकी प्रेरणा आर्थिक सहयोग प्रेम भंडारी से मिला है. भंडारी न्यूयाॅर्क में रह रहे हैं. भंडारी ने ज्योतिष के विविध ग्रंथों का अध्ययन किया है, कई ज्योतिषाचार्यों से चर्चा की है. मेहता लिखते हैं कि भंडारी का कार्यक्षेत्र अलग है, लेकिन जो लोग ज्योतिष के बारे में उनसे सलाह लेते हैं उनके मतानुसार ज्योतिष पर उनका ज्ञान विशिष्ठ है. भंडारी ने जब इस पुस्तक के बारे में सुना तब उन्हाेंने प्राकृत भारती अकादमी से पुस्तक के पुन: प्रकाशन के लिए कहा.
हाल ही में प्रेम भंडारी लोकायुक्त एसएस कोठारी, कर्नाटक कैडर के आईपीएस पीएस संधु के साथ प्रसिद्ध नाकोडा तीर्थ गए थे. वहां ज्ञानशाला के प्राचार्य नरेेंन्द्र कोरडिया की 20 साल की बेटी पूजा के ज्योतिष ज्ञान से प्रभावित होकर 11 हजार रुपए देकर पुरस्कृत किया था, साथ ही कहा है कि पूजा को ज्योतिषाचार्य में पीएचडी कराने का पूरा खर्च उठाएंगे.
प्रेम भंडारी ने बताया कि जैन धर्म के पांच सौ साल पुराने प्राकृत भाषा में लिखे ग्रंथों का अनुवाद कराया जाएगा. इसमें अमेरिका के परफ्यूम व्यवसायी कनक गोलिया अन्य सहयोगी मदद करेंगे.
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