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परिवर्तिनी एकादशी 2025: एक व्रत जो बदल देता है जीवन कैसे ?

परिवर्तिनी एकादशी 2025: एक व्रत जो बदल देता है जीवन कैसे ?

परिवर्तिनी एकादशी 2025: एक व्रत जो बदल देता है जीवन कैसे ?
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परिवर्तिनी एकादशी 2025: एक व्रत जो बदल देता है जीवन कैसे ?

परिवर्तिनी एकादशी 2025: एक व्रत जो बदल देता है जीवन कैसे ?

हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। वर्ष भर में चौबीस एकादशी आती हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना महत्व और फल बताया गया है। इन्हीं में से एक है परिवर्तिनी एकादशी, जिसे पद्मा एकादशी और जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं और इसी कारण इसे “परिवर्तिनी” कहा जाता है। यह दिन व्रत और पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

परिवर्तिनी एकादशी 2025 की तिथि

वर्ष 2025 में परिवर्तिनी एकादशी 4 सितंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। एकादशी व्रत का पारण 5 सितंबर, शुक्रवार को किया जाएगा।

परिवर्तिनी एकादशी का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से समस्त पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि परिवर्तिनी एकादशी पर व्रत करने से व्यक्ति को वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है और उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। यही कारण है कि इसे जीवन बदलने वाला व्रत भी कहा जाता है।

व्रत विधि

  1. इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  2. भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं और धूप-फूल अर्पित करें।

  3. तुलसी दल, पीले पुष्प और फल अर्पित कर भगवान विष्णु की पूजा करें।

  4. दिनभर व्रत रखें और केवल फलाहार ग्रहण करें।

  5. रात्रि जागरण करना भी शुभ माना जाता है।

  6. अगले दिन प्रातः पूजा कर व्रत का पारण करें और जरूरतमंदों को दान दें।

कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेतायुग में एक बार बलि नामक दानव ने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी। दो पग में उन्होंने पृथ्वी और आकाश नाप लिया और तीसरे पग में बलि ने स्वयं को समर्पित कर दिया। इसके बाद भगवान विष्णु ने बलि को पाताल लोक में भेजा और वहीं उसकी रक्षा का वचन दिया। कहते हैं कि जब भगवान विष्णु शयन कर रहे होते हैं, तभी परिवर्तिनी एकादशी के दिन वे करवट बदलते हैं।

व्रत का फल

  • व्रत रखने से पापों का नाश होता है।

  • मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

  • पारिवारिक सुख-शांति मिलती है।

  • मोक्ष की प्राप्ति होती है।

परिवर्तिनी एकादशी केवल एक धार्मिक तिथि नहीं है, बल्कि यह व्रत जीवन में अनुशासन, भक्ति और सकारात्मकता लाने का अवसर है।

~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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August 29, 2025 2 min read
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