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कङ्कणाकृति सूर्य ग्रहण 🌑 : ग्रहण में क्या करें और क्या नहीं ? : शहरों का समय (स्पर्श, मध्य, मोक्षकाल)

कङ्कणाकृति सूर्य ग्रहण 🌑 : ग्रहण में क्या करें और क्या नहीं ? : शहरों का समय (स्पर्श, मध्य, मोक्षकाल)

कङ्कणाकृति सूर्य ग्रहण 🌑 : ग्रहण में क्या करें और क्या नहीं ? : शहरों का समय (स्पर्श, मध्य, मोक्षकाल)
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कङ्कणाकृति सूर्य ग्रहण 🌑 : ग्रहण में क्या करें और क्या नहीं ? : शहरों का समय (स्पर्श, मध्य, मोक्षकाल)

खण्डग्रास सूर्य ग्रहण  ( कङ्कणाकृति सूर्य ग्रहण 🌑 )

संवत् 2077, आषाढमास, कृष्णपक्ष, अमावस्या, रविवार
( दिनांक : 21 जून 2020 )

धर्मशास्त्र के द्वारा अनुप्राणित ( वेदादि शास्त्र द्वारा प्रमाणित ) होने पर ग्रहण जब प्रभाव देने वाले होते हैं, तब ही पूर्णतया सनातन धर्मानुसार उसमें सूतकादि नियमों का पालन किया जाता है ।

ग्रहण का प्रभाव पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक जीव के ऊपर रहता है । मनुष्य की राशि के अनुसार शुभाशुभ फल, आर्थिक, शारीरिक व मानसिक प्रभाव देने वाला होता है । ग्रहण के दौरान भूमण्डल पर अनेक विषाणु, जीवाणु व कीटाणु उत्पन्न होते हैं, जिसके कारण अनेक प्रकार के रोग भी होते हैं ।

सूर्य ग्रहण 2020: जानिए सूर्य ग्रहण का समय और सूतक काल

दिनांक 21/06/2020 का ‘कङ्कणाकृति सूर्यग्रहण’ भारत वर्षीय भूभाग के अलावा म्यांमार, दक्षिणी रूस, मंगोलिया, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया, कोरिया, जापान इंडोनेशिया, पूर्वी आस्ट्रेलिया, नेपाल,पाकिस्तान आदि देशों में भी दृश्य होगा अर्थात् उक्त देशों व वहाँ के प्राणियों पर इसका प्रभाव पड़ेगा । भारतवर्ष के अलग-अलग कुछ शहरों के ग्रहणारम्भ का स्पर्श, मध्य एवं मोक्ष-काल निम्नलिखित है ।

मथुरा-वृन्दावन~
स्पर्श – प्रात: १०:१८ ( 10:18am )
मध्य – मध्याह्न १२:०१ ( 12:01pm )
मोक्ष – अपराह्न ०१:४९ ( 01:49pm )

दिल्ली~
स्पर्श – प्रात: १०:२० ( 10:20am )
मध्य – मध्याह्न १२:०२ ( 12:02pm )
मोक्ष – अपराह्न ०१:४९ ( 01:49pm )

जयपुर~
स्पर्श – प्रात: १०:१५ ( 10:15am )
मध्य – मध्याह्न ११:५६ ( 11:56am )
मोक्ष – अपराह्न ०१:४४ ( 01:44pm )

इन्दौर~
स्पर्श – प्रात: १०:१५ ( 10:15am )
मध्य – मध्याह्न ११:५७ ( 11:57am )
मोक्ष – अपराह्न ०१:४७ ( 1:47pm )

कोलकाता~
स्पर्श – प्रात: १०:४६ ( 10:46am )
मध्य – मध्याह्न १२:३५ ( 12:35pm )
मोक्ष – अपराह्न ०२:१६ ( 02:16pm )

मुम्बई~
स्पर्श – प्रात: १०:०१ ( 10:01am )
मध्य – मध्याह्न ११:३८ ( 11:38pm )
मोक्ष – अपराह्न ०१:२८ ( 01:28pm )

अहमदाबाद~
स्पर्श – प्रात: १०:०३ ( 10:03am )
मध्य – मध्याह्न ११:४२ ( 11:42pm )
मोक्ष – अपराह्न ०१:३२ ( 01:32pm )

हैदराबाद~
स्पर्श – प्रात: १०:१४ ( 10:14am )
मध्य – मध्याह्न ११:५५ ( 11:44am )
मोक्ष – अपराह्न ०१:४४ ( 01:44pm )

बैंगलोर~
स्पर्श – प्रात: १०:१३ ( 10:13am )
मध्य – मध्याह्न ११:४८ ( 11:48am )
मोक्ष – अपराह्न ०१:३२ ( 01:32pm )

विशाखापट्टनम~
स्पर्श – प्रात: १०:३८ ( 10:38am )
मध्य – मध्याह्न १२:२६ ( 12:26pm )
मोक्ष – अपराह्न ०२:१० ( 02:10pm )

पटना~
स्पर्श – प्रात: १०:३७ ( 10:37am )
मध्य – मध्याह्न १२:२५ ( 12:25pm )
मोक्ष – अपराह्न ०२:१० ( 02:10pm )

रायपुर~
स्पर्श – प्रात: १०:२५ ( 10:25am )
मध्य – मध्याह्न १२:११ ( 12:11pm )
मोक्ष – अपराह्न ०१:५९ ( 01:59pm )

विभिन्न राशियों पर ग्रहण का सामान्य रूप से निम्न प्रभाव रहेगा ।

मेष – लक्ष्मी प्राप्ति
वृष – क्षति
मिथुन – घात
कर्क – हानि
सिंह – लाभ
कन्या – सुख
तुला – मानहानि
वृश्चिक – मृत्युतुल्य कष्ट
धनु – स्त्रीपीड़ा
मकर – सुख
कुम्भ – चिन्ता
मीन – व्यथा

ग्रहण में क्या न करें ?

1. ग्रहणकाल में देवालयों में प्रवेश न करें ।
2. देव प्रतिमा का स्पर्श न करें ।
3. गर्भवती स्त्री ग्रहण दर्शन न करें ।
4. ग्रहणकाल में भोजन न करें ।
5. अशुभ प्रभावकारी राशि वाले व्यक्ति ग्रहणकाल में विशेष रूप घर से बाहर न रहें ।

ग्रहण में क्या करें ?

1. ग्रहणकाल में दान आदि धर्मकृत्य करें, जो विशेष फल देने वाला होता है ।
2. ग्रहणकाल में भगवन्नाम, गुरुमंत्र आदि जप करें, जिसका कई गुना फल होता है ।
3. सत्संग करें, जिससे अन्त:करण की विशेष रूप से शुद्धि होती है ।
4. ग्रहण के बाद स्नानादि कार्य अवश्य करें ।
5. ग्रहणकाल के बाद स्नानादि से शुद्ध होकर गंगाजल छिड़कें ।

विशेष: सूर्यग्रहण में लगने वाला सूतक ग्रहण के आरम्भ ( स्पर्श ) काल से 12 घण्टे पहले लगता है । अत: अपने-अपने स्थान के ग्रहणकाल के समयानुसार सूतक-समय की गणना कर लें तथा सूतक से पूर्व ही चौका ( रसोई ) अथवा अन्य पवित्र स्थान पर रखी वस्तु आदि को ग्रहण के प्रभाव से बचाने के लिए वहाँ कुशा रख दें ।

नोट: उपरोक्त ग्रहण का विवरण वैदिक यात्रा शोधकेन्द्र के द्वारा प्रमाणित है । दिनांक 21/06/2020 के होने वाले सूर्यग्रहण में सूतकादि नियमों का पालन अवश्य करें ।

गणना, संकलन – भागवतकिंकर अनुरागकृष्ण शास्त्री जी, वैदिक यात्रा परिवार 

https://www.vaidikyatra.org/

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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June 19, 2020 4 min read
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