क्यों कहा जाता है माँ कात्यायनी को महिषासुर मर्दिनी?
नवरात्रि का छठा दिन देवी दुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी को समर्पित है। शास्त्रों में इन्हें अत्यंत शक्तिशाली देवी माना गया है। माँ कात्यायनी को प्रायः महिषासुर मर्दिनी कहा जाता है, क्योंकि इन्होंने असुरों के राजा महिषासुर का वध करके देवताओं को भयमुक्त किया था। यह स्वरूप शक्ति, साहस और विजय का प्रतीक है।
महिषासुर का उत्पात
पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर एक पराक्रमी असुर था जिसे वरदान मिला था कि कोई देवता या दानव उसका वध नहीं कर पाएगा। इस वरदान से अहंकारी होकर उसने तीनों लोकों पर आक्रमण कर दिया। स्वर्गलोक पर कब्ज़ा कर देवताओं को अपमानित किया और धरती पर आतंक मचाने लगा। देवता उसकी शक्ति के आगे असहाय हो गए।
देवताओं की प्रार्थना और शक्ति का जन्म
जब महिषासुर का अत्याचार बढ़ गया, तब सभी देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास पहुँचे। तीनों ने अपनी-अपनी शक्तियाँ मिलाकर एक अद्भुत दिव्य शक्ति का निर्माण किया। उसी दिव्य शक्ति से माँ कात्यायनी का प्राकट्य हुआ। देवी के शरीर से तेज इतना प्रचंड था कि देवता भी उसे देख न सके।
देवी का शस्त्र और रूप
देवताओं ने अपने-अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र माँ को प्रदान किए। शिवजी का त्रिशूल, विष्णु का चक्र, इंद्र का वज्र, वरुण का शंख और अन्य सभी देवताओं का बल माँ को मिला। देवी सिंह पर सवार हुईं और महिषासुर का अंत करने के लिए युद्धभूमि में पहुँचीं।
महिषासुर वध
कथा के अनुसार, महिषासur कभी भैंस का रूप, कभी शेर, कभी हाथी और कभी मनुष्य का रूप धारण करके युद्ध करता रहा। लेकिन अंततः देवी कात्यायनी ने अपने त्रिशूल और तलवार से उसका वध कर दिया। इस तरह से देवी को “महिषासुर मर्दिनी” की उपाधि मिली।
प्रतीकात्मक महत्व
महिषासुर अज्ञान, अहंकार और नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। देवी कात्यायनी द्वारा उसका वध यह दर्शाता है कि सच्चाई और धर्म की रक्षा के लिए शक्ति और साहस आवश्यक है। माँ कात्यायनी की उपासना से व्यक्ति को जीवन में साहस, आत्मविश्वास और विजय की प्राप्ति होती है। विशेषकर विवाह योग्य कन्याएँ माँ कात्यायनी की आराधना करती हैं, क्योंकि माना जाता है कि देवी उनके मार्ग की बाधाएँ दूर कर योग्य जीवनसाथी प्रदान करती हैं।
इस प्रकार, माँ कात्यायनी को महिषासुर मर्दिनी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने असुरों के राजा महिषासुर का संहार कर तीनों लोकों में धर्म की स्थापना की थी। नवरात्रि के छठे दिन इनकी पूजा करने से भक्त को शक्ति, साहस और जीवन के संघर्षों पर विजय प्राप्त होती है।
~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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