राम जन्मभूमि पर मंदिर हेतु कानून बनाए केंद्र सरकार: मोदी को संतों का आदेश


- श्री राम जन्म भूमि पर भव्य मंदिर निर्माण हेतु संसद में कानून बनाए मोदी सरकार।
नई दिल्ली. अक्टूबर 05, 2018
आज दिल्ली में हुई संत उच्चाधिकार समिति की बैठक में श्री राम जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष पूज्य महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज की अध्यक्षता में हुई संतों की उच्चाधिकार समिति की बैठक में सभी उपस्थित संतों ने एक स्वर से मोदी सरकार को आदेश दिया कि वह जन्म भूमि पर अपने बचनानुसार संसदीय कानून बना कर राम मंदिर के मार्ग की बाधाओं को दूर करे।
पूज्य स्वामी वासुदेवानंद जी व पूज्य श्री विश्वेशतीर्थ महाराज ने तो स्पष्ट आदेश ही दिया कि प्रधानमंत्री आवश्यकता पड़ने पर लोक सभा व राज्य सभा का संयुक्त अधिवेशन बुलाकर कानून बनाएं और जन्म भूमि हिन्दुओं के हवाले करें. इस बैठक में रामानान्दाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य जी ने स्पष्ट कहा कि जो इस बिल का विरोध करेगा, देश के संत उसे उखाड़ फेंकेंगे. युग पुरुष परमानंद जी महाराज ने भी इस मत का समर्थन करते हुए कहा कि बिल आने पर ही मालूम चलेगा कि असली राम भक्त कौन है. पूज्य डा राम विलास वेदांती, पूज्य चिदानंद पुरी (केरल), स्वामी चिन्मयानंद जी व स्वामी अखिलेश्वरानन्द जी सहित सम्पूर्ण देश से आए जगत गुरुओं महा-मण्डलेश्वरों व अन्य धर्माचार्यों ने भी अपने – अपने विचार व्यक्त करते हुए कानून बनाने की मांग का पुरुजोर समर्थन किया. बैठक के बाद महंत नृत्य गोपाल दास जी के नेतृत्व में संतों का एक प्रतिनिधि मण्डल राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद से भी मिला।

राष्ट्रपति को सम्बोधित इस ज्ञापन में कहा गया है कि महामहिम “अपनी सरकार को कहें कि वह अब कानून बनाकर राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त करें। आज की परिस्थिति में यही समाधान उपयुक्त लगता है”।
बैठक में सन्तों ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें मन्दिर निर्माण के लिए कानून की मांग के अतिरिक्त एक विशाल जन जागरण अभियान की भी घोषणा की. इस अभियान में निम्नलिखित कार्यक्रम रहेंगे :
1. अक्टूबर माह में राज्यश : स्थानीय राम भक्तों का प्रतिनिधि मंडल सभी राज्यों के राज्यपालों से मिल कर ज्ञापन देकर अनुरोध करेगा कि वे राम जन्म भूमि पर मंदिर के लिए संसदीय कानून बनाने की उनकी मांग को केंद्र सरकार तक पहुंचाएं.
2. नवम्बर माह में सभी संसदीय क्षेत्रों में विशाल जन सभाएं होंगीं. वहां की जनता एक बड़े और व्यापक प्रतिनिधि मण्डल के साथ पूज्य संतों के नेतृत्व में अपने सांसदों से मिलेगी और उन्हें संसद में कानून बनाकर राम मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त करने का आग्रह करेगा.
3. 18 दिसंबर (गीता जयंती), जिस दिन बाबरी ढांचा ढहाया गया था, से 26 दिसम्बर तक भारत के प्रत्येक पूजा स्थान, मठ मंदिर, आश्रम, गुरुद्वारा, स्थानक व घरों में राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के लिए स्थानीय परम्परा के अनुसार अनुष्ठान होंगे.
4. पूज्य संतों का एक प्रतिनिधि मण्डल प्रधानमंत्री से मिलकर उन्हें करोड़ों राम भक्तों एवं साधू-संतों धर्माचार्यों की भावना से अवगत कराकर कानून बनाने का आग्रह करेंगे.

राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधि मण्डल में जगद्गुरु रामानन्दाचार्य श्री हंसदेवाचार्य जी महाराज, हरिद्वार, आचार्य महामण्डलेश्वर श्री स्वामी विशोकानन्द भारती जी महाराज, हरिद्वार, महामण्डलेश्वर युगपुरुष श्री स्वामी परमानन्द गिरि जी महाराज, हरिद्वार, महामण्डलेश्वर विश्वेश्वरानन्द जी महाराज, मुम्बई, अग्रदेवाचार्य श्री राघवाचार्य जी महाराज, सीकर, राजस्थान, श्री स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती जी महाराज, हरिद्वार, श्री स्वामी रामेश्वरदास श्रीवैष्णव जी महाराज, ऋषिकेश, स्वामी परमात्मानन्द जी महाराज, राजकोट के अलावा विश्व हिन्दू परिषद् के कार्याध्यक्ष श्री आलोक कुमार, उपाध्यक्ष श्री चम्पतराय व श्री जीवेश्वर मिश्र व संयुक्त महासचिव डा सुरेन्द्र कुमार जैन भी सामिल थे.

Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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