विश्व विख्यात आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा से संतों ने की भेंटवार्ता
ऋषिकेश, 23 सितम्बर। स्वामी गुरू शरणानन्द जी के कार्ष्णि आश्रम, रमणरेती गोकुल में विश्व विख्यात आध्यात्मिक गुरू परम पावन दलाई लामा जी, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, स्वामी ज्ञानानन्द जी, स्वामी जन्मदेव जी, अनुराग कृष्ण शास्त्री जी और अन्य पूज्य संतों की रमणरेती आश्रम, गोकुल में मधुर भेंटवार्ता हुई। पूज्य संतों ने रमणरेती आश्रम में प्रातःकाल रूद्राभिषेक किया तत्पश्चात यमुना जी की आरती की।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने दलाई लामा जी को रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। दोनों पूज्य संतों ने वैश्विक स्तर पर एकता, शान्ति और सद्भाव स्थापित करने हेतु चर्चा की। गुरू शरणानन्द जी ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुये कहा कि आपस में करूणा, दया और प्रेम बनायें रखें। साथ ही कहा कि भारतीय अध्यात्म में विश्व की सभी समस्याओं का हल समाहित है। अध्यात्म से तात्पर्य स्वयं का स्व के बारे में जानना अर्थात आत्मप्रज्ञ होना। स्व को जानकर नियंता के द्वारा बनायी सृष्टि की सेवा करना और उसे प्रेम करना ही जीवन का सार है।
यह भी पढ़ें-धर्मगुरु दलाई लामा पहुंचे बोधगया, त्रिपिटक बौद्ध ग्रन्थ पर आयोजित विशेष सेमिनार में लेंगे भाग

दलाई लामा जी ने कहा कि ’प्रकृति के सान्निध्य में आप प्रेम, करूणा और दया के साथ एक सुन्दर सृष्टि का निर्माण कर सकते है।हम मनुष्य प्रकृति से ही जन्मे है इसलिये हमारा प्रकृति के खिलाफ जाने का कोई कारण नहीं बनता। पर्यावरण, धर्म, नीतिशास्त्र और नैतिकता का मामला नहीं है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली विलासिताओं के बिना हम रह सकते है लेकिन हम प्रकृति के विरूद्ध जाते है तो हम जिंदा नहीं रह सकते।’ उन्होने कहा कि मनुष्य सबसे प्रेमपूर्वक रिश्ता बनाकर ही शान्ति के साथ जीवन यापन कर सकता है।



स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि पूज्य दलाई लामा जी ने पूरे विश्व को करूणा, प्रेम और दया का संदेश दिया है।अपना देश छोड़कर भारत में रहे परन्तु प्यार बांटना जारी रखा। उन्होने कहा कि मेरा धर्म बहुत सरल है मेरा धर्म है दयालुता, साथ ही कहा कि हम धर्म और ध्यान के बिना रह सकते है परन्तु मानव स्नेह के बिना नहीं रह सकते। करूणा, दया और प्रेम बांटने से स्वयं को भी आन्तरिक प्रसन्नता मिलती है। कई बार हम पूरा जीवन शेल्फ भरने में लगा देते है ( अलमारियों के खाने भरना) लेकिन शेल्फ भरते-भरते हम सेल्फ को, खुद को खाली छोड़ देते है। स्वामी जी ने कहा की शेल्फ ( अलमारी) और सेल्फ ( स्वंय ) को भरते हुये जीवन को आगे बढ़ाये इसी में जीवन का आनन्द है।
Editorial Review Note
Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.