मां कात्यायनी : नवरात्रि की षष्ठम देवी
नवरात्रि के छठे दिन देवी दुर्गा के षष्ठम स्वरूप की उपासना की जाती है। यह दिन शक्ति, संयम, धैर्य और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस आराधना से बृहस्पति के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं और साधक के जीवन में सम्मान, संतुलन तथा शुभता का संचार होता है। इस दिन नारंगी रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। साथ ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए भी यह पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
इस पावन दिन देवी को प्रसन्न करने के लिए शहद का भोग लगाया जाता है। मीठे पान का अर्पण भी शुभ माना गया है। श्रद्धालु भक्ति-भाव से पूजन कर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, साहस और आशीर्वाद की कामना करते हैं।
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देवी का महत्व
यह स्वरूप बृहस्पति ग्रह से जुड़ा माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसकी आराधना से ग्रहजनित बाधाएं कम होती हैं और जीवन में धैर्य, संयम, यश तथा आंतरिक शक्ति बढ़ती है। साधक को सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है और मानसिक स्थिरता भी प्राप्त होती है।
पूजा विधि और भोग
छठे दिन शहद अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। कई भक्त मीठे पान का भोग भी लगाते हैं। श्रद्धा के साथ पूजन, दीप प्रज्वलन, मंत्र जाप और आरती करने से देवी की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। यह उपासना साधक के मन में विश्वास और सकारात्मकता जगाती है।
कल्याणकारी मंत्र
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
सूक्ष्म शक्ति का आध्यात्मिक अर्थ
सूक्ष्म जगत, जो अदृश्य और अव्यक्त है, उसकी सत्ता इसी दिव्य शक्ति से संचालित मानी जाती है। यह स्वरूप उन रहस्यमयी तत्वों का प्रतीक है, जो सामान्य समझ से परे होते हैं। इसी कारण इसे दिव्यता के गूढ़ रहस्यों से जुड़ा हुआ माना जाता है।
क्रोध कब सकारात्मक बल बनता है और कब वह नकारात्मक आसुरी शक्ति का रूप ले लेता है, इन दोनों के बीच गहरा अंतर है। कहा जाता है कि ज्ञानी का क्रोध भी हितकारी हो सकता है, जबकि अज्ञानी का प्रेम भी हानिकारक सिद्ध हो सकता है। यही कारण है कि यह देवी नकारात्मकता का नाश कर जीवन में शुभ ऊर्जा का संचार करने वाली मानी जाती हैं।
छठे दिन की यह आराधना साधक को साहस, धैर्य, संयम और आध्यात्मिक बल प्रदान करती है। उनकी कृपा से मन में स्थिरता आती है और जीवन में शुभता का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी वजह से इस स्वरूप की पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवरात्रि के छठे दिन किस देवी की पूजा की जाती है?
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है।
छठे दिन देवी को कौन-सा भोग लगाया जाता है?
इस दिन देवी को शहद और मीठे पान का भोग लगाया जाता है।
मां कात्यायनी की पूजा का क्या महत्व है?
मां कात्यायनी की पूजा से संयम, धैर्य, साहस, सकारात्मकता और आध्यात्मिक बल की प्राप्ति होने की मान्यता है।
मां कात्यायनी का मंत्र क्या है?
मां कात्यायनी का प्रमुख मंत्र है — ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
लेख – पं. दयानंद शास्त्री, उज्जैन
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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