RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

Nirjala Ekadashi – क्यों माना जाता है सबसे श्रेष्ठ व्रत?

Nirjala Ekadashi – क्यों माना जाता है सबसे श्रेष्ठ व्रत?

Nirjala Ekadashi – क्यों माना जाता है सबसे श्रेष्ठ व्रत?
Visual Archive

Nirjala Ekadashi – क्यों माना जाता है सबसे श्रेष्ठ व्रत?

Nirjala Ekadashi – क्यों माना जाता है सबसे श्रेष्ठ व्रत?

निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायक और कठिनतम व्रतों में से एक मानी जाती है, जिसमें व्रती पूरे दिन बिना अन्न और जल के उपवास रखता है। यह व्रत केवल शारीरिक तप नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों तक जाने का साधन है, जहाँ व्यक्ति संयम, श्रद्धा और भक्ति का साक्षात अनुभव करता है। मान्यता है कि इस दिन का व्रत करने से साल भर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। भगवान विष्णु की विशेष पूजा, तुलसी अर्पण और विष्णु सहस्रनाम का पाठ इस दिन अतिशय फलदायी होता है। व्रत के साथ किया गया दान, जल सेवा और उपवास का संकल्प, व्यक्ति के भीतर के अहंकार और पापों को शांत करता है। निर्जला एकादशी, केवल एक दिन का त्याग नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मोक्ष की ओर बढ़ता एक महान पर्व है। यह दिन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा से नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण और सेवा से पूर्ण होती है।

निर्जला एकादशी क्या है?

निर्जला एकादशी हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह सभी 24 एकादशियों में सबसे कठिन और श्रेष्ठ मानी जाती है। “निर्जला” का अर्थ है बिना जल के, यानी इस दिन व्रती जल तक नहीं पीता।

इसलिए इसे “भीमसेनी एकादशी” भी कहा जाता है, क्योंकि महाभारत के भीम ने इसी व्रत के माध्यम से सभी एकादशियों का फल प्राप्त किया था।

इस व्रत का महत्व क्या है?

  • यह व्रत 24 एकादशियों का फल एक साथ देता है।

  • व्रती के सभी पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • यह व्रत मानसिक, शारीरिक और आत्मिक शुद्धि का पर्व है।

  • जो व्यक्ति अन्य एकादशियों का पालन नहीं कर पाता, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके उन सभी का पुण्य प्राप्त कर सकता है।

निर्जला एकादशी की कथा (संक्षेप में):

महाभारत के समय, पांडवों में भीम को अत्यधिक भूख लगती थी, और वह एकादशी व्रत नहीं रख पाता था। जब उसने यह बात ऋषि व्यास से कही, तो उन्होंने कहा कि – “तुम केवल ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का व्रत बिना जल के रखो, यही सब एकादशियों का फल देगा।” भीम ने यह कठिन व्रत किया, इसलिए इसे “भीम एकादशी” भी कहा जाता है।

व्रत की विधि:

  1. एक दिन पहले सात्विक भोजन करें और व्रत का संकल्प लें।

  2. व्रत के दिन प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें।

  3. पूरे दिन जल तक न लें (अत्यधिक आवश्यक होने पर तुलसी डालकर थोड़ा जल लिया जा सकता है)।

  4. दिन भर भजन-कीर्तन करें, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।

  5. रात्रि में जागरण करें या भगवान का स्मरण करते हुए सोएं।

  6. अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करें – जल, फल या हल्का सात्विक भोजन से।

क्या करें

  • प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें

  • भगवान विष्णु की पूजा करें (तुलसी, पंचामृत, पीले फूलों से)

  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें

  • शाम को दीपदान करें

  • ब्राह्मण या गरीबों को जलपात्र, छाता, वस्त्र, फल आदि का दान करें

क्या न करें

  • जल, अन्न या फल तक ग्रहण न करें (पूर्ण उपवास)

  • क्रोध, झूठ, आलस्य और निंदा से बचें

  • रात्रि में जागरण और विष्णु भजन करें, सोने से बचें

  • व्यर्थ समय न बिताएँ, संकल्प में दृढ़ रहें

विशेष लाभ:

  • सभी एकादशियों का पुण्य एक साथ

  • पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति

  • शरीर और आत्मा की शुद्धि

  • विष्णु जी की कृपा से जीवन में सुख, स्वास्थ्य और शांति

क्या आप व्रत रख सकते हैं?

यह व्रत अत्यंत कठोर है। वृद्ध, रोगी, गर्भवती स्त्रियाँ या जिन्हें स्वास्थ्य कारणों से उपवास करने की मनाही है, वे सामान्य एकादशी व्रत रख सकते हैं या केवल फलाहार कर सकते हैं।

6 जून 2025, निर्जला एकादशी केवल व्रत नहीं, बल्कि आत्मिक तपस्या का दिन है। यह आत्मा को शुद्ध करने, इंद्रियों पर नियंत्रण और भगवान विष्णु की कृपा पाने का श्रेष्ठ माध्यम है।

~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

May 26, 2025 4 min read
Share: